बालकवि बैरागी

कविता----- बालकवि बैरागी

एक बात के लिये जो उम्र भर जिन्दा रहे
और वो भी ना मिले तो बहुत शर्मिन्दा रहे
उस दीप ऐ मैं कह रहा हूं इस तरह रोओ नहीं
अच्छी भली इस उम्र को इस तरह खोओ नहीं
स्नेह को साधे बिना धरती नहीं हिल पाएगी
आग को जिन्दा रखो सौ बााितयां मिल जाएंगी।

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