भारतीय संस्कृति

प्रबोधिनी एकादशी

प्रबोधय अर्थात जाग्रत हो जाओ। उठो, आंखे खोलो, जीवन को कर्मपथ पर ले चलो। गीता के अनुसार हमारा धर्म कर्म पर आधारित है। धर्म तो कर्म पथ का दीप स्तंभ है जो प्रेरणा, स्फूर्ति एवं ताकत देता है। कर्म हीन मनुष्य धर्म शाल नहीं हो सकता.

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संस्कृत महाविद्यालय को विश्वविद्यालय

संस्कृत महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्ज देने सुझाव, स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति में देववाणी के रूप में लोकप्रिय संस्कृत भाषा का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है । संस्कृत भाषा के वैभव को लौटाने के लिए इस भाषा का नई पीढ़ी के बीच अधिक से अधिक प्रचार

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संस्कृत के विकास से प्राचीन गौरव

संस्कृत भाषा के विकास से ही भारत को विश्वगुरू का प्राचीन गौरव मिलेगा। भारत को अगर अपना प्राचीन गौरव हासिल करना है तो संस्कृत को प्रोत्साहन देना ही होगा। क्योंकि संस्कृत से ही संस्कृति का विकास हुआ है।यह विचार नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर ने एनआईटीटीटीआर में व्यक्त किए। वे यहाँ अखिल

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