ब्राहमण कुंभ 2008

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के पूर्व तक पहली बार समस्त ब्राह्मण समाज में लोग एक स्थान पर एकत्रित हुए और वह दिन है म अक्टूबर म00ॠ जिसमें की सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के समग्र ब्राह्मण समाज के म'000 लोग ने एकता प्रदर्शित करने को उपस्थित हुए जो कि प्रदेश की इतिहास में पहली बार ऐसी एकता देखने को मिला । प्रदेश के दूरस्थ स्थानों से विप्रजन ट्रेनों बसों एवं अपने स्वयं के साधनों से आये ऐसा लग रहा था मानो सम्पूर्ण राजधानी एवं आयोजन स्थल ब्राह्मण मय हो गया हो ।

महाकूंभ स्थल के मंच पर करीब '00 लोग विभिन्न समाजों के पदाधिकारी शंकराचार्य, साधु सन्तों की उपस्थिति थी । आदिकाल से ही ब्राह्मण समाज ने सत्ता, वैभव और धन की कामना न कर जनकल्याण तथा विश्व कल्याण के स्थापक उद्देश्य को अपना आदर्श बनाया है। आज हमें एक राज्य एक जन का सूत्र लेकर आगे बढ़ना है, ये विचार राजधानी के सुभाष स्टेडियम में समग्र ब्राह्मण प्रांतीय महासभा छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित ब्राह्मण महाकूंभ में वक्ताओं ने व्यक्त किए ।

उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को संगठित करना एक कठिन कार्य है । किन्तु असंभव नहीं । वर्तमान समय में ब्राह्मणों के सामने एक महान उद्देश्य है वह है राज्य और समाज को सही दिशा देने का काम । इस वक्, नागरिक अदिकार पर बगैर सोचे प्रदेश के दोनों प्रमुख दल विघटनकारी तत्वों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं । महाकूंभ को संबोधित करते हुए मंच अध्यक्ष ने कहा कि इतिहास बदलरहा है। हमारा प्रयास सामाजिक समरसता को सदैव से आगे बढ़ाने का रहा है और यह निरंतर जारी रहेगा ।

सांस्कृतिक प्रयास ही हमारी पहचान है । आदिकाल से ही ब्राह्मण समाज ने सत्ता, वैभव और धन की कामना न कर जनकल्याम तथा विश्व कल्याण के स्थापक उद्देश्य को अपना आदर्श बनाया है, आज हमें एक राज्य एक जन का सूत्र लेकर आगे बढ़ना है , ये विचार राजधानी के सुभाष स्टेडियम में समग्र ब्राह्मण प्रांतीय महासभा छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित ब्राह्मण महाकूंभ में वक्ताओं ने व्यक्त कि ए । उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को संगठित करना ेक कठिन कार्य है किन्तु असंभव नही, वर्तमान समय में ब्राह्मणों के सामने एक महान उद्देश्य है वह है राज्य और समाज को सही दिशा देने का काम, इस वक्त नागरिक अधिकार पर बगैर सोचे प्रदेश के दोनों प्रमुख दल विघटनकारी तत्वों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं ।

महाकूंभ को संबोधित करते हुए मंच अध्यक्ष ने कहा कि इतिहास बदलरहा है । हमारा प्रयास सामाजिक समरसता को सदैवसे आगे बढ़ाने का रहा है और यह निरंतर जारी रहेगा । सांस्कृतिक प्रयास ही हमारी पहचान है ।

महाकूंभ का शुभारंभ भगवान श्री परशुराम जी की पूजा अर्चना शंख घण्टा एवं डमरू नाद कर धार्मिक रीति रिवाज के साथ मंत्रोपचार द्वारा किया गया । कांचि कामकोटि पीठ के शंकरा चार्य जी के संदेश का पठन उनके प्रतिनिधि श्री रामायण श्री निवासन द्वारा अंग्रेजी में किया गया जिसका हिन्दी अनुवाद दण्डी स्वामी श्री चक्र महामेरू पीठम के पीठाधिश्वर श्री सच्चिदानन्द जी तीर्थ द्वारा किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषम प्रस्तुत करते हुए सर्व युवा ब्राह्मण परिषद के अध्यक्ष एवं समग्र ब्राह्मण प्रान्तीय महासभा युवा शाखा के पदेन अध्यक्ष श्री अजय त्रिपाठी ने कूंभ में पधारे विप्र जनों का स्वागत करते हुई इसी प्रदेश के इतिहास में अभूतपूर्व क्षण निरूपित किया और क हगा कि यह कूंभ प्रदेश को एक नई दिशा प्रदान करने में कारगर सिध्द होगा विप्र जनों के नेतृत्व में सर्वजन एक राज्य एक जन की कल्पना को साकार करेंगे ।

श्रृंगेरी कांची कोटि पीठ के शंकराचायम श्री निवासन ने अपने आशीर्वाचन में कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए शंकराचार्य ने पूरे देश का भ्रमम किया । आज इस कार्य को अंजाम देने के लिए ब्राह्मण समाज को आगे आना होगा । नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष अशोक शर्मा ने कहा कि समाज में एकता पहली आवश्यकता है । समाज की दिशा व दशा को सुधारने में ब्राह्मणों की भूमिका उल्लेखनीय रही है । आज इस कूंभ से हमें एक राज्य एक जन का सूत्र लेकर अपने क्षेत्र में वापस जाना है और वर्ष भर इस लक्ष्य की प्राप्ति का प्रयास करना है ।

श्रृंगेरी कांची कोटि पीठ के शंकराचार्य श्री निवासन ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए शंकराचार्य ने पूरे देश का भ्रमण किया । आज इस कार्य को अंजाम देने के लिए ब्राह्मण समाज को आगे आना होगा । नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष अशोक शर्मा ने कहा कि समाज में एकता पहली आवश्यकता है । समाज की दिशा व दशा को सुधारने में ब्राह्मणों की भूमिका उल्लेखनीय रही है । आज इस कूंभ से हमें एक राज्य ेक जन का सूत्र लेकर अपने क्षेत्र में वापस जाना है और वर्ष भर इस लक्ष्य की प्राप्ति का प्रयास करना है ।

ब्राह्मण महाकूंभ के आयोजन में प्रकाश डालते हुए समग्र ब्राह्मण प्रांतीय महासभा के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य सत्ता या राजनीतिमें भागीदारी या फिर आरक्षण की मांग करना नहीं है बल्कि हमारा व्यापक उद्देश्य है । ेक राज्य ेक जन प्रदेश के सभी ब्राह्मणों को अन्याय के विरोध में खड़ा हो जाना चाहिए । छ.ग. प्रदेश में ऐसी शक्तियां सर उठा रही जो समाज को धर्म जाति लिंग भेद के आधार पर बांटना चाहती है ।

श्री पाण्डेय ने आगे कहा कि हम जनतंत्र को जाति तंत्र में नहीं बदलने देंगे । श्री पांडे ने आगे कहा कि ब्राह्मण अपने स्वार्थ के लिए कम और परमार्थ के लिए कम जीता है । श्री पाण्डे ने महाकूंभ आये सभी ब्राह्मण समाज के लोगों के समक्ष संकल्प लिया और संकल्प दिलाया कि शासन के समक्ष मांग रखेंगे की परशुराम जयंती के दिन शासकीय अवकाश रखा जाये । गोस्वामी तुलसी दास जी की जयंती भी धुमधाम से माने का संकल्प लिया ।

श्री पाण्डेय ने कहा की नवगठित राज्य में विकास की अपार संभावनाएं है । जिसे प्रदेश का नेतृत्व स्वीकार करता है लेकिन इस विकास में बाधा का सबसे प्रमुख कारण राज्य में समर सत्ता सर्व सामाजिक एकता का अभाव है । ... ने आदि को राज्य और समाज की दिशा देने का कार्य किया । ब्राह्मनों ने अपनी भूमिका गांव गांव में निवास कर किया आप समग्र विकास की कल्पना के लिए ब्राह्मणों को आगे आना होगा । इस भूमिका के निर्वहन के लिए उन्हें दृढ़ संकल्पित होकर सर्व समाजों मे ंएकता और सदभावना का वातावरण निर्माण करने वाले कार्यक्रमों को हाथों में लेना होगा राजनैतिक शक्तिया अपने स्वार्थी के लिए इसे खनिज करते हुए कार्य कर रही है ।

बोड़सरा प्रकरण के विषय में पाण्डे जी ने कहा कि बाजपेयी परिवार के साथ अन्याय हो रहा है और सरकार ने उनके परिवार के पास सन म'मम में राजस्व रिकार्ड होने के बाद भी सरकार के किसी व्यक्ति के सपने के ाधार मात्र से उक्त जमीन का अधिग्रहण के आदेश दे दिये यह अन्याय है । पाण्डे जी ने आगे कहा कि राज्य के हजारों ब्राह्मणों को सपना आया कि वर्तमान मुख्यमंत्री निवास सन म000 के पूर्व भगवान परशुराम का क्रीड़ा स्थली था । आश्रम था. तो सरकार को चाहिए कि मुख्यमंत्री निवास ब्राह्मण समाज के लिए आबंटित कर दे इससे सरकार को किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आयेगा और न अधिग्रहण का समस्या नहीं आयेगी ।

संरक्षक श्री लाल मिश्र कवर्धा ने ब्राह्मणों को जागृत करने के इस अभियान को अभूतपूर्व निरूपित किया इस अवसर पर महाकूंभ की कल्पना एवं उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए समाजों में जहर घोलते आरक्षण संगठन के ौचित्य पर विचार किया गया एवं आगामी कायमक्रमों की छबि में लेने के लिए विप्र समाज के समक्ष ागामी म माह में ब्लाक स्तर में समन्वय समिति का गठन करने का संकल्प लिया गया ।

इस अवसर पर प्रमुख वक्ताओं में अनुसुइया दास अमरकंटक, लालजी मिश्रा, कवर्धा रमेश पटाक राजनांदगांव, नरेन्द्र सर्मा भाटापारा, पंडित अनंतधर शर्मा रायपुर, पुष्पा दीक्षित बिलासपुर, डॉ. प्रकाश नारायण शुक्ला, प्रेमशंकर गौटिया, मधुसुदन शर्मा सहित अन्य सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई । श्री राम शरण तिवारी बिलासपुर, प्रेम शंकर गौटिया, डॉ. प्रकाश नारायम शुक्ल, डॉ. अखिलेश त्रिपाठी, महासमुन्द, श्री निवास दुबे जगदलपुर, जानकी शर्मा धमतरी आर.एन. अवस्थी अंबिकापुर , श्री ओंकार पाण्डे बैकुण्ठपुर, अजय मिश्रा, प्रमोद दुबे, पुष्पा दीक्षित बिलासपुर, सतीश पाण्डे रायगढ़, मीन केतन दास सरायपाली, अमृत लाल बिलथरे, ममता राय, राजकुमार दुबे, राम कि शुन शर्मा, हेमन्त तिवारी, ज्ञानेश शर्मा, धनंजय त्रिपाठी, मुकेश शर्मा, असप तिवारी , इन्जी. शैलेन्द्र शर्मा सहित प्रदेश के कोने कोने से विप्र विप्र जन उपस्थित हुए ।

आयोजन की प्रस्तावना रखते हुए समग्र ब्राह्मण प्रांतीय महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष प्रेमशंकर गौटिया ने समग्र समाज को एक सूत्र में पिरोने के लिए संगतीकरण करने का आव्हान किया । उन्होंने कहा कि भरत को एक सूत्र में बांधने वाला ब्राह्मण सदैव सभी को लेकर समान भाव से चलता रहा है । उन्होंने उच्च आदर्शों को जीने वालों ब्राह्मण को भूलने से आज राज दिग्भ्रमित हो रहा है । संतों का सम्मान सदैव समाज में किया गया । देव पूजन आदि परम्पराएं हमारी रही हैं जिन्हे बरकरार रखना ब्राह्मणों कार् कत्तव्य है । ब्राह्मण कभी भी जातिवादी नहीं रहा इसलिए उसने राजपूत कुल के श्रीराम के आदर्शों को समाज में पहुंचाया प्रदेश के महासचिव श्री रमेश पटाक ने अपने सामाजिक कार्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रदेश में सद्भावना यात्रा के माध्यम से युवा साथी अजय त्रिपाठी द्वारा किया गया कार्य को प्रशंसनीय बताया ।

प्रदेश के संरक्षक श्री लालजी मिश्रा ने कहा कि मैं सामाजिक कार्यकर्ता हूं , मेरे जीवन का उद्देश्य कार्य करना है । उन्होंने उपस्थित विप्रजनों से वचन लिया कि आज के कार्यक्रम के बाद प्रदेश के हित में होने वाले इस तरह के आगामी कार्यक्रम में यहां उपस्थित एक ब्राह्मण अनिवार्य रूप से म0 ब्राह्मणों को जोड़कर शामिल होगा । भिलाई के प्रखर वक्ता श्री प्रभुदयाल मिश्रा ने प्रदेश में चल रहे कार्यों को राजनैतिक आतंक निरूपित करते हुए समाप्त करने की अपील की । उन्होंने कहा कि एक राज्य एक जन का यह नारा हमारी सोच को पुष्ट करता है जिसमें सभी समाजों में समृध्दि , समरसता के साथ वसुदेव कुटुम्बकम के वाक्य कों चरितार्थ किया है । विभिन्न ॠषियों के कार्यों को श्लोकों में उध्दत करते हुए सत्ता के मद में चूर राजनीतिज्ञों को ब्राह्मण की उपेक्षा नहीं करने की सलाह दी ।

कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. प्रकाश नारायण शुक्ला ने वर्तमान में राजनैतिक दल अंग्रेजों के भांति हिन्दुओं को बांटने की कोशिश कर रहे हैं । हमें सभी ब्राह्मणों को एक करने की आवश्यकता है । सामाजिक कार्यक्रमों से हट कर राजनैतिक कार्यों के लिए उन्होंने इस मंच के उपयोग न होने की घोषणा की । छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष इंजी. अशोक शर्मा ने कहा कि बिलासपुर में हुए पूर्व के सम्मेलन से कई गुना आज इस कूंभ में ब्राह्मण उपस्थित हैं । उन्होंने संज्ञा देते हुए कहा कि गुजरात में रहने वाला गुजराती ब्राह्मण, महाराष्ट्र में रहने वाला महाराष्ट्री ब्राह्मण , राजस्थान में राजस्थानी ब्राह्मण, तथा बंगाल में रहने वाला बंगाली ब्राह्मण कहलाता है तो हम सब जब छत्तीसगढ़ में निवास करते हैं तो हम सभी को छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण कहलाने में गर्व होना चाहिए । उन्होंने कहा कि वर्तमान में समाज को आरक्षण एवं वर्ग भेद से बांटने का कार्य हो रहा है उसे हम बर्दास्त नहीं करेंगे । सत्ता का संचालन राजगुरू के रूप में परम्परानुसार ब्राह्मण किया करते थे । इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में ब्राह्मणों के लिए म0 सीटें आरक्षित करने की मांग की ।

समग्र ब्राह्मण प्रांतीय महासभा के संरक्षक श्री रामशरण तिवारी ने उपस्थित संत समाज से ब्राह्मणों के हितों की रक्षा के कार्यों को आगे आकर करने की अपील की । उन्होंने कहा कि तभी हमारे समाजका उत्थान होगा । उन्होंने कहा कि हमें अपने समर्थ के अनुरूप अन्याय का विरोध करना सीखना होगा । उन्होंने आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा कि आपकी आवाज सुनी जायेगी, आप प्रबुध्द लोग हैं । आरक्षण को को कोढ़ निरूपित करते हुए श्री तिवारी ने आरक्षण का मायने योग्यता को नकारना बताया । उन्होंने संगठन की गतिशीलता के लिए समस्त ब्राह्मणों से अपनी शक्ति अनुरूप संस्था को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अपील की ।

समग्र ब्राह्मण प्रातींय महासभा की महिला अध्यक्ष श्रीमती सुमन पुरोहित ने वैचारिक मंच पर भारी संख्या में पहुंचे ब्राह्मणों को साधुवाद दिया । उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए आने वाली कल्पना के बाहर की समस्याओ को दूर करने के लिए विचार मंथन की आवश्यकता बताई । उन्होंने श्री वीरेन्द्र पाण्डेय एवं अजय त्रिपाठी के प्रति आभार प्रकटकरते हुए ब्राह्मण को एक होने की आवश्यकता बताई एक कविता के माध्यम से उन्होंने यह कहा कि - न हम जमीं से निकलेगा न हम सफर से निकलेगा हमारे पैर का कांटा अबह हमी से निकलेगा ।

संस्कृत के विद्वान एवं बिलासपुर से पधारी श्रीमती पुष्पा दीक्षित ने कहा कि हम अपने को भूल रहे हैं शास्त्र एवं शस्त्र दोनों विधाओं की आवश्यकता है । ब्राह्मणों के खिलाफ एवं उनके विरूध्द करने वालों को सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों का बल ब्रहाम बल सबसे बड़ा बल है । हम लगातार अन्याय को सहन कर ब्रह्मतेज का ह्रास कर रहे हैं उसे हमें पुन: पाना होगा । हजारों उदाहरण है जब भी राजाओं ने ब्राह्मणों का अपमान किया उसका नाश हुआ वे धरती पर से ही उड़ गया । दुष्ट शासकों पर अंकुश रखना ब्राह्मणों कार् कत्तव्य है आरक्षण की तलवार से शासकों ने हमें काटा है । हमें अब रोने से काम नहीं चलेगा । हम सभी ब्राह्मण एक है, देववाणी संस्कृत को पहचाने और उन शासकों का नाश करने के लिए हमारा ब्राह्मण कुल में जन्म हुआ है इस बात को निरूपित करे और संघे शक्ति कलयुगे के वाक्य को चरितार्थ करते हुए समस्त ब्राह्मण समाज एक हो ।

श्री चक्रमहामेरू पीठं के पीठाधिश्वर एवं विप्र वार्ता के अतिथि संपादक स्वामी सच्चिदानंद जी तीर्थ ने वेद के श्लोक में बताया कि गाय और ब्राह्मण सदैव पूजनीय होते हैं एवं जिस राज में इन दोनों का सम्मान नहीं होता वह राज्य स्वयं नष्ट हो जाता है ।

नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद श्री अशोक शर्मा ने समग्र ब्राह्मण प्रांतीय महासभा के टीम को बधाई देते हुए कहा कि असंभव सा लगने वाला यह कार्य उन्होंने संभव कर दिखाया । मानव समाज को दिशा देने का कार्य ब्राह्मण ने किया । उन्होंने कहा कि हम अपनी सामाजिक एकता और एकजूटता को दिखायेंगे तो हमें कुछ भी मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी । जो कुछ भी आवश्यकता होगी वह अपने आप उन तक पहुंचेगा । हमारे युवाओं को संयमित रहकर बुजुर्गों के आशीर्वाद से अपने संगठन, एकता को और मजबूत बनाना चाहिए । हमें कोई ताकत झुका नहीं सकती ।

गौतम ॠषि क्रोधे सुरपति के सहत्र भृगु
चंद्र को कलंक ताहि दिन सो लगायो है,
कपिल मुनि की दिव्य दृष्टि सागर सुख भस्म भये
अगस्त ॠषि क्रोधे तो सिंधु नदी भी सुखायो है ।
दुर्बासा के श्राप यदुवंशी सब नष्ट भये,
भृगु मुनि क्रोधे हरि नाश तो लगायो है ,
परशुराम फरसा से हैहयकुल नष्ट किन्हे,
ब्राह्मण के सताये कहो कौन सुख पायो है ।

Tags: