ब्राह्मण महाधिवेशन नयी दिल्ली में असफल था ?

राष्ट्रीय संगठन पर सभी का दृष्टिकोण एक ह दिल्ली के राम लीला मैदान में आयोजित ब्राह्मण महाकुंभ के आयोजन को लेकर विप्र वार्ता की सूचनाओं और पिछले माह श्री विनायक शर्मा के संपादकीय पर प्राप्त टिप्पणियां आपके विचारार्थ मूल स्वरूप में प्रकाशित हैं ।क्या 29-30 अप्रैल 2012 का अ.भा. बहुभाषीय ब्राह्मण महाधिवेशन नयी दिल्ली में असफल था ? मैंने दोनों ही दिन पूरा समय महाधिवेशन में बड़े उत्साह लगन व सक्रियता के साथ पूर्ण मनोयोग व प्रशन्नता पूर्वक भाग लिया। मैं परम सौभाग्य शाली था कि मुझे मंच पर स्थान मिला और परम पूज्य गुरू जी घैसास द्वारा पगड़ी अंग वस्त्र, शाल, स्मृति चिन्ह रूद्राक्ष माला व पुष्प भेंटकर सम्मानित किया गया । मेरा हृदय से मानना है कि यह अधिवेशन पूर्णत: सफल व मार्गदर्शक रहा । यह अधिवेशन ऐतिहासिक मील का पत्थर था । यह अधिवेशनसभी लोगों को प्रेरित व उर्जा प्रदान करने वाला था ।
यह सही है कि इसमें भीड़ तंत्र की कमी थी परंतु जिस प्रकार एक चंद्रमा सारे जगत को देदीप्यमान करता है हजारो तारे नहीं, एक जलता दीपक ही गहन अंधकार को दूर करता है, हजारो बुझे हुए दीपक नहीं ठीक उसी प्रकार इस महान अधिवेशन में कितने विद्वान संत, ज्ञानी, विचारक, व चिन्तक चन्द्रमा के समान विद्यमान थे अत: संख्या बल या भीड़ तंत्र का बहुत महत्व नहीं है ।
इस महाधिवेशन में विभिन्न प्रान्तों से कोनो कोने से पधारे कई कई क्षेत्रों के विभिन्न भाषाओं के उद्भट विद्वान, संत, ज्ञानी, सचमुच लघु भारत का स्वरूप व उच्च भारतीय संस्कृति का आभास प्रगट कर रहे थे । उन विद्वानों के उदबोधन से सभी लगों में नवीन उत्साह व उर्जा प्राप्त हो रही थी । दूर दूर तक लाउडस्पीकर द्वारा उनकी अमृत मय वाणी से उच्चतम विचार राष्ट्र हित समाज हित व मानव हित प्रसारित हो रहा था । क्या बिना महाधिवेशन के ऐसा दुर्लभ लाभ संभव था । अत: यह महाधिवेशन कई बिन्दुओं के दृष्टिगत महान सफल था ।
परन्तु भीड़ तंत्र की कमी अथवा अन्य कुछ कमजोरियों के कारण क्या हम निराश हो हात पर हाथ धर निष्क्रिय हो जाये। यह अनुचित है व आत्मघाती प्रवृत्ति है। ईश्वर भी उसी की मदद करता है जो असफलताओं तथा बाधाओं से डरता नहीं है, वरन द्विगुणित शक्ति, साहस व उत्साह पूर्वक आगे ही बढ़ता जाता है जब तक कार्य सिद्ध न हो जाये । पुरूषार्थियों को तो क्षीणक असफलता व बाधाएं तो दूना उत्साह व उर्जा भरती है और वे अवश्यमेव सफलता प्राप्त करते हैं । अत: आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि अगला महाधिवेशन अवश्य ही सफल होगा और जो कभी व शुद्धि हो गयी है वह दूर हो जायेगी । हमें फिर राष्ट्र के निर्माण व उत्थान में ब्राह्मणों का नेतृत्व व यश प्राप्त होगा ।
डॉ. बीन.एन. शर्मा, कानपुर

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