बन्दर बांट हो गया

जो राजस्व जहां से आया, उसका बन्दर बांट हो गया।
देसके पहेदारों ने ही, देश का बंटाढार कर दिया।
कागज पर योजना बन गई, कागज पर सब काम हो गये।
विज्ञापन विकास के नारे, अखबारों के शीर्ष बन गये।
सेवा की भावना मिट गई, राजनीति व्यापार हो गया
जो राजस्व....।
उडऩे वाली अर्थ व्यवस्था,आज गर्त में पहुंच गई है।
मंत्री मालामाल हो गये, जनता पानी मंाग रही है ।
सारा शासन और प्रशासन, सत्ता मद से चूर हो गया
जो राजस्व....
कोई चारे को चरता है किसी को खाद सुहाई है खूब
कोई औषधियां खाता है, सबकी हुई कमाई खूब।
खेल खेल में हुई कमाई, कलमाड़ी का काम हो गया
जो राजस्व...
हथियारों में हुई दलाली, सेनाये असहाय हो गई।
सीमायें सारी असुरक्षित, सत्ता सुख की नींद सो गई।
देश के कोनो कोने में है, आतंकी अधिकार हो गया।
जो राजस्व...
धरती से अम्बर तक देखो, भ्रष्टाचार गजब ढाता है ।
कोयले की कर रहे दलाली, मुंह काला होता जाता है ।
जांच समितियों की आख्यान में, मनमाना बदलाव हो गया
जो राजस्व....
बालाओ से दुष्कर्मों की सूची प्रतिदिन बढ़ जाती।
नये नये कानून समितियों से इति श्री कर ली जाती।
पश्चिम क संस्कृति अपनाने, से ही भ्रष्टाचार बढ़ गया।
जो राजस्व...
परदारा को माता मानो दुष्कर्मो से मुक्ति मिलेगी।
अपरिग्रह के सिद्धांतों से, त्याग भावना जागृत होगी।
अपनी भारतीय संस्कृति का ज्योति देेश ने त्याग कर दिया।
जो राजस्व..

ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री ज्योति
फर्रूखाबाद (उ.प्र.)

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