सितम्‍बर-2007

गजल

शौक से यादों का दफना दी मौज की सैंया पर सोकर ।
दोस्‍त तुम्हें भी रोना होगा मुझसा आगे चलकर ।

उनकी महलों पर जो तेरा सुबहो-शाम सबेरा होता है ।
वो साथ कभी न देंगे तुमको अपना कहकर ।  read more »

आओ जरा हंसे

- संता सिंह को नई नौकरी लगी । पहले दिन संता ने बहुत देर तक काम किया । संता का बॉस उससे बड़ा खुश हुआ ।
अगले दिन बास ने संता को अपने केबिन में बुलाकर पूछा - कल तुमने देर रात तक क्या किया?
संता - कुछ नहीं सर दरअसल, कीबोर्ड में अल्फाबेटस क्रम में नही थे, उन्हीं को ठीक कर रहा था ।  read more »

बूझो तो जाने

- टेबल पर रखकर हमेशा काटा जाउं पर किस्मत मेरी कभी खाया ना जाउं
- भरा रहूं पानी से असंख्य मुझमें छेद बूझ सको तो बताओ मेरा भेद
- एक अंगूठा और अंगुलियां मुझमें चार बता सको तो बताओं नाम मेरा यार
- सड़कें मेरी सुनसान जंगल मेरे वीरान मेरे शहरों में नहीं कोई मकान क्या है मेरा नाम

बद्रीधर दीवान का जगदलपुर में स्वागत

सरजूपारीण ब्राह्मण समाज जगदलपुर ने छत्‍तीसगढ़ विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री बद्रीधर दीवान के जगदलपुर आगमन पर स्थानीय सर्किट हाउस में आत्मीय स्वागत किया । इस अवसर पर उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर समाज समाज हेतु जगदलपुर में भूमि का आबंटन पं. सुन्दर शर्मा की मूर्तिक स्थापित करने की मांग की गयी । स्वागत करने वालों में युवराज शर्मा, श्रीमती शैल दुबे, संजय दुबे, विकास सहित विप्र जन उपस्थित हुए ।

खुदी को छोड़ो

एक राजा था । उसने परमात्मा को खोजना चाहा । वह किसी आश्रम में गया । उस आश्रम के प्रधान साधु ने कहा, जो कुछ तुम्हारे पास है, उसे छोड़ दो । परमात्मा को पाना तो बहुत सरल है । राजा ने यही किया उसने राज्य छोड़ दिया और अपनी सारी सम्पत्ति गरीबों में बांट दी । वह बिल्कुल भिखारी बन गया, लेकिन साधु ने उसे देखते ही कहा, - अरे तुम तो सभी कुछ साथ ले आयो हो !  read more »

ऐसे रखी राखी की लाज

‘’वल्लाह ! बला की खूबसूरत है शहजादी रुपनगर की । नाम है चंचलकुमारी । चांद सा मुखड़ा, हिरनी सी ऑंखें, तोते जैसी नाक, कंचन-काया, काली नागिन सी लहराती लंबी लटे, मोती सी चमकती दंतावली, गजगामिनी, कद-काठी भरी-पूरी उन्नत उरोज । आलपनाह ! सब बेमिसाल, अद्वितीय,अनिंद्य, अपूर्व सर्वांग सुन्दरी है राजकुमारी । हरम की शोभा में चार चाँद लग जायेंगे उसके आने से हुजूर ।‘’ चाटुकार, चमचे मक्खन मार रहे थे म्लैंछापति औरंगजेब को । आलमगीरके मुख से लार टपकने लगी ।  read more »

गोस्वामी तुलसीदास की जन्म भूमि

तुलसीदास की जन्म भूमि कोई जनपद बांदा का राजापुर मानता है तो कोई एटा का सोरोग्राम, किन्तु तुलसीदास द्वारा रचित ग्रन्थों के आधार पर उनकी जन्मभूमि इन दोनों स्थानों में होना अमान्य कर देते हैं । राम कथा के प्रसंग में उन्होंने रामचरित मानस में कहा है मैं पुनि जिन गुर सन सुनी कथा सो सूकर खेत । समुझी नहिं तसि बालपन, तब अति रहेउ अचेत॥ इसका तात्पर्य यह है कि तुलसीदास ने अपने बालपन में, जब कि उनकी बुध्दि विकसित नहीं हुई थी कि वे रामकथा को सोच समझ सकते, सूकर क्षेत्र में अपने गुरु से सुनी थी । उनके गुरु रामशैल पर रहने वाले श्री अनन्तानन्द जी के प्रिय शिष्य श्री नरहर्यानन्द जी, जिन्हें नरहरिदास भी कहा जाता था, सर्वमान्य है ।  read more »

ब्राह्मण कौन

आज मानव समाज में ब्राह्मण समाज का अपना अलग महत्व है, लेकिन चिन्तनशील ब्राह्मणों में यह प्रश्न बार-बार उठ रहा है कि आज के बदलते परिवेश में ब्राह्मण को ब्राह्मणत्व का बोध होना अति आवश्यक है ।

मेरे विचारों में बार-बार यह बात गुंजती है कि ब्राह्मण चरित्र आचरण व्यवहार कर्मवाणी के उच्च मापदंडों पर खरा उतरे । अर्थात चरित्र से सुन्दर एवं निष्कलंक हो । आचरण से विवेकी पारखी संतों की तरह आत्म बोध से परिपूर्ण हो और व्यवहार से मधुर विनम्र सरल एवं सहज हो । एवं वाणी से मुदृभाषी हो ।  read more »

बधाई

हेमन्त गिरजाशंकर तिवारी एवं श्रीमती अभिलाषा तिवारी रायपुर के प्रथम पुत्र चि. प्रणय तिवारी ने कक्षा 5वीं की परीक्षा में 86.67 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपने विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया है । वे प्रारंभ से ही मेघावी छात्र हैं । विप्र वार्ता परिवार की ओर से अनेकानेक बधाई ।

गणेश चतुर्थी पर विशेष, वर्जित है चंद्रमा के दर्शन

भाद्रपद्र शुक्ल की चतुर्थी ही गणेश चतुर्थी कहलाती है । श्री गणोश विध्न विनाशक है । इन्हें देव समाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है । भाद्रपद्र कृष्ण चतुर्थी को गणेश जी की उत्पत्ति हुई थी, उनका गजानन रुप में जन्म भाद्रपद शुक्ल चौथ को हुआ ।  read more »

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