भगवान श्री गणेश जी का पारिवारिक परिचय

भगवान श्री गणेश जी का पारिवारिक परिचय
पिता- भगवान शंकर शिव, भोलेनाथ, महादेव, प्रलयंकद, पंचानन, संहारक, महामृत्युंज, त्रिपुरारी
माता- पार्वती, गौरी, भवानी, उमा, दुर्ग
बड़े भाई- कार्तिकेय, षडानन, छ: मुखवाले मयूरध्वज
बहन- संतोषी माता, प्रिय भोग- मिष्ठान मोदक
पत्नी- रिद्धि सिद्धि, प्रिय पुष्प- लाल रंग के
पुत्र- शुभ-लाभ, प्रिय वस्तु-ृ दुर्बा (दूब) शमी पत्र
जन्म दिन - बुधवार, अधिपति- जल तत्व
मास- भाद्र, प्रमुख अन्न- पाश, अंकुश,
पक्ष -चतुर्थी, चन्द्रमा को -गणेश चतुर्थी की रात को देखना
समय- 12 बजे दोपहर
गणेश जी के मंत्र ये हैं
एकाक्षर बीज मंत्र- ऊँगं
षडाक्षर मंत्र- श्री गणेशाय नम:
अष्टाक्षर मंत्र- ऊंगं गणपते नम:
गणेस जी का प्रतीक चिन्ह- ऊँ (स्वास्तिक) श्री
विशेष जानकारी- (1) जिन लडक़े लडक़ी, की शादी में बाधा या विलंब हो रहा हो उनके लिए गणेस जी का अष्टाक्षर मंत्र का जाप बुधवार से गणेश जी की पूजा साथ में मां गौरी के 11 बार ऊं गं गणपतये नम: का जाप करे ध्यान रखे प्रतिदिन 11 बार जिसमें बुधवार भी शामिल हो अशुद्दि काल को छोडक़र कार्य के पूर्ण होते तक करते रहे कार्य पूरा हो जाने के बाद भी जाप करते रहे कोई हानि नहीं होगी । पूजा तथा जाप करते तक उपवास रहे ।
(2) नि:संतान दम्पत्ति भी गणेश जी की पूजा करके गणेश चालीसा पाठ करे या अपने आचार्य से करावे ।
पढऩे के लिए - गणेश चालीसा, गणेश स्त्रोत्र, गणेस पुराण, कल्याण का श्री गणेशांक
कथानक (1) महर्षि वेद व्यास जी से गणेस जी ने कहा आप बोलना बंद नहीं करेंगे जब तक महाभारत लिखना पूरा न हो जाय । महाभारत में श्लोकों की संख्या एक लाख बतायी गयी है।
(2) चन्द्रदेव ने गणेश जी के शारीरिक बनावट को देखकर हंस दिया तो गणेस जी श्राप दे दिया जावो तुम कला हीन हो जावो तब उनने क्षमा यातना की तब कहा कृष्ण पक्ष में घटोगे और शुक्ल पक्ष में बढ़ोगे यह क्रम प्रत्येक माह चलता रहेगा। सार्वजनिक गणेशोत्सव- लोकमान्य तिलक जी महाराष्ट्र प्रान्त से भारत की परतंत्रता के समय से इस उत्सव को शुरू कराया जो आज तक चलती आ रही है । इससे तन,मन, प्राण को पुष्ट किया जाता है ।
गणेशजी के बारह नाम है - सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, बिकट, विध्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतू, भालचन्द्र, गजानन ।
रामाधार शर्मा, बलौदाबाजार जांजगीर

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