ऋषि

स्वात्मबोध

मैं ऋषियों की सन्तान, यशस्वी ब्राह्मण हूं।
है मुझे स्वत्व का भान, यशस्वी ब्राह्मण हूं।
मेरे इंगित पर युग ने करवट बदली है
मानवता को मैंने ही दी है परिभाषा
जब जब धरती का धैर्य टूटने लगा तभी
मैंने उसकी पीड़ाओं को दी है भाषा

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लक्ष्मी का निवास कहां ?

प्राचीन काल से मान्यता धार्मिक भावना, ऋषि मुनियों का यह कथन सर्वविदित है कि लक्ष्मी का निवास स्वच्छ आचार विचार, धार्मिक, दान-पुण्य, सहृद्य एवं सतकर्म करने वाले व्यक्तियों के पास रहता है । अन्यायी, अधार्मिक, भ्रष्टाचारी, बेईमान व्यक्ति लक्ष्मी से वंचित रहता है यह एक यर्थात था और रहेगा भी । इसमें क

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अष्टावक्र ऋषि

अष्टावक्र अद्वैत वेदान्त के महत्वपूर्ण ग्रन्थ अष्टावक्र गीता के ऋषि हैं।-उद्दालक ऋषि के एक शिष्य का नाम कहोड़ था। कहोड़ को सम्पूर्ण वेदों का ज्ञान देने के पश्‍चात् उद्दालक ऋषि ने उसके साथ अपनी रूपवती एवं गुणवती कन्या सुजाता का विवाह कर दिया। कुछ दिनों के बाद सुजाता गर्भवती हो गई। एक दिन कहोड़ वेदपाठ कर रहे थे तो गर्भ के भीतर से बालक ने कहा कि पिताजी! आप वेद का गलत पाठ कर रहे हैं। यह सुनते ही कहोड़ क्रोधित होकर बोले कि तू गर्भ से ही मेरा अपमान कर रहा है इसलिये तू आठ स्थानों से वक्र (टेढ़ा) हो जायेगा।जन्म के बाद बच्चे का नाम अष्टावक्र पडा ।

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रामायण के पात्र महर्षि वशिष्ठ

रामायण के पात्र महर्षि वशिष्ठ के भागीरथ प्रयत्न से गंगा धरती पर
महर्षि वशिष्ठ का वर्णन पुरानों में कई रुपों में बताया गया है । ब्रह्मा के मानस पुत्र , मित्रावरूण के पुत्र, अग्नि के पुत्र कहे जाते हैं । इनकी पत्नि का नाम अरूंधती देवी था ।

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