छत्तीसगढ़ में गणेश जी की तो अनेक प्रतिमाएं मिली ही है वहीं श्री लक्ष्मी नारायण , कुबेर जी की प्रतिमाएं भी मिली है । डीपाडीह में चार भुजाओं वाली श्री लक्ष्मी जी की पद्मासन की मुद्रा में हाथी पर विराजमान प्रतिमा उल्लेखनीय है यही श्र read more »
जब बुजुर्गों को जब सम्मान मिला तो उनकी पथराई हुई आंखों में फिर से चमक लौट आई । उन्हें अहसास हुआ कि समाज में उनकी सुध लेने वाले भी कोई है ।
शहीद स्मारक भवन पंचायत एवं समाज सेवा विभाग एवं सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर फोरम के सहयोग से आयोजित सम्मान समारोह में प्रदेश भर से बुजुर्ग पहुंचे । पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल एवं महिला एवं समाज कल्याण मंत्री लता उसेंडी ने 76 वृध्दजनों का सम्मान साल एवं श्रीफल से सम्मान किया गया ।
संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि बुजुर्गों का अनुभव कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शक होते हैं । जो अपने बुजुर्गो का सम्मान नहीं करते वे जीवन में मानसिक सुख और शांति के लिए तरसते हैं । उनके अनुभव और मार्गदर्शन में हमें अच्छा जीवन जीने की सीख मिलती है । इस मौके पर बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया । उन्हें नि:शुल्क दवा का वितरण किया गया । हेल्पेएज इंडिया ने टाउनहॉल में अंतर्राष्ट्रीय वृध्द दिवस पर बुजुर्गों का सम्मान किया । कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्यमंत्री लता उसेंडी थी । read more »
पं. सुरेश कुमार वशिष्ठ को पिछले दिनों सर्वसम्मति से अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है । यह महासंघ समूचे देश में ब्राह्मणों का नेतृत्व करने वाली 500 से भी अधिक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करती है । पिछले 30 वर्षों से यह महासंघ समाज में सद्भावना, सामंजस्य और समरसता के संदेश के साथ ब्राह्मण समुदाय के उत्थान और उसकी गोलबन्दी में प्रयासरत है ।
पं. सुरेश कुमार ने कहा कि भूमण्डलीकरण और नए आर्थिक उदारीकरण के मौजूदा दौर में महासंघ का कर्तव्यबोध और दायित्व और भी अधिक बढ़ जाता है । read more »
ब्राह्मण सभा द्वारा निर्माणाधीन परशुराम धाम, चांडक लेआउट में भगवान परशुराम भवन के निर्माण में सहयोग के रुप में 1,25000 रुपये का दान पं. ज्वालाप्रसाद शर्मा ने अपने जन्मदिन के अवसर पर किया । सभा के अध्यक्ष -घनश्याम शर्मा, शिवजी शर्मा, उपाध्यक्षद्वय - नंदकुमार शर्मा, एड. गोपाल शर्मा, कोषाध्यक्ष - मोहनबाबू, रेवाशंकर शर्मा, सचिव - रघुनंदन शर्मा एवं सोहनलाल जोशी ने वैद्य पं. ज्वालाप्रसाद शर्मा के निवास पहुंचे । जन्मदिन की बधाई दी । पं. ज्वालाप्रसाद ने अपने संबोधन में सभा की उत्तरोत्तर प्रगति की कामना की एवं भवन निर्माण में 1 लाख 25 हजार का चेक सभा के अध्यक्ष घनश्याम शर्मा को प्रदान किया । साथ ही भविष्य में सहयोग का आश्वासन भी दिया । रमेश कुमार शास्त्री बैतूलवाले भी उपस्थित थे ।
छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज केन्द्रीय समिति के प्रांताध्यक्ष डा. प्रकाश नारायण शुक्ला व कार्यकारी प्रांताध्यक्ष ललित मिश्रा की सहमति तथा युवा प्रकोष्ठ के प्रांताध्यक्ष विवेकानंद दुबे की अनुशंसा पर जयप्रकाश पांडेय को युवा प्रकोष्ठ का प्रांतीय महासचिव नियुक्त किया है ।
श्री पाण्डेय सक्रिय युवाओं में से हैं जो सदैव समाज में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं । वर्तमान में वे अपनी माता श्रीमती चन्द्रकली पाण्डेय पार्षद, भनपुरी के पार्षदी दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हुए निष्पक्ष भाव से अपने वार्ड की सेवाओं में समर्पित हैं ।
छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज केन्द्रीय समिति के तत्वावधान में शरद पूर्णिमा महोत्सव तथा स्व. बसन्त दीवान स्मृति कवि सम्मेलन का आयोजन दूधाधारी सत्संग भवन में सम्पन्न हुआ ।
उक्त अवसर पर कवियों सर्व श्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे को ''कवि भूषण'' तथा कविगण विजय तिवारी बिलासपुर पद्मलोचन शर्मा राजनांदगांव श्रीमती शशि दुबे, राजेश तिवारी, मूलचन्द शर्मा, उमेश तिवारी रायपुर, डॉ. संध्यारानी शुक्ला कोरबा को ''कविश्री सम्मान से प्रांताध्यक्ष डॉ. प्रकाशनारायण शुक्ल, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष ललित मिश्रा ने शाल श्रीफल, सम्मान पत्र तथा 1857 क्रांति के प्रथम शहीद मंगल पाण्डे स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया । read more »
सद्भाव का माध्यम - भाईचारा सीधे भावनाओं से जुड़ा है, और जब तक भावनात्मक स्तर पर किसी को प्रभावित नहीं करेंगे, प्रेम और सद्भाव नहीं पैदा होगी । इसलिए मैंने हिंदू-मुसलमानों के बीचप्रेम और सद्भाव व एक - दूसरे को जानने समझने के लिए धर्मग्रंथों को चुना । धर्मग्रंथों पर करोड़ों लोगों की आस्था है इसलिए जरुरी है कि वे एक-दूसरे के धर्मग्रंथों को पढ़े और समझे । यही सोचकर मैनं लाखों लोगों की श्रध्दा वाली हनुमान चालीसा उर्दू में लिखी और दुर्गा चालीसा भी लिखी है जो जल्दी ही छपकर आ जाएगी । उर्दू की हनुमान चालीसा के स्वागत को देखकर मेरा हौसला बढ़ा है । read more »
छत्तीसगढ़ी ल आखिर में राज्यभाषा के दर्जा दे बर सरकार ल मजबूर होय पड़िस । एखर बर दू करोड़ से उपर छत्तीसगढ़िया मन बधाई के पात्र हवयं, जौन मन राज्य सरकार के उपर लगातार दबाव बनाये रखिन । एला दुर्भाग्य नई कईबे राज बने के सात साल बीते के बाद भी हमन ल राजभाषा नई मिले रहिस । जैसे राज बनाये बर आंदोलन एक नई कई नेता मन चलाईने तभो ले राज बनाये के श्रेय वो समय के प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी ल दे जाथे वैसने राजभाषा बनाने के श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ल दिये जाही । देर से सही सरकार ह दुरुस्त निर्णय लेइस नहीं तो दू बेर विधानसभा से सर्वसम्मति से संकल्प पारित करे के बाद काबर ये निर्णय ह रुकत रहिस । एक बेर काँग्रेस के कार्यकाल में संकल्प पारित होइस दुबारा भाजपा कार्यकाल में, विधानसभा में कोई विरोध नहीं फेर कानून बनाये बर काबर आगू-पीछू ? जौन भाषा के महत्व नई जानये वही ऐसने काम कर सकथे । भाषा संस्कृति के वाहक होथे । read more »
अंजु पाण्डेय बरेली (उ.प्र.) - भारतीय समाज की संरचना में युगों से ब्राह्मणों ने सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है । ब्राह्मण संपूर्ण समाज का प्रेरणास्रोत एवं हमारे राष्ट्रधर्म व समाज-कल्याण का ध्वज प्रचारक रहा है । इस देश का गौरव, संस्कृति, सभ्यता व दर्शन सब ब्राह्मणों द्वारा स्थापित की गई है । ब्राह्मण भारतीय संस्कृति एवं दर्शन का मूलाधार है । ब्राह्मण समाज ने संकुचित दृष्टि को त्यागकर पूरे विश्व को ''वसुधैव कुटुम्बकम'' का पाठ पढ़ाया है ।
समष्टि का निर्माण व्यष्टि से होता है । मानव जीवन का ध्येय समष्टि के साथ मिलकर व्यष्टि का विकास करना है, अर्थात् व्यक्ति के विकास के लिये जीवन में संगठन की आवश्यकता होती है, संगठन के माध्यम से व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक व बौध्दिक विकास करता है । सदाचरण से व्यक्ति में निखार आता है, और अपने इस गुण के कारण ही वह संगठन को उत्कृष्ट बनाता है । read more »
आरक्षण का आधार आर्थिक हो - प्रभात मिश्रा , संपादक
महान देश भारत का पारम्परिक आचरण कुछ ऐसा हो रहा है कि हम सार्वजनिक रुप से जिसका विरोध करते हैं उसी का अप्रत्यक्ष रुप से अनुसरण करते हैं । ऐसे ही कुछ आचरण वर्तमान आरक्षण पर प्रतीत होता है । हम जाति आधारित भेदभाव को सार्वजनिक रुप से नकारते हैं परंतु जाति आधारित आरक्षण देकर इन जातियों को मान्यता देते हैं अर्थात् जातिगत भेदभाव देकर इन जातियों को मान्यता देते हैं अर्थात् जातिगत भेदभाव को अधिकारिक रुप से मानते हैं । संविधान बनाते समय अनुसूचित जाति- जनजातियों के पिछड़ेपन को स्वीकारते हुए एवं उनके उत्थान के लिये आरक्षण का सहारा लिया गया । कुछ निश्चित समय तक बना रहने वाला यह आरक्षण अब अनिश्चित हो गया है । यह एक समरस पक्षपातहीन समाज की सोच में भेदभाव के बीज बोने जैसा कार्य है । read more »
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