करवा चौथ - पति के दीर्घायु की कामना का व्रत

हमारी संस्कृति में व्रतों की परंपरा सदियों पुरानी रही है , यह करवा चौथ व्रत पति पत्नी के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, किसी भी विवाहिता स्त्री के लिए करवा चौथ व्रत बहुत महत्वपूर्ण होता है ।
कहते हैं करवा चौथ का व्रत करने से वैवाहिक जीवन सुख समृध्दि से परिपूर्ण होता है सौभाग्यवती स्त्रियां पति के रक्षार्थ यह व्रत करती है तथा रात्रि में शिव, चंद्रमा, स्वामी कार्तिकेय आदि के चित्रों एवं सुहाग की वस्तुओं की पूजा करती है इस दिन निर्जल व्रत करे , चंद्र दर्शन के बाद चंद्र को अर्ध्य देकर भोजन करना चाहिए कोई कोई स्त्रियां परस्पर चीनी या मिट्टी का करवा आदान प्रदान करतकी है । तथा कहानी सुनती है ।

कहानी एक बार पांडु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले गए, इसे शोकाकुल हो द्रौपदी ने कृष्ण का ध्यान किया भगवान के दर्शन होने पर इन कष्टों के निवारम हेतु उपाय पूछा कृष्ण बोले हे द्रौपदी, एक समय पार्वती ने शिव से यही प्रश्न किया था तो शिवजी ने उन्हें करवा चौथ को ही बतलाया था ।

हे पांचाली द्रौपदी प्राचीन काल में गुणी व धर्मपरायण एक ब्राह्मण रहता था उसके चार पुत्र तथा एक गुणवती , सुशील पुत्री थी, पुत्री ने विवाहित होने पर करवा चतुर्थी का व्रत किया किन्तु चंद्रोदय से पूर्व ही उसे क्षुधा ने बाध्य कर दिया, इससे उसके दयालु भाईयों ने छल से पीपल की आड़ में कृत्रिम चांद बनाकर दिखा दिया , कन्या ने अर्ध्य दे, भोजन किया, भोजन करते ही उसका पति मर गया इससे दु:खी होकर उसने अन्न जल छोड़ दिया ।

उसी रात्रि में इंद्राणी भू विचरण करने आई और उन्होंने ब्राह्मण कन्या ने इंद्राणी से अपने दुख का कारण पूछा । इंद्राणी बोली तुम्हें करवा चौथ व्रतमें चंद्र दर्शन के पूर्व भोजन कर लेने से यह कष्ट मिला है तब ब्राह्मण की कन्या ने अंजलि बांधकर विनय की कि इससे मुक्त होने का कोई साधन बताएं, इंद्राणी बोली यदि तुम विधिवत पुन: करवा चौथ व्रत करो तो निश्चित तुम्हारे पति पुनर्जीवित हो जाएंगे ।

उस कन्या ने वर्ष भर प्रत्येक चतुर्थी का व्रत किया तथा पति को प्राप्त किया ।
श्रीकृष्ण ने कहा हे द्रौपदी यदि तुम भी इस व्रत को करोगी तो तुम्हारे सभी संकट टल जाएंगी इस प्रकार द्रौपदी ने इस करवा चौथ व्रत को किया तथा पांडव विजयी हुए, अत: सौभाग्य पुत्र पौत्रादि और धन धान्य के इच्छुक को यह व्रत विधिपूर्वक करना चाहिए । -
संकलन - रामकिशन शर्मा

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