ब्राह्मण जाति

ब्राह्मण जाति नहीं उच्च संस्कृति है

ब्राह्मण को लोग जाति के नाम से जानते हैं और बहुत संकीर्णता की दृष्टि से देखते तथा जातिवादी समझते हैं । परंतु यह मिथ्या है, असत्य है । ब्राह्मण तो अति उदार, दयालु परोपकारी है। स्वत: भूखा रहकर अतिथि व भूखे का पेट भरता है। शरणागति को स्वत: का प्राण देकर उसकी रक्षा करता है। स्वत: कुटिया में रहकर राज

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महासंगठन क्यों नहीं ?

सभी संगठनों को मिला महासंगठन क्यों नहीं ? मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और मनुष्य का चहुंमुखी विकास समाज के अन्दर ही संभव है. समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सुसंकृत होना अति आवश्यक है और इसके लिए हमे सब मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है.

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