ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला एकादशी अथवा भीमसेनी एकादशी कहते हैं । इस एकादशी के व्रत में स्नान और आचमन के अलावा जरा सा भी जल ग्रहण नहीं करना चाहिए । एकादशी के दिन सूर्योदय से लेकर द्वादशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान इत्यादि कर विप्रों को यथायोग्य दान देने और भोजन कराने के उपरान्त ही स्वयं भोजन करना चाहिए । एक एकादशी का व्रत रखने से समूची एकादशियों के व्रतों के फल की प्राप्ति सहज ही हो जाती है ।
पूजा विधि :- एकादशी के दिन सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें । पश्चात् ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करे । इस दिन व्रत करने वालों को चाहिए कि वह जल से कलश भरे व सफेद वस्त्र का उस पर ढक्कर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें ।
इस एकादशी का व्रत करके यथा सामर्थ्य अन्न, जल, वस्त्र, आसन, जूता, छतरी, पंखी तथा फलादि का दान करना चाहिए । इस दिन विधिपूर्वक जल कलश का दान करने वालों को वर्ष भर की एकादशियों का फल प्राप्त होता है । इस एकादशी का व्रत करने से अन्य तेईस एकादशियों पर अन्न खाने का दोष छूट जाएगा तथा सम्पूर्ण एकादशियों के पुण्य का लाभ भी मिलेगा ।
एवं य: कुरुते पूर्णा द्वादशीं पापनासिनीम् ।
सर्वपापविनिर्मुक्त: पदं गच्छन्त्यनामयम् ॥
इस प्रकार जो इस पवित्र एकादशी का व्रत करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर अविनाशी पद प्राप्त करता है । भक्ति भाव से कथा श्रवण करते हुए भगवान का कीर्तन करना चाहिए ।
Comments
nirjla ekadashi
utter bhart mein nirjla ekadshi ko sthan sthan par chabeel (meetha jal ya lassi pilane ka karyakarm ) lagai jatee hai. mera prashn hai ki yadi hum svyam nirjal rah kar dusre logon ko jal ya lassi pilayenge to kaya yeh dharam ka karya hoga ya adharm ka karya?
mera vishvash hai ki yeh kalash mein jal bhar kar daan dene sman karya hai.
Vinayak Sharma
President,Brahman Sabha,Pandoh (H.P.).
Kshetriya Prabhari,H.P.Brahman Sabha.(H.P.).
Nirajla Ekadashi Ritual and Fasting is excellent hindi article
Jyestha Shukla Ekadashi is called Nirjala Ekadashi or Bhimseni Ekadshi. In the fast of ekadashi apart from the bath and sip even a little water should not be taken.
It is the prime cause of calling it Nirjala Ekadashi, a fast on 11th without water. Amazing India!
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