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भारतीय ब्राह्मणों को एक सूत्र में पिरोने

ajay tripathi
janvari 16 vipra varta

मै अजय त्रिपाठी भारतीय ब्राह्मणों को एक सूत्र में पिरोने उनकी समस्याएं जानने । दूर करने का चिंतन करने राष्ट्रीय स्तर पर सभी संगठनो का एक फ़ोरम बनाने की दिशा में पहले कदम के रूप में

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प्रबोधिनी एकादशी

प्रबोधय अर्थात जाग्रत हो जाओ। उठो, आंखे खोलो, जीवन को कर्मपथ पर ले चलो। गीता के अनुसार हमारा धर्म कर्म पर आधारित है। धर्म तो कर्म पथ का दीप स्तंभ है जो प्रेरणा, स्फूर्ति एवं ताकत देता है। कर्म हीन मनुष्य धर्म शाल नहीं हो सकता.

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परिवार के जुड़ाव में रामायण की प्रासंगिकता

भारतीय संस्कृति कृषि प्रधान संस्कृति है । इस संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है परिवार प्रेम । विश्व कवि श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर के शब्दों में रामायण घरेलू जीवन का महाकाव्य है । विश्व की किसी भी संस्कृति में परिवारिक आदर्शों पर आधारित रामायण जैसा महाकाव्य नहीं है ।

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भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता

हम लोगों को अपने दैनिक जीवन में जिस वस्तु के सहारे जीवन काटना होता है वह है समय । समय को जानने पहचानने तथा उसके सात चलने पर बल दिया जाता है। इसी कारण समय की गणना का भी अपने आप में महत्व है । प्रत्येक दिवस का हमें घड़ी के माध्यम से घण्टे, मिनट एवं सेकेण्ड का हिसाब लग जाता है किन्तु इतने भर से कार्

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शिक्षा और संवाद की भाषा क्या हो?

कोई भी जागृत समाज अपने लिए श्रेष्ठ विकल्पों का ही चयन करता है। समाज के लिए जागृति में यह तय करना चाहिए कि उसकी शिक्षा और संवाद की भाषा क्या हो?

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शिक्षा और संवाद की भाषा क्या हो?

कोई भी जागृत समाज अपने लिए श्रेष्ठ विकल्पों का ही चयन करता है। समाज के लिए जागृति में यह तय करना चाहिए कि उसकी शिक्षा और संवाद की भाषा क्या हो?

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अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मलेन रायपुर

ज्योतिष एवं वास्तु पर बहुउद्देशीय जन·ल्याण समेलन प्रारंभ

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संस्कृत के विकास से प्राचीन गौरव

संस्कृत भाषा के विकास से ही भारत को विश्वगुरू का प्राचीन गौरव मिलेगा। भारत को अगर अपना प्राचीन गौरव हासिल करना है तो संस्कृत को प्रोत्साहन देना ही होगा। क्योंकि संस्कृत से ही संस्कृति का विकास हुआ है।यह विचार नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर ने एनआईटीटीटीआर में व्यक्त किए। वे यहाँ अखिल

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भारतीय परंपराओं का वैज्ञानिक आधार

भारत में सनातन धर्म किसी रूढ़िवादिता या अंधविश्वास के आधार पर कट्टरपंथी नहीं है। वास्तव में धर्म,मानव सभ्यता के विकास और नैसर्गिग सम्पदा को संरक्षण देने का आधार स्तंभ है । धराएत इति धर्म का मूल अर्थ जो धारण किया जाए वही धर्म है । हमारे रीति रिवाज, धार्मिक कार्य याकोई भी संस्कार योग्य कार्य का आधार

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महाकुंभ पर सर्व ब्राह्मïण सम्मेलन

अखिल भारतीय श्री भट्टï ब्राह्मïण महासभा रायबरेली के तत्वावधान में ब्राह्मण अंतर्राष्ट्रीय संगठन के साथ 3-4 अप्रेल 2010 को महाकुंभ के अवसर पर ब्राह्मणों के आत्म निर्भर बनने संस्कृत व संस्कृति के प्रचार प्रसार , एकता सद्भावना का वातावरण बनाने के साथ , ब्राह्मïण शक्ति की अपनी प्राचीन शक्ति व गौरव प्

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