ब्राह्मण समाज की एकता का आव्हान

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कोलकाता । ब्राह्मण समाज को एक नई दशा एवं दिशा देने के लिए तीन दिवसीय विप्र महाकुम्भ कार्यक्रम का उद्धाटन राजस्थान के उद्योग मंत्री राजेन्द्र पारीक ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कुम्भ की स्थापना कर किया । समारोह अध्यक्ष गोविन्द नारायण खादीवाले, स्वागताध्यक्ष बनवारी लालसोती एवं राजस्थान ब्राह्मणसंघ के अध्यक्ष राजेन्द्र खम्डेलवाल ने भगवान गणेश, परशुराम एवं वेद माता गायत्री के विग्रह पर पुष्प वर्षा की । कार्यक्रम में दीप प्रज्जवलित डॉ. केदार शर्मा जयपुर, पं. शम्भू शरम लाटा कोलकाता, पं. धनराज पुजारी सालासरएवं पं. पवन पुजारी खाटू श्यामजी ने किया । कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान ब्राह्मण संघ के तत्वावधान में तथा विप्र महाकुम्भ आयोजन समिति की ओर से किया गया। इस मौके पर विभिन्न प्रांतों से आए ब्राह्मण समाज से हजारों लोग उपस्थित थे । यहां भव्यरूप से मंच को सजाया गया है । भारत माता, मां दुर्गा परशुराम, चाणक्य, लक्ष्मीबाई, रामकृष्ण परमहंस आदि की तस्वीरें मंचकी शोभा बढ़ा रही थी ।

मुख्य संयोजक सुशील ओझा ने महाकुम्भ के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला । अतिथि के रूप में राजस्थान के परिवहन मंत्री बृजकिशोर शर्मा ने विप्र समाज की एकता का संदेश दिया । कार्यक्रम में आस्ट्रेलिया भौतिक विज्ञानी डॉ. ओम कुमार हर्ष भी मौजूद थे । मौके पर महाराष्ट्र के पूर्वमंत्री राज के पुरोहित, विधायक मोहन जोशी, बिहार के विधायक प्रदीप जोशी ने वक्तव्य रखा । यहां छोटे पर्दे की अंबिका गौड़ बालिका धारावारिक का भी स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन तिवारी ने किया । कार्यक्रम पूर्व पोस्ता गणेश मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई । शोभायात्रा में भगवान गणेश, परशुराम, माता तथा भगवान शिव की झांकी निकाली गई । आदिवासियों के वेश में नृत्य भी प्रस्तुत किया । शोभा यात्रा का विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। शोभायात्रा विभिन्न प्रांतों से आए ब्राह्मण सदस्योंके प्रतिनिदि जय परशुराम का नारा लगा रहे थे । छत्तीसगढ़ दल में सांसद श्री गोपाल व्यास, पूर्व मंत्री श्री सत्य नारायण शर्मा, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री गोविन्द लाल वोरा, समग्र ब्राह्मण प्रांतीय महासभा के सचिव पी. भानू जी राव, प्रांतीय युवा अध्यक्ष अजय त्रिपाठी, सचिव रामकिशन शर्मा, प्रचार मंत्री सतीश शर्मा, शाकद्विपीय समाज के ट्रस्टी बल्देव शर्मा सहित प्रदेश के अधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे ।

विप्र महाकुम्भ में 3 करोड़ की राशि संग्रहित

चेन्नई के संजय शर्मा द्वारा 1 करोड़ रुपये की राशि से शुरू हुआ क्रम राजस्थान के दाऊसर रतनगढ़ के मूल निवासी एवं हाल में गुवाहाटी के निवासी 42 वर्षीय युवा, मेहनती और ईमानदार व्यक्तित्व पं. श्रीरतन शर्मा द्वार ाप्रतिवर्ष 1करोड़ रुपये सहयोग रुपी प्रदान करने की घोषणा के साथ अनवरत जैसे सुचारू हो गया । समापन समारोह से पूर्व लगभग 2 करोड़ 86 लाख की घोषणाएं आयोजक पंडित श्री सुशीला ओझा कर चुके थे । अगले वर्ष इन्हीं तीन तिथियों 25, 26 और 27 दिसंबर2010 की गुवाहाटी में ऐसे महाकुंभमें पुन:एकत्रित होने की उद्धोषणा के साथ ओझा ने बताया कि राजस्थान ब्राह्मण संघ आज गौरवान्वित महसूस किया ।

समापन समारोह में महाराष्ट्र महिला आर्थिक विकास महामण्डलकी अध्यक्षा श्रीमती प्रभा ओझा ने एकमात्र महिला प्रतिनिधि के रूपमें अपने वक्तव्य में कहा कि मातृशळक्ति, लक्ष्मी देवी सहित आधी आबादी की उपमादी जा रही है तो दर्जा भी बराबरी का कन्धे से कंधा मिलने जैसा मिलना चाहिए । अपनी ओर से मन और धन का पूर्ण सहयोग देने की बात के साथ वे जन्म से ब्राह्मणवादी है, महाराष्ट्र में ब्राह्मण होने की ठोकरे भी खाई है । उन्होंने कहा कि ब्राह्मण जहां कर्मकाण्डी होने के साथ अपने आप को भगवान तक समझने लगा है यह सर्वथा गलत है ।

ओझा ने कहा कि उन्हें भाषण तालिया मंजूर नहीं है । ना ही चिकनी चुपड़ी बाते आती है अब कुछहासिल करने के लिए बुरा बनना पड़ेगा । राजनेताओं को बिगड़ैल और नामी चोर की संज्ञा देते हुए प्रभा ने जब कहा हमारे भविष्य का वक्त खतरनाक दिखाईदे रहा है ऐसे में प्रत्येक ब्राह्मण को अकाल मौत से बचने के लिए नित्यपिता के चरणों में तथा लक्ष्मी प्राप्ति के लिए माँ के चरणों में शीश नवाकर अपना समर्पण देना होगा ।

विप्रो अकेले रास्ता कठिन है, प्रैक्टिकल हो जाए-

ब्रिगेडियर सुभाष पारीक ने ब्राह्मणों को ज्ञानी बताते हुए वर्तमान युग में तपस्या, कठिन परिश्रम को आवश्यक जताया । उन्होंने कहा कि सहूलियतें है समाज यशस्वी है मगर चैनल बध्द नहीं है ।
विश्व बैंक के सलाहकार पूर्व आईएएस भागीरथ शर्मा ने समाज की स्थिति को मोर जैसी बताते हुए कहा कि समाज दिशा भ्रम है क्योंकि संगठित नहीं । शर्मा ने राजनीतिक और सांगठनिक दृष्टि से एक होने की अपनी पुरजोर अपील के सात कहा कि हम बुध्दिजीवी का भ्रम पालकर सिर्फ तर्क करते हैं जबकि वितर्क हो जाता है । रास्ता अकेले कठिन है इसलिए प्रैक्टिकल हो जाए ।

सकारात्मक विचारोत्तेजना जगाने की जरूरत-आचार्य

6 करोड़ की जनसंख्या वाला ब्राह्मण वर्ण विभिन्न उपजातियों में बंटा है अब आपसी समन्वय संबंधों को बनाकर एकजुट हो अब तक सात में रोटी का व्यवहार रहा है । अब बेटी का भी बनाएं । वृहत्तर विप्र समाज के बीच वैवाहिक संबंध ावश्यकता एवं कठिनाईयां विषयक गोष्ठी में वरि,्ठ पत्रकार श्याम आचार्य की अध्यक्षता छगनलाल शर्मा, साहित्यकार नन्दकिशोर शर्मा, चिंतक एवं अमृत संदेश अखबार के संपादक गोविन्दलाल वोरा ने अपनी अपनी राय व्यक्त की ।

समाज में 4 पीढ़ियां बताते हुए वे बोले कि वयोवृध्द बुजुर्ग, बुजुर्ग युवा और किशोर पीढ़ी है । आचार्य ने अनेक राजनैतिक, बालीवुड और औद्योगिक घरानों के अन्तर्विवाह सफल संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि संस्कारनिर्देशन हो रहा है । जीवन व्यवस्थाओं की कठिनाइयों के लिए समूचे समाज में सकारात्मक विचारोत्तेजना जगाने की जरूरत है । श्री गोविन्द लाल वोरा ने कहा कि दुनिया परिवर्तनशील है । पानी बहता रहे अच्छा है बहाव रूके वहीं सड़ांध हो जाती है । वर्ण व्यवस्था जन्म से नही ंकर्म से सुचारू होती है इस जाति का ब्राह्मण उस जाति का ब्राह्मण यह एक कुण्ठा है, नकली दीवारों को तोड़ने की अपनी बात के साथ कहा कि जब धर्म बंधन टूट रहे हैं तो जाति बंधन हितों के लिए तोड़ना कतई हानिकारक नहीं होगा ।

छगनलाल को लेकर ठोस निर्णय लिए जाने की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोटा के बुलाकीदास सारस्वत ने कहा कि ब्रह्म का मनन करने वाला ब्राह्मण होता है , जातीय व्यवस्थाओं को ओढ़ने के अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि वर वधुओं की तादाद में 10 गुना अधिक उपलब्धता बढ़ जाएगी यही नही ंगुण, रूप शिक्षा की समानता से होने वाले विवाह से समाज को उत्कृष्ट और बेहतर नागरिक भी मिलेंगे ।

ब्राह्मणों के युवा अधिकतम बेरोजगारी की समस्या से त्रस्त

राजस्थान के पूर्व काािबना मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने विप्र महाकुंभ के समापन समारोह में इसके उद्देश्यनुरूप शिक्षा, चिकित्सा और संस्कृति का समाज के हितार्थ प्रयासों की सीढ़ी को बेहद प्रशंसनीय बताते हुए आव्हान किया कि हर समाज को आगे लाने वाला ब्राह्मण अपनी वाक शुध्दि, क्षीण शक्ति और ब्रह्म तेज को बढ़ाएं । अर्न्तविवाह के महाकुंभ के प्रस्ताव पर नौजवान पीढ़ी की पहल को महत्ती बताते हुए कल्ला बोले कि नचिकेता की तरह जिज्ञासु परशुराम की तरह शूर वीर और श्रीरतन शर्मा की तरह दानवीर बने । कल्ला ने विप्रों के लिे आर्थिक आधार पर आरक्षण की पैरवी करते हुए कहा कि महाकुंभ के मच से भी यह आवाज बुलंद होनी चाहिए।

समापन अवसर विधायक घनश्याम तिवारी अध्यक्षता कर रहे थे मंचासीन अतिथियों में गुर्जर गौड़ समाज के राष्ट्रीयअध्यक्ष ओमप्रखास जोशी, दधीचि समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार दधीच (कोटा), संजय कुमार शरर््मा (चेन्नई) श्रीरतन शर्मा गुवाहाटी, राजस्थान के बीकानेर नगर निगम मेबर भवानी शंकर शर्मा, राजस्थान के बीकानेर पश्चिम क्षेत्र से विधायक डॉ. गोपाल जोशी, राजस्थान के रतनगढ़ विधायक राजकुमार रिणवां, राजस्थान के जोधपुर जिले के फलोदी तहसील से विधायक ओम जोशी, महाराष्ट्र महिलाआर्थिक विकास महामण्डल की चेयरपर्सन श्रीमती प्रभा ओझा, जयपुर से प्रकाशित दैनिक महानगर टाईम्स के संपादक पत्रकार गोपाल शर्मा, महाकुंभ के संरक्षक डी.एन. शर्मा, राजेन्द्र खण्डेलवाल व सालासर के पुजारी देवकीनन्दन जी भी मौजूद थे । श्री घनश्याम तिवारी ने कहा कि देवी मां काली की कृपा और भगवान परशुराम जी की अनुकम्पा से विप्र महाकुंभ में ब्राह्मण एकता का नया स्वरूप दिखा है । उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा बनाए गए राष्ट्रके पुरोधा और राष्ट्रीय स्वाभिमानी बनने के लिए हमारा संगठित होना जरूरी है । दुनिया का मार्गदर्शन करने वाले ब्राह्मण की राजस्थान में स्नातकों की संख्या मात्र 7 फीसदी है अर्थात 93 फीसदी ब्राह्मण स्नातक नहीं है । फिर हम किसका मार्गदर्शन करेंगे । उन्होंने कहा कि आज वर्ण व्यवस्था बदल गई है । चार नए वर्ण बन चुके हैं । अजा, जजा, पिछड़ा और अगड़ा प्रथम तीन वर्ण आरक्षित है ।
1951 में कुल आबादी के 22 प्रतिशत ब्राह्मण 21 वीं सदी में 10 प्रतिशत रह जाएँगे । रमेश शर्मा ने स्वागत उद्बोधन व सुशील ओझा ने संचालन किया ।
1600 करोड़ के नए प्रोजेक्ट में बनाया

भगवान परशुराम को पार्टनर- श्रीरतन शर्मा 42 वर्षीय श्रीरतन शर्मा माता पिता के अनन्य अनुयायी भगवान शिव के भक्त और ब्राह्मण बेरोजगारों के मसीहा और युवाओं के लिऐ प्रेरणादायक उत्कृष्ट कार्यकरने वाले श्री रतन 15 फरवरी 1995 को मेहनत लगन , ईमानदारी को अपने तन और मन मे ंभरकर असम आ गए थे । गरीब औरगरीबी से भली भांति परिचि, उनकी जरूरतों से वाकिफ शर्मा ने आज 5 हजार से अधिक ब्राह्मणों को अपनी कंपनियों मे ंरोजगार दे रखा है तथा आज तक अपनी सीख समझाइश से उन्हें पोषित करते हुए कभी भी किसी ब्राह्मण को नौकरी से बेदखल नहीं किया । दान की महिमा, संयुक्त परिवार के लाभ और मां बाप को भगवान के रूप में मानने की अपनी विस्तारित कथनावली में शर्मा ने कहा कि मेरी सफलता का राज यही कि मां बाप ने जो बोला मैंने वही किया । उन्होंने कहा कि दूसरों को देखकर जलना मूर्खता है लकीर मिटाने की बजाए उसी के समीप एक अन्य लंबी लाइन खींचे । उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को अपने अहंकार को मिटाकर एकजुटता से एक सात कदमताल करनी होगी, आगे बढ़ने वालों और आगे बढ़ाना होगा । शर्मा के मुताबिक हम एक दूसरे की टांग खीचंते हैं और लोग हमारा मजा लेते हैं , आज केदिन कोलकाता में अपने बिजनेस संबंधी डील का उल्लेख करते हुए उन्होंने भगवान परशुराम जी को पार्टनर बनाकर 1600 करोड़ के प्रोजेक्ट की शुरूुआत की जानकारी दी जिसका लाभ विप्र समाज के लिए समर्पित करने की घोषणा की ।

Comments

parsansa

me kamal kant sharma bahut hi khus ho ki samaj me brhamin ke liye
bhi ek alag samaj ki sthapna hoi ye muzhe ynha padhkar hi pata chala
me bhaut khos hokar sbhi snsthapko ko naman karta hon or bhagvan shiv se dua karta ho ki inka manorath porn ho

om namah shivay.

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