भगवान जगन्नाथ

धर्म और आस्था का केन्द्र- पुरी

समुद्र की नीली चादर के शीतल आंचल में बसा उड़ीसा का पुरी, पूरी दुनिया में भगवान जगन्नाथ की मंदिर के लिए प्रसिध्दी पा चुका है। समुद्रतट के किनारे भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर अपनी मनोहारी प्राकृतिक छटा के कारण धर्म और आस्था का केन्द्र बना हुआ है, पुरी के नीलमय समुद्र से गुजरने वाला समुद्री जहाज अपने

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बस्तर में गोंचा पर्व , नेत्रोत्सव -रथ यात्रा

बस्तर में गोंचा पर्व के प्रारंभ में नेत्रोत्सव मनाया जाता है तत्पश्चात श्री भगवान को श्री क्षेत्र से यहां भी मंगल ध्वनि के रूप में बाजे गाजे शंख ढोल मोहरी का प्रयोग किया जाता है, किन्तु इस मंगल ध्वनि के साथ तुपकी से गोली दागने की अनूठी प्रथा का प्रचलन है । बस्तर में तुपकी का अर्थ बन्दूक है । पतल

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भगवान जगन्नाथ रथयात्रा

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chhattisgarh me Rath Yatya shri  shekhar Dutt ,Purandar mishra

रायपुर की संस्कृति उड़ीसा से मिलती जुलती, भगवान जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा पर्व विश्‍वप्रसिद्ध हैं,विश्‍व के समस्त हिन्दुओं के बीच पुरी धार्मिक केन्द्र के रूप में चर्चित है। यह पवित्र और पूज्यनीय तीर्थस्थल भारत के पूर्वी तट पर स्थित है। यहां का भगवान जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा पर्व विश्‍वप्रसिद्ध

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गजा मूंग छत्तीसगढ़ की आत्मीय रिश्ता

भगवान जगन्नाथ का स्वरूप एक गूढ़ रहस्य का प्रतीक है । यह भगवान नारायण, जगदीश्वर का पुरूषोत्तम स्वरूप है । इस काष्ठमय रूप में भगवान विष्णु यहां विराजमान है ।

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भगवान जगन्नाथ रथयात्रा और छत्तीसगढ़ विषय पर इन्टरनेट वीडियो विचार गोष्ठी सम्पन्न

छत्तीसगढ़ सर्व युवा ब्राह्मण परिषद एवं विप्र वार्ता संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वावधान में आज भगवान जगन्नाथ रथयात्रा और छत्तीसगढ़ के संदर्भ में इंटरनेट वीडियो विचार गोष्ठी प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री अनिल पुसतकर की अध्यक्षता में संपन्न हुई । प्रमुख वक्ताओं में साहित्यकार डा.

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जगन्नाथपुरी में भगवान जगन्नाथ, बलराम एवं सुभद्रा की पूजा एवं रथयात्रा

हमारे यहां चार धाम प्रतिष्ठित हैं। ये हैं- बद्रीनाथ, द्वारिका, रामेश्वरम् और जगन्नाथपुरी।

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भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवि सुभद्रा पवित्र स्नान

आज हुआ पवित्र चन्दन स्नान पश्चात भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवि सुभद्रा अत्यधिक स्नान के कारण ज्वरग्रस्त हो जाते है। ऐसी मान्यता है , उन्हे नव यौवन दर्शन तक अणसर गृह में रखा जाता है। इस लिए भक्तो को भगवान के दर्शन नहीं होते है भगवान रथ यात्रा के एक दिन पहले ही भक्तो को दर्शन देते है रथयात्रा से दो

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