महासंगठन

आएँ महा (?) संगठन बनाएं....

विप्र वार्ता 2012 में श्री विनायक शर्मा राष्ट्रीय संपादक हिमाचल प्रदेश का संपादकीय आंख खोलने वाला आलेख सभी संगठनों को मिला. महासंगठन क्यों नहीं पढऩे में आया, मानीय और व्यवहार के लिए प्रेरमास्पद रहा किन्तु अधिकांश की पाचन शक्ति बिगाडऩे में सक्षम भी लगा ।

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महासंगठन क्यों नहीं ?

सभी संगठनों को मिला महासंगठन क्यों नहीं ? मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और मनुष्य का चहुंमुखी विकास समाज के अन्दर ही संभव है. समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सुसंकृत होना अति आवश्यक है और इसके लिए हमे सब मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है.

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