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,रक्षा बंधन का पर्व विशेष

सभी विप्र बंधुयो को राखी पर्व की मंगल कामनाये,रक्षा बंधन का पर्व विशेष रुप से भावनाओं और संवेदनाओं का पर्व है. एक ऎसा बंधन जो दो लोगो को स्नेह की धागे से बांध ले,

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रक्षा बंधन प्रेम का अनूठा त्यौहार

रक्षा बंधन,भाई -बहन
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रक्षा बंधन भाई -बहन के निश्छल प्रेम का अनूठा त्यौहार है. सूनी कलाईयां और राखियाँ एक दूसरे की बाट जोहती हैं . इस पर्व को मनाये जाने की अनगिनत कहानियां हैं .

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पावन पर्व गंगा दशहरा

हिन्दू समाज मूलत: धर्म से जुड़ा हुआ समाज है यही कारण है कि हिन्दू समाज में हर पर्व, त्यौहार व्रत और उत्सव धर्म से जुड़े हुए परिलक्षित होते हैं इन्हीं में एक अति विशिष्ट पर्व है गंगा दशहरा जिसे ज्येष्ठ शुक्ल दशमी भी कहा जाता है । गंगा दशहरा वैसे तो लोक प्रचलित पर्व है परंतु धारणा की दृष्टि से देखे

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अवगुणों को प्रभु चरणों में समर्पित करने का पर्व ‘अक्षय तृतीया’

बाल विवाह,डा. सूर्यकांत मिश्रा

आज का दिन अक्षय तृतीया के नाम से क्यों जाना जाता है, इसके कारण को जानना भी जरूरी है। भगवान परशुराम का जन्म इसी दिन हुआ था। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो भी शुभ काम किया जाता है, उसका अक्षय फल (कभी खत्म न होने वाला फल) प्राप्त होता है। यही इस पर्व के ‘अक्षय तृतीया’ नाम पडऩे का मुख्य कारण भी है। बै

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मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर हुए नव वर्ष मिलन समारोह

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 मकर संक्रांति,गुजरात की सांस्कृतिक,परम्परा
गुजरात की सांस्कृतिक परम्परा
 कन्या भ्रूण हत्या,शपथ

कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज एवं शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा मकर संक्रांति पर्व पर नववर्ष मिलन एवं खिचड़ी का आयोजन आयोजित किया गया जिसमें समाज के महिलाओं एवं पुरूषों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किये गये । तिल के लड्डू एवं रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति के साथ कान्यकुब्ज समाज के वरिष्ठ प

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पर्वों की श्रृंखला

ऋषियों ने पर्वों की परम्परा इस कुशलता से बनाई है कि उच्च आदेर्शों को लक्ष्य करके बढऩे का उल्लास, लौकिक क्रिया कलापों के साथ मिलकर समाज में आदर्शयुक्त समरसता का संचार हो । दीपावली पर्व श्रृंखला के पर्व स्वस्थ समुन्नत जीवन पद्धति की रीतिनीति की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं। इन पर्वों में - त्रयोदशी- इ

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पुरूषोत्तम मास

Sharda gopal Sharma

भगवान विष्णु की आराधना का पर्व पुरूषोत्तम मास-इस वर्ष ज्येष्ठ मास अधिक मास है क्षण, मुहूर्त, पक्ष, मास, दिन, रात्रि आदि सब अपने अपने स्वामी से अधिकार प्राप्त करके निर्भय विचरण करते हैं किन्तु अधिक मास का न कोई नाम न कोई स्वामी एवं न कोई आश्रय होता है । अधिक मास में शुभ कार्य निषिद्ध है

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सामाजिक एकता और संस्कृति

ार्मिक सद्भाव, सहयोग पर्व, उत्सव , कला और साहित्य संस्कृति के अंग है । इनका आदान प्रदान संस्कृति एकता को जन्म देता है । संगठन की एकता अखण्डता एक समाज का जीवन और समृद्धि के लिए अनिवार्य है । जो समाज अपने पैरों पर खड़ा होना जानता है वह कभी परास्त नहीं हो सकता । जो समाज दूसरों पर निर्भर रहता है वह ल

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54 साल बाद आया दुर्लभ संयोग

शुभप्रद भौमावस्या 24 फरवरी को है , मंगलवार के दिन अमावस्या का यह योग 54 वर्षों बाद बन रहा है।

इस दुर्लभ संयोग में रूद्र पूजन और रुद्र पाठ का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है , विशेष सिध्दि वाला यह दिन रुद्र पूजन के लिये अति उत्तम माना गया है ।

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श्रावणी पूजा विधि विधान से संपन्न

गुजराती ब्राह्मण समाज रायपुर द्वारा प्रतिवर्षानुसार अपने रक्षाबंधन पावन पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार एवं बह्मभोज का आयोजन किया । क्षत्रीय जातीय सेवा समिति धर्मशाला में ब्रह्म समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए और श्रावणी पूजा विधान के अनुसार संपन्न कर अपने धारण किये ह

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