सेवा ईश्वरीय सेवा है । इस पुण्य व पवित्र कार्य को प्रत्येक व्यक्ति को अवश्य मेव व नि:स्वार्थ भाव से करना चाहिए । यह उसका धर्म वर् कत्तव्य दोनों है । इसमें आत्म सुख तो मिलता ही है साथ में समाज भी उन्नति व प्रगति करता है ।
अक्सर कुछ बंधु आरोप लगाते हैं कि केवल ब्राह्मणों के लिए कार्य करना क्या संकीर्णता व जातिवाद नहीं है। यह देश के लिए घातक है । ब्रम्ह समाज को केवल ब्राह्मणों के लिए ही नहीं वरन संपूर्ण समाज के लिए कार्य करना चाहिए । मेरा स्पष्ट मानना है कि ब्राह्मण कभी भी व्यतिवादी तथा जातिवादी नहीं रहा । वह तो सदैव मानववादी रहा । सुखिना भवन्ति निरामया सिध्दान्त का सदैव प्रतिपालक रहा । वह तो प्रत्येक प्राणी का सुख व कल्याण चाहता है ।
परन्तु ब्रह्म समाज में बहुत कमजोरियां, गरीबी व सामाजिक बुराईयां जैसे दहेज, मद्यपान, आदि भरी पड़ी है । अत: पहिले अपने घर को हमें ठीक करना है हमारे पास सीमित साधन व क्षमता है । हम अपनी उन ढेर सारी कमियों को पूर्ण रूप से निदा ननहीं कर पा रहे हैं । ऐसी मजबूरी में हम अन्य समाज की कमजोरियों को साधन व क्षमता के अभाव में दूर करने में असमर्थ है ।
अत: य.ह मजबूरी जातिवाद कतई नहीं है। हम तो उन्हें सब प्रकार से उत्साहित करते हैं । मार्गदर्शन देते हैं एवं अपने सद्कार्यों से आदर्श प्रस्तुत करते हैं । अत: जातिवादी का आरोप कतई उचित नहीं है। और आप लोग इससे कभी भी विचलित न होकर अपने ब्रह्म समाज की सेवा निरन्तर करते रहे जब तक हमारी कमजोरियां का संपूर्ण समाधान न हो जाये ।
कछुआ चाल से भला होने वाला नहीं है । अब कोऊ नृप होय हमें का हानी का विचार त्यागिये । यह बहुत पुरानी बाते हैं जब ब्राह्मणों को राजा महराजा चरण चूमते थे । उनकी प्रत्येक आज्ञा मानते थे. ब्राह्मण ही नीतिकार थे, सलाहकार थे और उन्हीं की इच्छा व परामर्श से राज सत्ता चलती थी । अब तो ब्राह्मणों को सभी तरीके से प्रताड़ित व अपमानित किया जाता है ।
अब बिखरे हुए अलग थलग वर्गों में बंटा हुए सभी ब्राह्मण एक होकर पूर्ण शक्ति से समर्पित होकर भारी से भारी संख्या में वोट डालकर अपनों को जिताइये । प्रत्येक व्यक्ति स्त्री, पुरूष बूड़ा, जवान अवश्य वोट डाले, चाहे उसे उपवास ही करना पड़े, लाइन में खड़े होना पडे या कोई भी कनिठाई सहना पड़े सत्ता के माध्यम से ही आपकी शीघ्र प्रगति व कल्याण होगा ।
दूसरी बात जो ब्राह्मण ही कर सकता है वह है भ्रष्टाचार को मिटाना एवं प्रतिभा को आरक्षण से बचाना क्योंकि ब्राह्मण तपस्वी, त्यागी, और सदैव राष्ट्रहित, मानव हित में ही कार्यरत रहा है । कभी भी राज सुख नहीं चाहा । चाणक्य ने अपनी बुध्दिमता व कौशल से सत्ता प्राप्त किया था परन्तु चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाकर स्वत: कुटिया में रहते थे । ब्राह्मण सदैव राष्ट्रहित सोचता है । read more »
पूरे देश में संपूर्ण भूभाग में हजारों वर्षों से करीब 325 ब्राह्मण उपजातियां अपने पूर्वजों के वेदों का संगोपाठ अध्ययन के आधार पर वेद पाठी ऋग्वेदी, चतुर्वेदी, सामवेदी, अर्थवेदी, यजुर्वेदी, चौबे, तिवारी, त्रिपाठी, त्रिवेदी, द्विवेदी, दुबे जैसे नामों से जानी जाती है ।
इसी प्रकार अलग अलग राज्यों में रहने वाले गौड़, मैथिल, मालवीय, द्रविड़, कन्नौजिये, कान्यकुब्ज, सरयूपारीण, आचार्य, पाठक, पुरोहित, याज्ञिक, याचक, अयाचक, त्यागी ब्राह्मण क्षेत्र के अनुसार वहां के पहचान के नाम और कर्म से जाने जाते हैं । इस प्रकार इतने प्रकार के इतने ब्रह्म क्षेत्रों में फैले ब्राह्मण का संगठन की आवश्यकता अनिवार्य हो गयी है । कुछ समर्थ एवं संकुचित दृष्टिकोण वाले इसे जातिवादी संगठन कहकर नकारने का प्रयास करते हैं ।
वैसे हमारे संगठन जातिवादी नहीं क्योंकि यह गैर राजनीतिक संगठन है । और इसका जन्म संपूर्ण समाज को विकास की दिशा देकर राष्ट्र को सशक्त एवं नागरिकों को मुख्य धारा में लाने अपने अहम भूमिका निभाना है । ऐसे संगठन से हमारे विभिन्न बिखरे वर्ग एक दूसरे के करीब आयें समझे और अपने राष्ट्रवादी संकल्प को आगे बढ़ाये । read more »
निखिल शाकद्वीपीय ब्राह्मण महासंघ पूर्व नाम अ्खिल शाकद्वीपीय ब्राह्मण सभा की स्थापना सन 1914 ई. मे मिश्रटोला, दरभंगा (बिहार) में हुई थी । जिसके प्रथम अध्यक्ष तथा महामंत्री थे क्रमश: तत्कालीन अयोध्या नरेश स्व. दिग्विजय नारायण प्रताप सिंह और स्व. पं. गिरीन्द्र मोहन मिश्र ।
स्थापना के बाद प्रचारतंत्र का अभाव तथा अन्य सामयिक कारणों से लगभग चार दशकों तक इसका समुचित विकास नहीं हो पाया । यद्यपि अयोध्या में सन् 1928 में एक बड़ी सभा हुई थी जिसमें राजस्थान और बिहार के अग्रणी बंधुओं ने भाग लिया था । दो वर्षों बाद सन 1930 में बहराइच (उ.प्र.) में भी सभा हुई थी ।
इसकी गतिविधियाँ सन 1959 में गया अधिवेशन से क्रमश: बढ़ी । स्व. पं. राजेश्वर दत्त शास्त्री, वाराणसी, स्व. पं. शिवनारायण शर्मा, उदयपुर, तथा स्व. पं. विद्याप्रसाद पाण्डेय, वाराणसी द्वारा संविधान का निर्माण हुआ तथा तत्कालीन अध्यक्ष स्व. पं. देवनन्दन मिश्र द्वारा स्वीकृत किया गया । read more »

ब्राह्मण अंतर्राष्ट्रीय के केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर मिश्र द्वारा गत दिवस रायगढ़ में हुए प्रांतीय सम्मेलन में कीर्ति भूषण पांडेय को केन्द्रीय महासचिवपद के अतिरिक्त प्रांताध्यक्ष पद पर एवं दीपक चौबे को प्रांतीय महासचिव पद पर मनोनीत किया गया साथ ही श्री जानकी प्रसाद शर्मा धमतरी, संयोजक मनोनित किये गये ।
सप्तद्वीप वसुन्धरा आदि आप्त वचनों से सिध्द है कि यह पृथ्वी सप्तद्वीपों एवं क्षीरादि सप्त सिन्धुओं से घिरी है, जिनका ज्ञान कराने में आज विज्ञान भी असमर्थ है । पुराकाल में अपनी तपस्चर्या के बल से ऋषिगण द्वीपों को प्रत्यक्ष कर लेते थे ।
भारतीय प्राक् भौगोलिक वर्णन में सात द्वीपों का वर्णन इस प्रकार है - जम्बू द्वीप, प्लक्षद्वीप, शाल्मलिद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप और पुष्कर द्वीप । उक्त सात द्वीपों में एक द्विव्यद्वीप भी है जहां के निवासी भी दिव्य है । वह द्वीप भी क्षीरसागर से परिवृत है , जिसे शाकद्वीप कहते हैं । शाकद्वीप का विस्तार बत्तीस लाख योजन है और उतनी ही विस्तार का उसके चारो ओर विशाल शाक नामक वृक्ष है, जिससे उसका नाम शाकद्वीप पड़ा है । उस वृक्ष में बड़ी सुगन्ध है, जिससे समस्त द्वीप सुगन्धित रहता है ।
उसका स्वामी प्रियव्रत का पुत्र मेधातिथि था । उसने उस द्वीप को अपने पुत्रों के समा नाम वाले सात भागों में बांटकर एक एक में एक एक पुत्र को राजा बनाया । उन पुत्रों का नाम पुरोजन, मनोजन, पवमान, धूम्रानीक, चित्ररेफ, बहुरूप और विश्वाधार थे । इनकी सीमा में पर्वत सात है और सात ही प्रसिध्द नदियाँ है । पर्वतों में ईशान, उरूश्रृङ्ग, बलभ्रद, शतकेसर, सहस्रस्रोत देवमाल और मानस है । नदियों का नाम अनघा, आयुर्दा, उभयस्मृष्टि, अपराजिता, पच्चपदी, सहस्रश्रुति और मदानस हैं । सर्वप्रथम मेरू का स्थान शाकद्वीप सर्वप्रथम सृष्टि का स्थान शाकद्वीप तथा वर्णाश्रमों मे ंप्रथम ब्राह्मणों की उत्पत्ति का स्थान शाकद्वीप है । read more »
ऋक, वाक्य ब्रह्म जानाति इति ब्राह्मण: से स्पष्ट है कि ब्राह्मण जाति ही नहीं, बल्कि एक संस्कृति संस्कार है । सामाजिक व्यवस्था के अंतर्गत यह शब्द जाति सूचक हो गया जो तत्कालीन सामाजिक कारणों से विभिन्न वर्गों में विभक्त होता गया । यद्यपि पौराणिक ग्रंथों में ब्राह्मण ही उल्लिखित है परन्तु वेद पुराणों में शाकद्वीपीय ब्राह्मणों का विभिन्न संदर्भों में उल्लेख मिलता है ।
वेद- पुराणों में उपलब्ध विवरणों से यह निष्कर्ष निकलता है कि सुर्यांश से उत्पन्न ब्राह्मण (ऋतव्रत) शाकद्वीप में निवास करते थे तथा (योनिज न होने से ) दिव्य कहलाये । सूर्य के तेजोमय अंश से उत्पन्न शाकद्वीपीय ब्राह्मण अग्रणी सूर्योपासक माने जाते हैं । मनुस्मृति के अनुसार सूर्यास्त के बाद श्राध्दकर्म वर्जित है । ऐसी स्थिति में शास्त्रवचन है कि शाकद्वीपीय ब्राह्मण को सूर्य के रूप में वरण करके सूर्यास्त के बाद भी श्राध्दकर्म सम्पन्न करना चाहिए । यह उनकी विशिष्टता और दिव्यता को दर्शाता है । तंत्र (अध्यात्म) और प्राचीन िकित्सा पध्दति पर इनका एकाधिकार था ।
यही कारण था कि भगवान द्वारा नियोजित एक घटना क्रम में, श्रापजनित कुष्ठरोग से पीड़ित श्रीकृष्ण पुत्र साम्ब की तांत्रिक (आध्यात्मिक) चिकित्सा के लिए शाकद्वीप से शाकद्वीपीय ब्राह्मणों के अट्ठारह परिवारों को सादर जम्बू द्वीप लाया गया था । चिकित्सा से साम्ब के रोग मुक्त होने पर ये विख्यात हुए । read more »

ब्राह्मणों के विभिन्न वर्गों में शाकद्वीपीय ब्राह्मण एक महत्वपूर्ण वर्ग है इन्हें मग ब्राह्मण भी कहा जाता है, विप्रवार्ता ने विभिन्न वर्गों के ब्राह्मणों पर विशेषांक निकालने का निर्णय लिया है । शाकद्वीपीय ब्राह्मण विशेषांक उसी माला का पहला मोती है ।
पहली कड़ी है इस संबंध में हमें बीकानेर, जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, जालना, जलशोक और औरंगाबाद जशपुर से विभिन्न लेख प्राप्त हुए । इन सारगर्भित और प्रामाणिक लेकों को हम इस विशेषांक में प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि हम अपने समाज का इतिहास संस्कृति और लोक व्यवहार को जान सके ।
किसी व्यक्ति अथवा संस्था पर व्यक्तिगत कटाक्ष करना हमारा उद्देश्य नहीं है किन्तु कुछ ज्वलंत मुद्दों पर हमें सोचना होगा .. read more »

बड़ी विडंबना है कि आज ब्राह्मण चाहे चौक चौराहों पर मिलें, सामाजिक आयोजनों अथवा शादी विवाह जैसे पारिवारिक आयोजनों में मात्र यही चर्चा करते हैं कि क्या बताएं साहब ब्राह्मण पिछड़ता जा रहा है ।
राजनीति ने सवर्णों विशेषकर ब्राह्मणों को पीछे ढकेल कर पिछड़ों अल्पसंख्यकों एवं अन्य जातियों को आगे कर दिया है वे ब्राह्मणों को इस काबिल ही नहीं समझते उनकी समस्यायें सही ढंग से सुनी जाये और नही उनको समझने का समय किसी भी राजनीतिज्ञ के पास है ।
मेरे विचार से चर्चा यह होनी चाहिए कि ब्राह्मण क्यों पिछड़ रहा है ? उसके कारण जानना जरूरी है कि ब्राह्मणों के बच्चों में हीन भावना क्यों आ रही है ? read more »

आदिकाल से भारतीय संस्कृति की रक्षा ब्राह्मणों से हुई है । ब्राह्मणों और गायों की रक्षा के लिए भगवान के अवतार हुए हैं । कहा गया है कि -विप्र धेनु सुर सन्त हित लीन्ह मनुज अवतार । विप्र वंश सदा समाज की सेवा में लगा रहा । भगवान का आशीर्वाद भी उसे अवश्य मिलता रहा । उदार भावना से ओतप्रोत होकर ब्राह्मणों ने समाज को जोड़ने का कार्य किया । आदिकाल से एक सूत्र में बांधने के लिए विप्र समाज ने ही कार्य किया है । भगवान राम -कृष्ण ने स्वयं कहा है -
विप्र प्रसादा कमला वरोहम,
विप्र प्रशादा धरणि धरोहम्
विप्र प्रशादा बैकुन्ठाधिपत्यम्,
विप्र प्रसादा मम राम नाम् ॥ read more »

Akhil Bhartiya Brahman Mahasangh
Sneha Smurti, Ganesh Nagar, Bhosari, Pune - 411 039, Ph : 9623430166, 9422014604
email - abbmgkulkarni@gmail.com
Under joint auspicious of -
Akhil Bhartiya Brahman Mahasangh and Brahman Samaj of India
Newely elected brahmin members of fifteenth parliament will be felcitated on Thursday 9th july 2009 at 6.00 PM
President of Function
Shri Devendra Sharma (Jammu and Kashmir)
Ex. President of AIBF
Pt. Vasant Rao Gadgil (Maharashtra)
Kulguru ABBM
Acharya Prabhakar Mihsra (Dehli)
Chairman, Brahman International
Venue
DEHLI KARNATAKA SANGH AUDITORIUM,
Rao Tularam Marg, Sector 12, R.K. Puram, N. Dehli - 110022
You are co-ordialy requested to attend this programme woth family and friends
Yours
Shri Govind Kulkarni, President
State Chief
Shri Venktesh M.V. Dehli
Shri Shinath Iyyangar, Dehli
Dr. SHriram Masalekar, Maharashtra
Shri Aralumallige Parth Sarathi, Karnataka
Shir Narendra Dadhichi, Rajasthan
Shri Ajay Tripathi, Chhattisgarh
Shri Baba Kulkarni, Mumbai,
Shri H.B. Uppaldinni, Goa
Akhil Bhartiya Brahman Mahasnagh
Shri R.D. Dixit Chairman
Shri Uttam Tiwari, G. Secretory
Shri Sudama Mishra
Shri Ramdas Tiwari
Shri Rakesh Mishra
Shri R.S. Shukla (Wing Comm.)
Shri Ashutosh Pandey
Brahman Samaj of India
विप्र सांसदों का सम्मान समारोह
9 जुलाई 2009 को अखिल भारतीय ब्राहम्ण महासभा के तत्वाधान में देश के नव निनर्वाचित विप्र सांसदों ब्राह्मण सांसदों का सम्मान समारोह राघवेन्द्र स्वामी मठ नई दिल्ली के ऑडिटोरियम में समपन्न होगा आप सादर आमंत्रित है
अजय त्रिपाठी
Felicitation of Vipra MP Brahmin MP India
The felicitation of Vipra MPs aka Brahmin MPs aka Brahmin Vipra Member Of Parliaments is held at Raghvendra Swami Math Auditorium of New Delhi by All India Brahmin General Assembely at 90 July 2009.
You are Sincerely Invited
Regards Ajay Tripathi
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