रामायण प्रचारक समिति

रामचरित मानस और मकर संक्राति

गोस्वामी तुलसीदास ने अपने मानस में मकर संक्रांति पर होने वाले इस सन्त समागम का इस प्रकार वर्णन किया है । माघ मकरगत रवि जब होई, तीरथपतिहि आव सब कोई।
देव दनुज किन्नर नर श्रेनी, सादर मञ्जहि सकल त्रिवेनी।।
पूजहि माधव पद जल जाता, चरिस अरवय बटु हर सहिं गाता।

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तुलसी और साहित्य

विश्व प्रसिद्ध एवं पूज्य महान महाकाव्य श्री राम चरित मानस विश्व साहित्य की सर्वोत्तम कृति है। गोस्वामी जील ने इसकी रचना करते समय अनेक प्रकारकी बातों को ध्यान में रखा होगा। उदाहरणार्थ शब्द योजना । गोस्वामी जी ने अनेक शब्द मानस में इस प्रकार से रखे कि उनका वास्तविक अर्थ एवं गोस्वामी जी का उद्देश्य

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