आचार्य चाणक्य को याद किया-चाणक्य स्मृति दिवस

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चाणक्य स्मृति दिवस,ajay tripathi,अजय त्रिपाठी,अनिल दूवेदी

रायपुर. भारतीय राजनीति के इतिहास और संस्कृति के महापुरूष आचार्य चाणक्य जी का स्मृति दिवस आज वृंदावन सभागार में मनाया गया. सर्व युवा ब्राहमण परिषद, वर्ल्ड ब्राहमण फेडरेशन तथा विप्र वार्ता परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य विद्यूत मंडल के अधिकारी एवम् आंध्र समाज के पी.वी.एस. शंकर थे जबकि अध्यक्षता छ. ग.ब्राहमण समाज केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष श्री विनय तिवारी ने किया. स्वागत एवम आधार वक्तव्य देते हुए संगठन की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार अजय अवस्थी किरण ने कहा कि ब्राह्मण समाज का मस्तिष्क होता है । ब्राह्मण के आचरण ,ज्ञान से और उनके बताए जीवन जीने की कला से समाज संस्कारित,सभ्य और सहिष्णु होता है । उन्होंने सभी आगन्तुको का स्वागत किया।

कार्यक्रम के मुखय वकता वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल द्विवेदी ने शोधपरक वकतव्य दिया. उन्होंने कहा कि आचार्य चाणकय ने जो मंत्र दिए, वह भारतीय सेना, राजनीति और समाज के लिए दिशामूलक और सफलता के सूत्र जैसे हैं. चाणकय जी ने समाज के हित में राजा बनाए, राज्यों को जीता भी और परास्त भी किया मगर अपने लिए एक झोपड़ी से ज्यादा कुछ नही रखा. यही सबसे बड़ा त्याग है. आचार्य चाणकय बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. उनके जैसा शिक्षक, अर्थशास्त्री, रणनीतिकार और राजनीतिज्ञ दुनिया में कोई नही हुआ. श्री द्विवेदी ने वर्तमान समय में ब्राहमण की समस्याओं का निदान बताते हुए कहा कि जो अन्याय राजा नंद के राज्य में ब्रामहणों के साथ हुआ, वही स्थिति देश की राजनीति में देखने को मिल रही है. आरक्षण और जातिगत राजनीति के चलते ब्रामहण हाशिए पर जरूर है लेकिन अपने कर्म, ज्ञान, श्रेष्ठ चारित्रय के कारण वह दुनिया का मार्गदर्शक बना हुआ है. आंध्र समाज के श्री पी.वी.एस. शंकर ने भी बा्रहमण एकता की बात पर जोर देते हुए कहा की सभी ब्राह्मणों का मूल एक ही है चाहे वे उत्तर के हो या दक्षिण पश्चिम के सभी को युवायो के हितो की रक्षा के लिए एक मंच पर आना होगा

अध्यक्षता कर रहे छ ग ब्रामहण समाज के अध्यक्ष श्री विनय तिवारी ने कहा कि अगर ब्राहमण एकजुट रहें तो विभाजनकारी शकितयां कभी सफल नही हो सकती. विप्रवार्ता के संपादक एवम अध्यक्ष वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन अरविंद ओझा ने कहा कि हमें अपनी कमजोरियां दुरूस्त करनी होंगी ताकि समाज का सम्मान और भरोसा ब्राह्मणो के प्रति बना रहे.
इसके पूर्व संगठन की श्रीमती सुनीता शर्मा, बबीता दुबे, शुभा मिश्रा, , सुमन मिश्रा, पुष्पा मिश्रा, शीला चक्रवर्ती, शकुंतला तिवारी, सुनीता चंसोरिया ,मिनाक्षी बाजपेयी, शिवानी मोइत्रा, सीमा पाण्डे,शकुंतला तिवारी, सरिता दुबे ,नमिता शर्मा, मंजू मिश्र अर्चना तिवारी, रज्जन अग्निहोत्री , नितिन झा, नितिन शर्मा, सुबोध शर्मा, एन बी शंकर पंकज पॉल, सुनील ओझा, सुधीर मूर्ति, राजकुमार दुबे सुरेश मिश्र विजय शुक्ल प्रदीप पाण्डेय इत्यादि ने अतिथियों का स्वागत और प्रतीक चिहन देकर सम्मानित किया । साथ बौद्धिक विमर्श में भाग लिया . कार्यक्रम में मुख्य रूप से विप्र वार्ता परिवार के अध्यक्ष श्री अजय त्रिपाठी,कान्यकुब्ज समाज से अरूण शुक्ल, गिरजाशंकर दीक्षित,शिवाकांत त्रिपाठी , अजय शर्मा, , इंजी अशोक शर्मा, , कवि नरेश दुबे तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री जयप्रकाश उपाध्याय, दिलीप झा, विनोद शर्मा, नरेन्द्र दुबे , सुरेश दिवेदी महासमुंद, शिशिर शर्मा , राजीव चक्रवर्ती, राघवेन्द्र पाठक, सतीश शर्मा आचार्य सुनील शर्मा राजेश्वरानन्द महराज, बनती शर्मा, इशानी शर्मा प्रमिला शर्मा उपस्थित थे. संचालन अविनय दुबे ने किया, आभार गुणनिधि मिश्रा ने जताया।

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