नौवां श्रृंगार - कर्णफूल : कान में पहने जाने वाला यह आभूषण कई तरह की सुंदर आकृतियों में होता है, जिसे चेन के सहारे जूड़े में बांधा जाता है । विवाह के बाद स्त्रियों का कानों में कर्णफूल (ईयर रिंग्स) पहनना जरुरी समझा जाता है । इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि विवाह के बाद बहू को दूसरों की, खासतौर से पति और ससुराल वालों की बुराई करने और सुनने से दूर रहना चाहिये ।
दसवां श्रृंगार - हार : गले में पहना जाने वाला सोने या मोतियों का हार के प्रति सुहागन स्त्री के वचनबध्दता का प्रतीक माना जाता है । दक्षिण और पश्चिम भारत के कुछ प्रांतों में वर द्वारा वधू के गले में मंगलसूत्र (काले रंग की बारीक मोतियों का हार जो सोने की चैन से गुंथा होता है) पहनाने की रस्म की वही अहमियत है, जो कि उत्तर भारत में वर द्वारा वधू की मांग भरने की होती है ।
ग्यारहवां श्रृंगार - बाजूबंद : कड़े के समान आकृति वाला यह हर आभूषण सोने या चांदी का होता है । यह बांहों में पूरी तरह कसा रहता है इसलिये इसे बाजूबंद कहा जाता है । पहले सुहागन स्त्रियों को हमेशा बाजूबंद पहने रहना अनिवार्य माना जाता था और यह सांप की आकृति में होता था । ऐसी मान्यता है कि स्त्री के बाजूबंद पहनने से परिवार के धन की रक्षा होती है और बुराई पर अच्छाई की जीत होती है । read more »
सर्व युवा ब्राह्मण परिषद का मुख पत्र विप्र-वार्ता ब्राह्मणों को जागृत करने के लिये अच्छी पत्रिका प्रकाशित की गई है, जिसके लिए मार्गदर्शक एवं सभी प्रतिनिधि मंडल बधाई के पात्र है, आज का समय ब्राह्मण परिवार के सदस्यों के लिए बड़ी चुनौती का समय है, इस पर हम सबकों मिलकर चिंतन करना आवश्यक हो गया है कोई विशेष बात नहीं बुध्दिजीवी माना जाने वाला ब्राह्मण अहंकार का त्यागकर सिर्फ अपने समाज के लिए कुछ कर जायें तो आने वाला हमारा भविष्य सुख-शांति से व्यतीत कर सकेंगें अन्यथा इस स्थिति में ईश्वर ही रक्षा करें छत्तीसगढ़ राज्य बनने के पश्चात् प्राय: यहाँ सभी प्रांतो से आकर बसने वाले ब्राह्मण अपना जीवन-यापन मिल-जुलकर कर रहें हैं, लेकिन आज भी वो मानसिकता बनी हुई है, कि हम छत्तीसगढ़िया है, वो परदेसिया है read more »
होली फिर आई है, हर साल आती है । आम के पेड़ों में बौर लग गए हैं । मौसम रंग बदल रहा है । गुनगुनी धूप के साथ सर्द हवाओं की सरगोशी अपने शबाब पर है । धूल, अंधड़ के साथ एक अलमस्त बयार । चहुंओर मौज का आलम ।
होली है क्या ? सिर्फ एक त्यौहार ? नहीं, यह त्योहार भर नहीं, उस से कहीं ज्यादा ! इसमें जीवन के बहुतेरे रंग शामिल हैं । हंसी-खुशी, राग-विराग, अच्छाई-बुराई, रिश्ते-नाते, अपनापा, दूरियाँ-नजदीकियाँ। और बेलगाम मौज-मस्ती ।
कुछ-कुछ ब्राजीली कार्निवाल की तरह, सांबा के नाच की तरह । पर इसे ब्राजीलियों की तरह खुले दिल से क्यों नहीं लेते ? क्यों अच्छाइयों के साथ-साथ बुराइयां भी बटोरने लगते हैं ? इस पर चर्चा कहीं और पहले तो यही कि महोली में ऐसा क्यों होता है, दूसरे त्योहारों में ऐसा क्यों नहीं होता कि मौसम के साथ-साथ मन भी बौरा जाए ? read more »
ज्योतिष प्रश्नों के उत्तर श्रीमती चंद्रा पाण्डेय के द्वारा
विनय पाण्डे
प्रश्न - नौकरी में हालात ठीक नहीं है ? यह कब तक रहेगा दूसरी नौकरी कब मिलेगी ?
उत्तर - आप धनु लग्न एवं मकर राशि के है, अभी आप वर्तमान में गुरु महादशा के राहू अंतरदशा में चल रहे हैं, साथ ही शनि देव की अढ़ैय्या भी आपकी राशि में चल रही है । अत: नौकरी में मानसिक परेशानी उतार-चढ़ाव ढ़ाई सालों तक आते रहेंगे । म0 जनवरी म00म से म माह हेतु कुछ शांति महसूस करेगें फिर परेशानी का अनुभव होगा, आपकी पत्रिका में कालसर्प योग भी है अत: कालसर्प योग का अनुष्ठान कराएं एवं राहु का सवा लाख जाप अनुष्ठान कराएं । शिव कृपा होने पर परेशानी दूर होगी । ढ़ाई साल बाद दूसरी नौकरी मिलने के योग बनते हैं। read more »
छत्तीसगढ़ी एवं आदिवासी भाषा संस्कृति विकास संस्थान द्वारा प्रसिध्द कवि बसंत दीवान की रचनाशीलता के पचास वर्ष पूरे होने पर शाल, श्रीफल, और अभिनंदन पत्र से सम्मानित किया गया । इस दौरान उन पर कें द्रित एक स्मारिका बसंत यात्रा का विमोचन रविवार को महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय के सभागृह में किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार आनंदी सहाय शुक्ल ने की ।
इस मौके पर प्रमुख वक्ता हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक रमेश नैयर, प्रभाकर चौबे, नंदकिशोर तिवारी, गिरीश पंकज, रामेश्वर वैष्णव, लक्ष्मण मस्तुरिहा, डॉ. बलदेव थे । read more »
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति का अधिवेशन रविवार को स्थानीय रामबाग में हुआ । इस अवसर पर राज्य के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की जयंती के उपलक्ष्य में सुप्रसिध्द लेखक तथा पूर्व राज्यसभा सदस्य डा. रत्नाकर पांडेय को बहुआयामी व्यक्तित्व सम्मान दिया गया । साथ ही हिंसा के विरुध्द कलम विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।
रायपुर स्थानीय कैलाशपुरी स्थित रामबाग में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के द्वारा राष्ट्रभाषा सद्भावना सम्मेलन का आयोजन किया गया । इस अवसर पर हिंदी भाषा की सेवा कर रहे विभिन्न लेखकों को सम्मानित किया गया । read more »
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