महाकुंभ आस्था का स्नानपर्व

21 वीं सदी का पहला महाकुंभ मेला विगत मकर संक्रांति से हरिद्वार मे ंपतित पावनी गंगा के तट पर शुरू हो गया है । श्रध्दालुओं के मन में इसके प्रति कितनी गहरी आस्था है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मेले के पहले ही दिन दस लाख से अधिक लोगों ने गंगा में स्नान किया । यह महाकुंभ प्रत्येक बारह वर्षके बाद देश के चार तीर्थ स्थलों पर क्रमिक रूप से आयोजित होता है । ये तीर्थ स्थल है - गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम तट प्रयाग (इलाहाबाद), गंगा नदी के किनारे स्थित हरिद्वार, शिप्रा नदी के तट पर स्थित उज्जैन और गोदावरी नदी के तट पर स्थित नासिक। हालांकि प्रत्येक छह वर्ष के अतंराल पर हरिद्वार और प्रयाग में अर्ध्दकुंभ मेले का आयोजन किया जाता है, लेकिन बारह वर्ष के पश्चात आयोजित किए जाने वाले पूर्ण कुंभ का विशेष महत्व है । हिन्दू आस्ता से जुड़े इस मेले में आन ेवाले लाखों करोड़ों श्रध्दालु विभिन्न शुभ तिथियों पर पवित्र स्नान करते हैं । मकर संक्रांति से आरंभ हुआ यह मेला, इस वर्ष 28 अप्रैल बैसाख पूर्णिमा को आयोजित होने वाले विशेष स्नान के बाद संपन्न होगा । इस दौरान मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी, माघ पूर्णिमा, महाशिवरात्रि, सोमवती अमावस्या, नवसंवत्सर, रामनवमी चैत्र पूर्णिमा और मेष संक्रांति तिथियों पर भी विशेष स्नान किया जाएगा ।

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