मंत्र

महालक्ष्मी पूजन विधि

सर्वप्रथम मन, वाणी और हृदय से पवित्र होने के
लिए पवित्रीकरण और आचमन का विधान संपन्न किया जाता है।
पवित्रीकरण- दाहिने हाथ में जल रखकर बायें हाथ
से ढंक ले और मंत्र पढऩे के बाद अपने समस्त शरीर पर छिडक़ लें।
मंत्र- ऊँ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वार्र्स्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्ण्डरीकाक्षं स बाहयात्त्यन्तर: शुचि:।।
आचमन - दाहिने हाथ में जल लेकर निम्र मंत्र बोलते हुए तीन
बार जल पीये। पंच पात्र के आचमनी से भी जल लेकर
दूर से ही पी सकते हैं।
मंत्र- ऊँ अमृतृतृतोपेपेपस्तरणमसि स्वाहा।।
ऊँ अमृतृतृतोपिधानसि स्वाहा।।
ऊँ सत्यं यश: श्रीमर्यि श्री: श्रयतां स्वाहा।।
इसके बाद प्राणायाम्... यदि अत्त्यस्त हो तो..। आचमन
के पश्चात् दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्र मंत्र
पढ़ते हुए संकल्प लें।

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एक भूला बिसरा महत्वपूर्ण संस्कार श्रावणी पर्व

ब्राह्मणत्‍व प्राप्ति के लाइसेन्स यज्ञोपवित का नवीनीकरण महात्म्य बोध - एकोऽहं बहुस्याम परमपिता ब्रह्मा की यह आकांक्षा जिस दिन पुरी हुई कहते हैं उस दिन श्रावणी था । भारतीय धर्म के दो प्रतीक है एक ज्ञान ध्वज शिखा जो मस्तक रूपी किले पर फहराई जाती है । दूसरी यज्ञोपवीत कर्मर् कत्तव्य मर्यादा । शिखा स्

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दीपावली पर

गोपनीय, दुर्लभ, अद्भुत , आश्चर्यजनक एवं सम्पूर्ण सिध्दि प्रदायक प्रयोग, जिसे प्रत्येक विद्वान, पंडित या गृहस्थ सम्पन्न कर पूरा पूरा लाभ उठा सकता है । और फिर ऐसा पर्व तो वर्ष में केवल एक बार ही आता है ।

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कामयाबी दिलाता है श्रीयंत्र

बाजार में विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अलग-अलग तरीके के तंत्र, मंत्र और यंत्र उपलब्ध हैं । मानव जीवन की कामयाबी में ये तंत्र, मंत्र और यंत्र काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । चाहे व्यावसायिक सफलता की बात हो, शीघ्र विवाह, सुखी दांपत्य जीवन, आर्थिक मजबूती, या पारिवारिक सुख-समृध्दि । श्र

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जीवन दर्शन

इलाहाबाद हाईकोर्ट के भूतपूर्व चीफ जस्टिस एम एन शुक्ला अच्छे स्वास्थ्य और स्मृति का आनंद लेते हैं। जबकि वो 82 वर्ष से अधिक हो चुके हैं । पांच दस दशक पहले कुछ उच्च पद पर प्रतिष्ठित द्वारा कहे गए वाक्य द्वारा वह तुम्हें अत्यंत प्रभावित कर सकता है यदि इस चकित कर देने वाली विस्मृति के बारे में पूछने प

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कलियुग के महात्मा

शूद्र द्वि जन्ह उपदेश दे ग्याना ।
मैली जनेउ लेहि कुशना॥

शुद्र महात्मा ब्राह्मणों को ज्ञान का उपदेश देता है और गले में जनेउ डाल कर दान लेते हैं ।

गुरु शिष्य अधिक अंध का लेखा
एक न सुनई एक न देखा ।
हरई शिष्य धन शोक न परई ॥

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बसंत पंचमी विशेष - वीणावादिनी वर दे !

सरस्‍वती संस्‍कृत उवाच -
"साहित्य संगीत कला विहीन: साक्षात पशु: पुच्छविषाण हीन:"

अर्थात् हम अपने जीवन को पशुता से उपर उठाकर विद्या संपन्न, गुण संपन्न बनाएं, बसंत पंचमी इसी प्रेरणा का त्यौहार है ।।

सरस्‍वती पर्व बसंत पंचमी शिक्षा, साक्षरता, विद्या और विनय का पर्व है ।

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राशि के अनुसार हो शिव पूजा

शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी, इसीलिए इस दिन किया गया शिव पूजन, व्रत और उपवास अनंत फल दायी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रध्दालु भक्त अपनी राशि के अनुसार भी भगवान शिव की आराधना और पूजन कर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं । महाशिव रात्रि के दिन किसी भी र

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