देश की प्रगति में युवा शक्ति को जोडऩे में हम नेतृत्व करें
आज भारत दुनिया का सबसे बड़ी युवा शक्ति वाला देश है । भारत को अपनी पुरानी पहचान पर पुर्नस्थापित करने के लिए हमें आगे आना होगा । युवाओं के मामले में चीन भी भारत से पीछे है । 2001 की जनगणना के अनुसार उस समय भारत की कुल जनसंख्या 102.8 करोड़ में से 34.8 करोड़ 15 वर्ष से 34 वर्ष की आयु वर्ग में थे । यानि कुल जनसंख्या का एक तिहाई अत्यंत युवा है । हालांकि चीन की जनसंख्या भारत से अधिक है, लेकिन वहीं की सरकार द्वारा एक बच्चा पैदा करने का नियम लागू करने से वहां की य.ुवा जनसंख्या भारत से कम है और वहां जनसंख्या में अधिक आयु के लोगों का अनुपात बढ़ता जा रहा है । हालांकि भारत प्रति व्यक्ति आय के संदर्भ में दुनिया के अन्यकई देशों से कहीं पीछे है । यहां का जन स्वास्थ्य और शिक्षा का भी स्तर काफी नीचा है । गरीबी और भुखमरी की समस्या भी काफी गंभीर है । विश्व बैंक के अनुसार भारत चीन के बाद अब दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है । सरकारी नीतियों में खामियों के बावजूद भारतीय वैज्ञानिकों, उद्यमियों, मजदूरों और किसानों के अनथक परिश्रम ने भारत को दुनिया के मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिला दिया है । कहा जा रहा है कि 2050 तक भारत की राष्ट्रीय आय अमेरिका की राष्ट्रीय आय को भी पार कर जाएगी ।
किसी भी देश की खुशहाली में मानव संसाधनों का एक बड़ा योगदान होता है । पश्चिम के देशो ंकी विकास यात्रा में भी वहां के मानव संसाधनों का योगदान सर्वविदित ही है । लेकिन वहां परिस्थिति बदल गई है । एकलवादी सोच और परिवार संस्था के ह्रïास ने वहां की जनसंख्या की वृद्धि दर को बहुत नीचे ला दिया है । घटती जनसंख्या वृद्दि दर के कारण युवाओं की संख्या निरंतर घट रही है । जर्मनी के जनसंख्या विदों का मानना है कि 2030 तक जर्मनी में कार्यशील जनसंख्या 70 लाख कम हो जाएगी । आज वहां एक रिटायर व्यक्ति के पीछे 4 कार्यशील लोग है । अगली पीढ़ी में वे केवल दो ही रह जाएंगे । संयुक्त राष्टï्र के अनुमानों के अनुसार 2050 तक इटली में 575 लाख लोग सिमट कर 450 लाख रह जाएंगे, हंगरी में 110 लाख के बदले 75 लाख रह जाएंगे और रूस में 14.5 करोड़ के बदले मात्र 10 करोड़ रह जाएंगे । पूरे यूरोप में कार्यशील जनसंख्या लगातार घट रही है। किसी भी देश में इतनी बड़ी युवा शक्ति का होना किसी वरदान से कम नहीं है । वर्ष 2008-09 के अनुमानों के अनुसार भारत की जनसंख्या 115.4 करोड़ है । जिसमें से एक तिहाई 15-34 वर्ष की आयु युवा शक्ति को देश के विकास कार्यों में लगाने के लिये यह जरूरी है कि वे शिक्षित हो । 2001 की जनगणना के अनुसार 20-34 वर्ष के आयु वर्ग में मात्र 30 प्रतिशत लोग ही मैट्रिक या उससे अधिक पढ़े लिखे हैं । इनमें से अधिकतर मैट्रिक तक ही पढ़े हैं और मात्र 27 प्रतिशत लोगों ने स्नातक तक पढ़ाई की है । इस प्रकार शिक्षा के निम्न स्तर के होने के कारण भारतीय युवा शक्ति को उपयोगी काम के लिये लगाना और कठिन हो जाता है । यदि हम 15 से 19 वर्ष की आयु वर्ग की लें तो देखते हैं कि देश भर में इस आयु वर्ग में मात्र 28 प्रतिशत ही मैट्रिक से अधिक पढ़े हैं । चाहे देश में युवा शक्ति का भरपूर उपयोग हो अथवा विदेशों में युवा अपना वर्चस्व बढ़ाये , यह जरूरी है कि देश में शिक्षा क् स्तर ऊंचा हो । केवल पारंपरिक शिक्षा नहीं नहीं बल्कि व्यावहारिक आधार पर तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण भी जरूरी है । हमारे पारंपरिक ज्ञान को भी योग्य संस्थानों द्वारा प्रमाणित करना भी उतना ही आवश्यक है ।
देश में युवाओं को उत्पादकता से जोडऩे के लिए हमारी महती भूमिका हो सकती है । हर क्षेत्र में ज्ञान हमारे रहे । भौतिकवादी, समाजवादी, अर्थवादी, नैतिकता, परिवारवाद, सुसंस्कार और सुशिक्षा के क्षेत्र को हमें लेकर आगे बढऩा चाहिए । आज के परिवेश में अच्छे शिक्षा केन्द्र का संचालन के साथ सभी समाजों को जागरूक करने के कार्यक्रम हमें बनाने चाहिए । परिवार हमारी पहचान रहें । यह हमें सुसंस्कार देते हैं । हमारी युवा पीढ़ी को दिशा देने के लिए हमें ही आगे आना होगा तभी हम समग्र विकास की कल्पना और भारत को सोने की चिडिय़ा बना सकेंगे ।
शैलेन्द्र शर्मा
प्रधान संपादक
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