विप्रबंधु कृपया ध्यान दें

विप्र-वार्ता का अंक निरंतर पाठकों को मिल रहा है । वर्तमान में कुछ स्थानों से विप्र-वार्ता के नाम से अन्य व्यक्तियों द्वारा कुछ चंदे की रकम प्राप्त करने का समाचार जानकारी में आया है ।

पाठकों से अपील है कि विप्र-वार्ता के अधिकृत व्यक्तियों के पास विप्र-वार्ता की सदस्यता की प्रिंटेड रसीद है जिसमे रकम 151/- त्रिवार्षिक प्राप्त करना छपा है को ही प्राप्त कर सदस्यता शुल्क प्रदान करें एवं च्रद्रा प्राप्त करने हेतु भी विप्र-वार्ता की बिना रसीद किसी प्रकार का चंदा न दें । साथ ही यह भी पत्रिका से स्पष्ट कर लें कि संबंधित का नाम विप्र-वार्ता के प्रथम पेज पर प्रकाशित सूची में शामिल है कि नहीं ।

विशेष जानकारी के बतौर समूचे छत्तीसगढ़ में प्रतिमाह वर्तमान में वितरित पत्रिका के 2000 से भी ज्यादा प्रतियों के एवज में हमारे द्वारा कुछ ही विप्रजनों से सदस्यता प्राप्त की गई है ।

यदि आपने किन्हीं सज्जन को विप्र-वार्ता की सदस्यता हेतु राशि प्रदान की है एवं आप तक यह पत्रिका नहीं पहुंच पा रही है तो कृपा कर पोस्टकार्ड के मार्फत हमें सीधे अवश्य सूचित करें । ताकि कम-से-कम आप तक निरंतर पत्रिका के अंक तो पहुंचाये ही जा सके ।

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