पत्र

संपादक के नाम पत्र - बलराम त्रिपाठी, अनुपपूर से

विप्र वार्ता जो कि ब्राह्मïण समाज की एक ऐसी मार्ग दर्शी पत्रिका है जो कि भारतीय सभ्यता संस्कृति की उन सभी अनछुए तथ्यों को परिलक्षित करती है । जो कि आज के समाज के हिन्दू परम्पराओं एवं रीति रिवाज के एक आयना के रूप में अपनी अहम भूमिका  read more »

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सम्पादक के नाम पत्र - विप्र वार्ता अंक - मार्च 2010

विप्र वार्ता का प्रकाशन ब्राह्मïण समाज के लिए मील का पत्थर है । इस पत्रिका के माध्यमसे न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि अन्य प्रदेशों में भी एकता की अलख जगाने का माध्यम बनती जा रही है ।
आपसे अपेछा है कि पत्रिका के कलेवर में ब्राह्मïणों के गौरव, शौर्य से जुड़े कथानक , ब्राह्मïणों के गोत्र की मीमान्सा, सर्व ब्राह्मïणों की सूची क्षेत्र वार, प्रदेश वार, कान्य कुब्ज ,सरयूपारीण, सनाढ्य आदि के विवरण समयसमय पर अथवा विशेषांक के रूप में भी प्रकाशित करे यह कार्य इसलिए परम आवश्यक है कि पूरे देश का ब्राह्मïण बंधु एक दूसरे को जान सके ।

हम कूठ वार धोखा खा जाते हैं , और अपने को ही आस्पद सम्बोधन सरनेम के अज्ञान में भ्रमपाल बैठते हैं । इसके लिए पत्रिका में विज्ञापन प्रकाशित करके क्षेत्रीय व प्रान्तीय स्तर की जानकारी एकत्रित करके कम्प्यूटर में स्टोर करे और समय समय पर प्रकाशित करे । आशा है आप हमारे सुझाव को सर्व ब्राह्मïण समाज की मीटिंग में इस रखेंगे आपका सहयोगी ।

पं. दिनेश कुमार दीक्षित
नौरंगाबाद , इटावा उ.प्र.

आपके द्वारा प्रेषित मासिक पत्रिका विप्र वार्ता निरन्तर कुछ समय पूर्व से प्राप्त हो रहा है । खेद है कि आप तक सदस्यता शुल्क अपनी 95 वर्षिय वृद्धावस्था तथा अन्यकारण नहीं भेज पाया । कृपया क्षमा करें और 151 रू. सदस्यता हेतु मनीआर्डर द्वारा वार्षिक भेज रहा हूं कृपया स्वीकार कर कृतार्थ करें । यह अयोध्या धाम में अनेकों मंदिर है परन्तु माता सरस्वती मंदिर का पूर्ण अभाव है । ऐसी दशा में समिति स्वयं सरस्वती मंदिर निर्माण कर रही है जो भक्तो के सहयोग से शीघ्र पूरा हो जायेगा । यह समाज की उपेक्षा व असहयोग का दंश झेलने तथा अन्य समाज की उपेक्षा के बावजूद स्वयं माता के भरोसे मंदिर निर्माण हो रहा है जो अयोध्या के इतिहास में पहला मंदिर होगा ।

वैसे भी सरस्वती मंदिर प्राय: तीर्थ स्थलों में नहीं दिखता यदि दिखता होगा तो गिनती में समस्त विप्र शिक्षा विद आदि की माता सरस्वती की भव्य प्रतिभा अयोध्या में स्थापित होगी जो सभी के दर्शनीय समर्पित रहेगी । लोगों में अरूचि खेद का विषय है वह भी माता के प्रति जो विद्या यश धन आदि की दाता है । भक्तों का सहयोग सफलता शीघ्र प्रदान करेगा । यह शुभ समाचार विप्र बंधु को देना मेरा धर्म है शेष यदि जीवित रहा तो फिर कभी कुछ लिखूंगा । पत्रिका के प्रति आभार और प्रगति की शुभ कामना स्वीकारें । सभी को स्नेह व बधाई ।

शिवहम प्रसाद राय

पुस्तकालय के सदस्यगण आपकी लोकप्रिय पत्रिका विप्र वार्ता नियमित पढऩा चाहते हैं । यह एक सामाजिक संस्थान है जो ब्राह्मïण जाति के बेरोजगार युवक युवतियों द्वारा संचालित होता है । इसमें आपके सहयोग की अपेक्षा है ।

रामेन्द्र शर्मा, पुस्तकालयाध्यक्ष

मैं एक छात्र हूं । कृपया मुझे विप्र वार्ता हिन्दी मासिक पत्रिका की एक सामार्थ प्रति यथाशीघ्र प्रेषित कर कृतार्थ करेंगे तो आप की अति कृपा होगी ।

यदि आप पता अंग्रेजी में लिखेंगे तो डाक कर्मियों को सुविधा होगी क्योंकि यहां श्रीनगर कश्मीर में हिन्दी के ज्ञान का अभाव है तथा उर्दू या अंग्रेजी ही लिख पढ़ सकते हैं ।
विमल सिंह चाड़क, पाम्पपोरे श्रीनगर

नये संवत्सर 2067 पर आपको सपरिवार तथा विप्र वार्ता परिवार को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ । काव्यकुब्ज ब्राह्मïण समाज उ.प्र. का वार्षिक सम्मेलन सामूहिक यज्ञोपवित विवाह, वृहद महिला व ब्राह्मïण सम्मेलन सम्पन्न हुआ । महिला सम्मेलन में चिन्तन का विषय था महिलासशक्तिकरण क्यों और कैसे ? इस पर खूब रोचक सारगर्भित विचार व चर्चा हुई कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विजय लक्ष्मी त्रिवेदी, पूर्व प्राचार्य ए.एन.डी. महिला महाविद्यालय ने किया । उन्होंने महिलाओं को और सक्रिय व एक होकर समाज में दहेज प्रथा, अशिक्षा व दबी कुचली असहाय व निर्धन महिलाओं के कल्याण को भी सफल रूपरेखा व क्रियान्वयन पर बल दिया ।

नारी की प्रगति, उत्थान व सशक्तीकरण से राष्ट्र का कल्याण प्रगति व उत्थान निश्चित ही होगा । वृहद ब्राह्मïण सम्मेलन में डॉ. बी.एन. शर्मा भट्ट श्री विशेष अतिथि थे । अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. शर्मा जिस प्रकार अहर्निश, अनवरत कठिन परिश्रम द्वारा ब्राह्मïणसमाज की एकता हेतु नि:स्वार्थ सेवा अपने खर्च व परिश्रम से कर रहे हैं यह प्रेरणा स्रोत है । यह उनका 58 वां सम्मान है । इसी से यह प्रगट होता है कि वे कितने समर्पित है ।

एस.के. भट्ट

संपादक के नाम पत्र विप्र वार्ता अंक 2010

विप्र वार्ता विप्र का समझाती है धर्म
राष्ट्र देह का विप्र है मुख से मंडित मर्म ।
क्षत्रिय बाहू, वैश्य है उदर रूपव्यवहार।
शूद्र पैर का बन गया सेवाभय आचार ।
महिमा है हर अंग की इसे न जाये भूल ।
कर्ण व्यवस्था है रही अनुशासनमय कूल ।
इच्छुक जो आशी, के दें उनको आशीश ।
आराधक के सामने झुका न अपना शीश ।
सर्वयुवा परिषद बने ब्राह्मणत्व से पूर्ण ।
दंभी का करते रहे दंभ शापमय चूर्ण ।
संस्कार जागृत करें देश बने सम्पन्न ।
दुर्जन जिसको कर नहीं पाये कभी विपन्न ।
मासिक प्रेरक बन करे जन जन का परित्राण।
श्वेता करती कामना सबका हो कल्याण । - डॉ. महाश्वेता चतुर्वेदी, बरेली (उ.प्र.)

विप्र वार्ता का शाकद्वीपीय ब्राह्मण विशेषांक प्रकाशित हो गया हो तो कृपया एक प्रति भिजवाने का श्रम करावे । यदि संभव हो तो वर्ष 2009 के सभी अंक भिजवाने का कष्ट करावे । इस वर्ष एवं आगामी वर्षों की सदस्यता आपको अलग से भिजवा दी जाएगी । - आर.के. शर्मा  read more »

संपादक के नाम पत्र

विप्र वार्ता राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका आपने मुझे भेजकर कृतार्थ किया है। मेरी समझ से विप्र वार्ता को सिर्फ राष्ट्रीय हिन्दी मासिक पत्रिका न होनी चाहिए बल्कि इसे एक आंदोलन का रूप देना चाहिए । ये कैसे हो सकता
है ? जब सम्पूर्ण दुनिया के ब्राह्मण विप्पल गान पंत जी के अनुसार करेंगे तो दुनिया में जो विचार क्रांति होगी वो सम्पूर्ण जन मानस को आंदोलित व परिवर्तित करने की पृष्ठ भूमि तैयार करेगी ।

ब्राह्मण सिर्फ जाति नहीं है एक विचार गाथा है । ब्राह्मण वही है जिसमें ब्रह्म बनने की क्षमता है और ब्रह्म वही बन सकता है जो जीवन के लक्ष्मी विचार धारा का प्रस्फुटन करता है । सर्व युवा ब्राह्मण परिषद के कुछ करने की टीस है, जिसे आपकी भाषा में शायद ललक या इच्छा
है ।

गौतम, कोरबा  read more »

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संपादक के नाम पत्र

सर्व युवा ब्राह्मण परिषद का मुख पत्र विप्र-वार्ता ब्राह्मणों को जागृत करने के लिये अच्छी पत्रिका प्रकाशित की गई है, जिसके लिए मार्गदर्शक एवं सभी प्रतिनिधि मंडल बधाई के पात्र है, आज का समय ब्राह्मण परिवार के सदस्यों के लिए बड़ी चुनौती का समय है, इस पर हम सबकों मिलकर चिंतन करना आवश्यक हो गया है कोई विशेष बात नहीं बुध्दिजीवी माना जाने वाला ब्राह्मण अहंकार का त्यागकर सिर्फ अपने समाज के लिए कुछ कर जायें तो आने वाला हमारा भविष्य सुख-शांति से व्यतीत कर सकेंगें अन्यथा इस स्थिति में ईश्वर ही रक्षा करें छत्तीसगढ़ राज्य बनने के पश्चात् प्राय: यहाँ सभी प्रांतो से आकर बसने वाले ब्राह्मण अपना जीवन-यापन मिल-जुलकर कर रहें हैं, लेकिन आज भी वो मानसिकता बनी हुई है, कि हम छत्तीसगढ़िया है, वो परदेसिया है  read more »

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संपादक के नाम पत्र विप्र वार्ता अंक फरवरी 2009

विप्र वार्ता का अक्टूबर दिसम्बर 08 अंक प्राप्त हुआ आभार। संपादकीय प्रभावी है, विशेषकर अंक 32-33 का ।
आलोक पाण्डेय जी का राम रामायण एवं शैलेन्द्र शर्मा का छोटा होता अरूण पठनीय है । इस संबंध में आत्मचिंतन की बहुत आवश्यकता है ।

महाकूंभ की रपट, उत्साहवर्धक है। श्री संजय तिवारी की आव्हान कविता एवं डा. दुबे की दुर्गास्तुति अच्छी लगी ।

नववर्ष की मंगलकामनाओं सहित
आनन्द बिल्थरे (कवि, लेखक, समीक्षक), बालाघाट

ब्रह्म भट्ट समाज भिलाई द्वारा आयोजन पढ़कर आत्मिक प्रसन्नता हुई। इसी प्रकार समय समय पर ब्राह्मण समाज द्वारा विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होते रहे जिससे समाज मेंब्राह्णों ज्ञद्रलह्णलउ* की छवि प्रभावी होगी । यद्यपि आज मंत्री मण्डल में ब्राह्मणों को नहीं शामिलकिया गया किन्तु कल हमारा ही होगा । आज आवश्यकता इस बात की है कि हर स्थान पर जहां ब्राह्मण समाज का अपना भवन नहीं है वहां भवन वश्य निर्मित हो ।  read more »

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