नकली खोवा

ईमानदारी पर नजर रखने वाली नजरों का अकाल

धन्य है हमारा देश जिसका संस्कृति सभ्यता और भाईचरा का हम गुणगान करते नहीं थकते । हमारे विरासत में हमें हारने की आदत मिली है । आज भी हम हार रहे हैं । अंतर इतना है कि पहले दूसरे हराते थे अब हम अपनों से हार रहे हैं हमारा देश विशाल है साथ ही महान भी जितने भगवान और संत हमारे यहां जन्म लिये उसके अनुपात

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