ब्राम्हण ग्रन्थों और धर्म के प्रचार प्रसार

मनाना है, तो मान ले, उस शास्त्र-शस्त्र के मार्ग को ।
जिस पर चले और बढ़े, स्वयं भगवान परशुराम ।
आइये, आज भगवान परशुराम जयंती है । जिसे हमें धूमधाम से मनाना है । इसे मनाने में काफी धनराशि की आवश्यकता भी होती है । मसलन लाईट, माईक, फटाके और नाश्ते की व्यवस्था के साथ साथ दूर दराज से आये विप्र बंधुओं के रूकने एवं भोजन की व्यवस्था भी तो करनी पड़ती है । अरे मैं तो बैण्ड बाजे की बात तो भूल रहा हू । एक बात और जो विशेष रूप से बताना लाजमी
है । समाज के गणमान्य लोगों के स्वागत के लिये फूलों का हार एवं गुलदस्ते भी तो चाहिए। क्या यही है भगवान परशुराम जयंती मनाने का औचत्यि ? तो बंद कर दीजियेगा ऐसी जयंती मनाना । जहां केवल धन का महत्व हो । समाज में छोटे बड़े का भेदभाव कहां तक न्यायसंगत है ।
भगवान परशुराम ने इन्हीं फिजूल खर्ची से दूर रहते हुए विप्र बंधुओं को समाज में अटूट एकता स्थापित करने की बात की थी । उन्होंने सादा जीवनऔर उच्च विचार को महत्व दिया था । जिसके वे साक्षात प्रमाण थे । भगवान परशुराम ने सर्व प्रथम शास्त्र सम्मत ज्ञान प्राप्त करने को महत्व दिया । व्यवस्थित ज्ञान के अभाव में जीवन पशुवत होता है । शास्त्रों का अध्ययन करो ज्ञानी बनो । ज्ञान को बांटो और एक आदर्श समाज का गठन करो ।
आज के दिन शास्त्रों के अध्ययन अध्यापन कर ब्राम्हण ग्रन्थों और ब्राम्हण धर्म के प्रचार प्रसार के महत्व को दर्शाते हुए उसके समकालीन आवश्यकता को प्रदर्शित करता है। बिना ज्ञान के किसी भी प्रकार के विकास की बात हास्यास्पद ही है । आज के इस शुभ अवसर पर दृढ़ता के साथ स्वनिर्णय ले की मैं केवल शास्त्रों का ज्ञान ही प्राप्त नहीं करूंगा अपितु इसको जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास भी करूंगा । तभी परशुराम जयंती मनाना सार्थक होगा ।
भगवान परशुराम ने केवल शास्त्र ज्ञान को ही नहीं शस्त्र ज्ञान को भी आवश्यक बताया था । वे जानते थे ज्ञान व शक्ति एक दूसरे के पूरक है । जिस प्रकार शिव, तभी तक शिव है जब उसके साथ शक्ति हो । बिना शक्ति के वह शिव नहीं केवल शव है । ठीक उसी प्रकार ज्ञान के बिना शक्ति और शक्ति के बिना ज्ञान अधूरे हैं । राम ज्ञान के और लक्षण शक्ति के अवतार थे । हमारे भगवान परशुराम ज्ञान व शक्ति के साक्षात प्रतिमूर्ति थे । तभी तो उन्होंने उस समय के दम्भी और व्याभिचारी शासकों को एक बार नहीं सत्रह बार नेस्तनाबूत किया था । आज के भयानक राक्षक रूपी भ्रष्टाचार को समाप्त करना है तो हमें भी शस्त्र का ज्ञान आवश्यक है । तभी यह जयन्ती मनाना आकर्षक व प्रशंसनीय होगा ।
फिर देर क्यों हम सब एक साथ बोले क्योंकि
जय परशुराम जो बोलेगा
परशु की शक्ति से
राम के ज्ञान से
एक साथ भर जायेगा
फिर देर ना कर
बोल जय परशुराम
जय जय परशुराम
जय जय परशुराम

सी.पी. तिवारी, बागबाहरा

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