बहुमुखी

स्व. पद्मिनी शुक्ल बहुमुखी प्रतिभावान व्यक्तित्व

पद्मनी शुक्ल,श्यामाचरण शुक्ल,अजय त्रिपाठी,विप्रवार्ता,vipravarta,
पद्मनी शुक्ल,श्यामाचरण शुक्ल,अजय त्रिपाठी,विप्रवार्ता,vipravarta,

विश्व ब्राह्मण संघ छत्तीसगढ़, सर्व युवा ब्राह्मण परिषद छत्तीसगढ़ एवं विप्र वार्ता परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आज स्व. पंडित श्यामाचरण जी शुक्ल की धर्मपत्नी स्व.

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तुलसी दास बहुमुखी ज्ञान के आगार

संत प्रवर तुलसी दास बहुमुखी ज्ञान के आगार थे समुद्र थे ।
मानी स्वजन- वल्लभ:
त्यागी भोगी - ज्ञानी कामी
दीर्घसूत्रोंडरिमर्दक: ।।
योगीराज कृष्णतथा भगवान वेद व्यास के बाद पांच हजार वर्ष के अंतराल में बहुमुखी रस, छंद अलंकार समस्त शास्त्रों पर अमिट छाप छोडऩे वाले बहुमुखी प्रतिभायुक्त महापुरूष केवल संत प्रवर तुसलीदास ही प्रभा मंडल में अपना प्रभाव डाल सकें।
ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक गृह (घर), ग्रह मंगलकारी सुख नहीं देते यह भी सत्य है । आलोच्य जातक जनतंत्रकारी पराक्रम योगी धर्मकर्म अधिपति योगी परिवार से असंतुष्ट, वीत रागी विपर्यय राज्य योगी, वाणी विलास योगी, सुनफा योगी पत्रिका है । संवत 1554 विशाखा द्वितीय चरण तुसी नाम से जातक का जन्म हुआ । जन्म समय नीच के गुरू का भोगमान लगभग दसवर्ष शेष था, माता पिता कुटुम्ब आदि का सुख नहीं मिला ।
तुलसी नाम से तुला राशि प्रधान रूप से आगे स्वामी अनन्तमंद ने राम बोला नाम दिया।

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