दया

युवाओं के लिए संस्कारवान होना आवश्यक

आज की पीढ़ी में संयम तथा संवेदना का अभाव है। जिसका मुख्य कारण तामसी खानपान, आचार तथा व्यवहार है। चैनलों पर दिखाये जाने वाले अश्लील और उत्तेजनात्मक सीरियल भी इन बातों को बढ़ावा देते हैं। इसका इलाज यही है कि बचपन में ही बच्चों को आत्मसंयम का पाठ पढ़ाया जाये। उनको अच्छे संस्कारों की शिक्षा दी जाये।

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समाज सुधार के अगुवा बने

भारत की संस्कृति में तीन शब्दों में व्यक्त करना है तो कह सकते हैं कि हमारी संस्कृति है अर्पण, तर्पण और समर्पण । तीनों में त्याग है और यह त्याग कर्तव्‍य रूपी है, उपकार रुपी नहीं । अर्थात त्याग करके हम किसी पर उपकार नहीं करते । समाज के लिए किया गया त्याग अर्पण हैं, पितरों के लिए माता-पिता के लिये क

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