पूजा

दुर्लभ पुष्प - ब्रह्म कमल

 ब्रह्म कमल
 ब्रह्म कमल
 ब्रह्म कमल

सूर्यास्त के बाद खिलने वाले फूल ब्रह्म कमल ने एक बार फिर अपनी मुस्कान बिखेरनी शुरू कर दी है। कहा जाता है कि आम तौर पर फूल सूर्यास्त के बाद नहीं खिलते पर ब्रह्म कमल एक ऐसा फूल है, जिसे खिलने के लिए सूर्य के अस्त होने का इंतजार करना पड़ता है। हमारे मोहल्ले ऍम आर कालोनी में प्रो श्री ऍम एल शर्माजी

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भारत पाक युद्ध-साक्षात्कार

गुरुपूर्णिमा -गुरुदेव की पूजा

द्वापर युग के अंतिम भाग में व्यासजी प्रकट हुए थे। उन्होंने अपनी सर्वज्ञ दृष्टि से समझ लिया कि कलियुग में मनुष्यों की शारीरिक शक्ति और बुद्धि शक्ति बहुत घट जाएगी। इसलिए कलियुग के मनुष्यों को सभी वेदों का अध्ययन करना और उनको समझ लेना संभव नहीं रहेगा,उन्होंने वेदों का विभाग किया, इसलिए उनको व्यास या

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भारतीय परंपराओं का वैज्ञानिक आधार

भारत में सनातन धर्म किसी रूढ़िवादिता या अंधविश्वास के आधार पर कट्टरपंथी नहीं है। वास्तव में धर्म,मानव सभ्यता के विकास और नैसर्गिग सम्पदा को संरक्षण देने का आधार स्तंभ है । धराएत इति धर्म का मूल अर्थ जो धारण किया जाए वही धर्म है । हमारे रीति रिवाज, धार्मिक कार्य याकोई भी संस्कार योग्य कार्य का आधार

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वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ व्रतबंध

समता सोसायटी प्रांगण में छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज केन्द्रीय समिति द्वारा आज सामूहिक व्रतबंध समारोह का आयोजन किया गया । यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 25 बटुकों का व्रतबंध संपन्न हुआ । पूर्ण ब्र्राह्मणत्व प्राप्ति के लिए जनेउ धारण समारोह मे बच्चों के साथ ही परिजन उत्साह के साथ पहुंचे ।

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बसंत पंचमी विशेष - वीणावादिनी वर दे !

सरस्‍वती संस्‍कृत उवाच -
"साहित्य संगीत कला विहीन: साक्षात पशु: पुच्छविषाण हीन:"

अर्थात् हम अपने जीवन को पशुता से उपर उठाकर विद्या संपन्न, गुण संपन्न बनाएं, बसंत पंचमी इसी प्रेरणा का त्यौहार है ।।

सरस्‍वती पर्व बसंत पंचमी शिक्षा, साक्षरता, विद्या और विनय का पर्व है ।

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राशि के अनुसार हो शिव पूजा

शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी, इसीलिए इस दिन किया गया शिव पूजन, व्रत और उपवास अनंत फल दायी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रध्दालु भक्त अपनी राशि के अनुसार भी भगवान शिव की आराधना और पूजन कर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं । महाशिव रात्रि के दिन किसी भी र

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अन्नकूट गोवर्धन पूजा

कार्तिक शुक्ल प्रतिदिन को गोवर्धन अन्नकूट और बलिराज नाम से पुकराते है। दिन भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के स्थान पर गोवर्धन की पूजा को प्रारंभ किया था इससे कुपित होकर इंददेव ने मूसलाधार जल बरसाया था इससे कुपित होकर इंद्रदेव ने मूसलाधार जल बरसाया था और श्री कुष्ण जी ने गोप और गोपियों को बचाने के लिए

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