भगवान जगन्नाथ रथयात्रा

rath yatra
jagannath mandir  raipur me rath yatra
chhattisgarh me Rath Yatya shri  shekhar Dutt ,Purandar mishra

रायपुर की संस्कृति उड़ीसा से मिलती जुलती, भगवान जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा पर्व विश्‍वप्रसिद्ध हैं,विश्‍व के समस्त हिन्दुओं के बीच पुरी धार्मिक केन्द्र के रूप में चर्चित है। यह पवित्र और पूज्यनीय तीर्थस्थल भारत के पूर्वी तट पर स्थित है। यहां का भगवान जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा पर्व विश्‍वप्रसिद्ध हैं। द्वारका, बद्रीनाथ, रामेश्‍वर और जगन्नाथ भारत के पवित्र चार धाम हैं। इस कारण पुरी का लोकप्रियता और महत्व बहुत अधिक बना हुआ है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त के नजार बड़े मनमोहक होते हैं। प्राचीन काल में पुरी कलिंग साम्राज्य का हिस्सा था, जिसे सम्राट अशोक ने जीत लिया था।
छत्तीसगढ़ अंचल उड़ीसा से लगा हुआ है यहाँ की संस्कृति उड़ीसा से मिलती जुलती है ,यहाँ लाखो की त्तादत में उत्कलवासी निवास करते है यहा रायपुर की राजधानी में भगवान जगन्नाथ ,सुभद्रा और बलभद्र जी का एतिहासिक मंदिर भी है और पूरी के स्वरुप में बना नया विशाल के मंदिर भी है जहा पूरी के ही पुजारी उसी विधि विधान से महाप्रभु की पूजा सम्पन्न कराते है , गत वर्षो से तो यहाँ रथों की संख्या में भी वृद्धि हो गयी है सदर बाज़ार,पुरानीबस्ती , गुढ़ियारी ,गीतांजलि आदि कई स्थानों से महापर्व का रथ धूमधाम से निकलता है ,शंकर नगर के पूरी के स्वरूप विशाल मंदिर में श्री पुरंदर मिश्र के नेत्रित्व में पदेश के लोकतंत्र के राजा राज्यपाल ,मुख्यमंत्री पूजा विधि संपन्न कराते है ,सदर का पुराना मंदिर पुजारी परिवार द्वारा संचालित है
भगवान जगन्नाथ मंदिर- भारत के चार धामों में शामिल यह मंदिर देश के सर्वाधिक पवित्र तीर्थस्थलों में एक है। 12वीं शताब्दी में चोडागंगा ने अपनी राजधानी परिवर्तन के उपलक्ष्य में इसे बनवाया था। जगन्नाथ मंदिर की ऊंचाई 65 मीटर है और इसे भारत के सबसे ऊंचे मंदिरों में एक माना जाता है। इसे कलिंग वास्तु शैली में बनाया गया है। मंदिर चारों तरफ से 20 फीट ऊंची दीवार से घिरा है। जिनके आसपास बहुत से छोटे मंदिर बने हुए हैं। इस मंदिर की एक खासियत यह है कि इसमें जाति के आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता।

गुंडिचा घर- गुंडिचा घर या गुंडिचा मंदिर पुरी का लोकप्रिय दर्शनीय स्थल है। यह मंदिर भगवान की चाची गुंडिचा का घर माना जाता है। मान्यता है कि रथयात्रा के दौरान भगवान यहां 9 दिन तक ठहरते हैं। जगन्नाथ मंदिर से आने वाली रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बालभद्र और सुभद्रा गुंडिचा मंदिर आते है, जहां उनकी चाची पादोपीठा खिलाकर उनका स्वागत करती हैं।

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