जाति

महासंगठन क्यों नहीं ?

सभी संगठनों को मिला महासंगठन क्यों नहीं ? मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और मनुष्य का चहुंमुखी विकास समाज के अन्दर ही संभव है. समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सुसंकृत होना अति आवश्यक है और इसके लिए हमे सब मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है.

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सभी जातियों के गरीबों के साथ धोखा

पंडित मदन मोहन मालवीय जी की 150 वीं जयन्ती के मौके पर सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक तीनों दृष्टि से ब्राह्मणों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए लाभदायक है आरक्षण का आर्थिक आधार पर मांग करते हैं। हमारी यह मांग समाज और सरकार को भी अन्ततोगत्वा माननी ही होगी और हमारी मांग की पूर्त्ति सिर्फ हमारे ल

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महात्मा गांधी के आदर्शों सत्य,अहिंसा एवं अनुशासन

15 अगस्त 1947 देश आजाद हुआ, आजादी के दीवानों में मंगल पाण्डेय , राजगुरू, भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद की बलिदान के नीव पर महात्मा गांधी के आदर्शों सत्य अहिंसा एवं अनुशासन के साथ गर्म नौजवानों के जो रक्त अंग्रेजी हुकुमत को भारत छोडऩे मजबूर कर दिया, लेकिन यह एक राजनैतिक सौदा था जिसके पीछे अंग्रेजों क

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