गोत्र

ब्राह्मण उत्पत्ति एवं उनके गोत्र-पं. राघवेन्द्र पाठक

भविष्य पुराण मं ब्राम्हणां के गोत्रों का उल्लेख मिलता है जो कि निम्नलिखित हैं.प्राचीन काल मं महर्षि कश्यप के पुत्र कण्वकी आर्यावनी नाम की देवकन्या पत्नी हुई। इन्द्रकी आज्ञासे दोनों कुरुक्षेत्रवासिनी सरस्वती नदी के तट पर गये और कण्व चतुर्वेदमय सूक्तों में सरस्वती देवी की स्तुति करने लगे। एक वर्ष ब

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गोत्र पुर विचार - डॉ. रामनारायण मिश्र

जम्बूद्वीप में दीर्घ काल से निवास कर रहे तथा जन्म कर्म धारण करने पर शाकद्वीपीय ब्राह्मण भी जम्बूद्वीपीय सदृश हो गये हैं । कुछ क्षेत्रों में यह धारणा है कि पुर भिन्न होने पर समान गोत्र में विवाह करना निषिध्द नहीं है । इसके विपरीत कुछ क्षेत्रों में समान गोत्र में विवाह को निषिध्द माना जाता है। इससे

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सकरमण मग भोजक ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा परम्परा उत्पत्ति एवं इतिहास

हर समाज में कुछ ऐसी परम्पराएं हैं, जिसेक पीछे गहरी अर्थ एवं इतिहास छुपा होता है । शाकद्वीपीय मग भोजक ब्राह्मणों में एक गोत्र है सकरमण । सकरमण गोत्र कैसे बना, इस पर हम अलग से विचार करेंगे । जैसलमेर, पोकरण, फलोदी क्षेत्र में पुष्पकरणा ब्राह्मणों के न्यात, ओसर, नुखता कोई भी होता है । उस समय जब कड़ाई

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