फरवरी-2009

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युवा मन में जीवन साथी

अब वह जमाना चला गया जब माता- पिता जाकर अपने बच्चों को रिश्ता तयकर आते थे और बच्चे भी बिना कुछ पूछे पेरेट्स की पसंद के सात जीवन गुजार देते थे, वक्त ने करवट ली है और करवट ली है बच्चों की सोच नें –

आज की पीढ़ी अपने जीवन साथी को लेकर बिल्कुल अलग किसम के गुणों की तलाश में है । लेकिन सवाल यह है कि वह किस चीज की तलाश में है5-9 8गुणांक वह गुण क्या है , जो आज की पीढ़ी को लगता है कि उसके आदर्श साथी में होने चाहिए? 6जनवरी

गुणवत्ता नियंत्रण - लुक्स की चिन्ता करना छोड़ दें, आजकल बाहरी आवरण इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि व्यक्ति का चरित्र, आदर्श व्यक्ति वही होगा जो वफादारी और निष्ठा से भरा हो, आज की महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा भी बहुत महत्वपूर्ण है, आजकल लड़कियां स्वयं तो अपने कैरियर में स्थापित है ही और साथी भी ऐसा चाहती है जिसका मोटा बैंक बैलेंस हो और वह सुसंस्कृत भी
हो ।  read more »

खरमास नहीं होगी शादियां

दिसंबर 2009 से अप्रेल 2010 तक गुरू के अस्त व खरमास के कारण शादियां नहीं हो पाएंगी । शादी का इंतजार कर रहे लोगों का इंतजार खत्म हो गया है । रविवार को देवउठनी के सात ही मंडपों में शहनाई गूंजने लगी । आज तुलसी विवाह जैसा शुभ मुहूर्त होने के कारण राजधानी सहित अंचल में अनेक शादियां हुई । रामनवमी में शुभ मुहूर्त नहीं होने के बावजूद शादियां होगी । इस माह देवउठनी केबाद 22,23, व 29 नवंबर को विवाह किए जा सकेंगे । इसके बाद दिसंबर में 2,7,11,12 व 13 को शुभ मुहूर्त है ।

दिसंबर के बाद फरवरी में विवाह -14 दिसंबर से 12 फरवरी तक विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है, 13 से गुरू पश्चिम में अस्त हो जाएगा । सिके बाद उसका उदय पूर्व में 7 फरवरी को होगा, लेकिन बालयत्व दोष बना रहेगा, इसलिए विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं है ।  read more »

नये परिवेश में-विवाह में विचार

भारत में अभी भी शादी - ब्याह के लिये कूंडलियों को मिलाने पर काफी जोर दिया जाता है । इसके बाद लड़के की नौकरी, जमीन जायदाद और लड़की की सुंदरता और खाना पकाने की कला देखी जाती है । अगर सब कुछ ठीक ठाक रहता है तो वह और वधू पक्ष में थोड़ी सीबातचीत के बाद रिश्ता तय कर दिया जाता है । अरेंज मैरिज में इन्हीं बातों को प्राथमिकता दी जाती है । आज के वक्त में जब तलाक और अलगाव की स्थिति बनी हुई है तो ऐसे में जरूरी है कि दोनों पक्ष यानि दूल्हा और दुल्हन को इतना वक्त दिया जाए कि वह एक दूसरे को समझ बएस सकें ।

शादी को पहले जन्मों का बंधन समझा जाता था, लेकिन अब कई लोगों के विचार पश्चिमी प्रभाव से बदल रहे हैं । बहरहाल शादी के लिए हां कहने से पहले आपका अपने पार्टनर की खुबियों और खामियों से परिचित होना बहुत जरूरी है ।

स्टाइल चेक, रंग रूप- शायद सुनने में यह आपको काफी छोटी बात लगे, लेकिन यह बहुत जरूरी है कि आपको अपने पार्टनरकी शक्ल सूरत पसंद हो, आपको पार्टनर का चेहरा पसंद नहीं होता तो आपकी मैरिड लाइफ में दिक्कते आना स्वाभाविक है । लेकिन एक बात याद रखना बहुत जरूरी है कि सुंदरता का पैमाना पल पल बदलता रहता है । सभी के मन के किसी न किसी कोने में यह बात जरूर रहती है कि हमारा जीवनसाथी सुन्दरता की कसौटी पर भी खरा उतरे ।

फिटनेस - आपके पार्टनर का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए , उनको पहले या अब कोई मनोवैज्ञानिक समस्या न हो, शादी सेपहले पार्टनर का फैमिली बैक ग्राऊण्ड भी चेक करना बहुत जरूरी है । कहने का यह मतलब  read more »

विवाह विलंब दूर करने के उपाय

कुछ ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण कन्या के विवाह में विलंब हो तो इस प्रकार के उपाय स्वयं कन्या द्वारा करवाने से विवाह बाधाएं दूर होती है –

किसी भी माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से चांदी की छोटी कटोरी में गाय का दूध लेकर उसमें शक्कर एवंउबलेहुए चांवल मिलाकर चंद्रोदय के समय चंद्रमा को तुलसी की पत्ती डालकर यह नेवैद्य बताएं व प्रदक्षिणा करें, इस प्रकार यह नियम 45 दिनों तक करें ,45 ङ्घह्न दिन पूर्ण होने पर एक कन्या को भोजन करवाकर वस्त्र और मेंहदी दान करें, ऐसाकरने से सुयोग्य वर की प्राप्ति होकर शीघ्र मांगलिक कार्य संपन्न होता है ।

गुरूवार के दिन प्रात:काल नित्यकर्म से निवतृत होकर हल्दीयुक्त रोटियां बनाकर प्रत्येक रोटी पर गुड़ रखें व उसे गाय को खिलाएं ।7 गुरूवार नियमित रूप से यह विधि करने से शीघ्र विवाह होता है ।

मंगलवार केदिन देवी -मंदिर में लाल गुलाब का फूल चढ़ाएं पूजन करें एवं मंगलवार का व्रत रखें । यह कार्य नौ मंगलवार तक करे । अंतिम मंगलवार को9 ख़् वर्ष की नौ कन्याओं को भोजन करवाकर लाल वस्त्र, मेंहदी एवं यथाशक्ति दक्षिण दें, शीघ्र फल की प्राप्ति होगी ।  read more »

बिना कूंडली के जाने सुखी दांपत्य के सूत्र

माता के गर्भ से उत्पन्न शिशु जब दुनिया में आता है , तब ब्रह्मांडीय ग्रहों के प्रभाव उस पर आकर समस्त शुभ अशुभ फल देना प्रारंभ कर देता है। रमल शास्त्र के व्यवसाय, क्षेत्र, कार्यप्रणाली इत्यादि को प्रभावित करते हैं ।  read more »

मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित

गुरू तो बारह वर्षों में सूर्य की राशि में आता है, लेकिन सूर्य वर्ष में दो बार गुरू की राशि में आता है और यही काल धनु मलमास व मीन मलमास के नाम से जाना जाता है ।

देवप्रबोधिनी एकादशी से प्रारंभ हुआ मांगलिक कार्यों का सिलसिला इन दो मासों में थम सा जाता है । हमारी संस्कृति में विवाह संस्रा को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है । इस संस्कार एवं अन्य धार्मिक कायोँ के पवित्र उद्देश्य की प्राप्ति में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो, इसके लिए मुहूर्त का दोषरहित होना अनिवार्य है ।

विवाह में गुरू-शुक्र का अस्त, वृध्दत्व, बाल्यकाल निषिध्द माना जाता है । जब गुरू शुक्र, सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं तो प्रभावहीन हो जाते हैं । सामान्यत: अस्त से तीन दिन पूर्व का काल वृध्दत्व वउदय से तीन दिन बाद तक का काल बाल्यकाल कहलाता है विवाह मुहूर्त में सर्वप्रथम सूर्य, गुरू एवंचंद्र की स्थिति ही महत्वपूर्ण मानी जाती है । अत: इनका प्रभाव संपन्न होना विवाह मुहूर्त के लिए अनिवार्य है ।

लगभग ढाई वर्ष के अंतराल से आने वाले मलमास को विवाहआदि संस्कारों के लिए त्याज्य माना गया है। इसके साथ ही जब जब गुरू सूर्य परस्पर एक दूसरे की राशि में थिति होते हैं, उस काल को भी विवाहादि धार्मिक संस्कारों के लिए त्याज्य माना गया है।  read more »

सामूहिक उपनयन-14-15 फरवरी को

महासमुन्द जिले के सरायपाली वि.खं. अन्तर्गत 250 से अइधक राजस्व ग्रामों में बसे विप्र परिवारों को एकजुट कर विभिन्न सामाजिक गतिविधियां गत एक वर्ष से जारी है, सरायपाली में आगामी 15 फरवरी 2009 को सामूहिक वत्रोपनयन संस्कार का भव्य कार्यक्रम रूदेश्वरी मंदिर सिंघोड़ा में आयोजित होना है , इस अवसर पर क्षेत्र के सभी ब्राह्मण परिवार आमंत्रित होंगे, इससे परिवार मिलन, विप्र युवा- युवती परिचय का उपयुक्त अवसर प्राप्त होगा ।

परस्पर सामंजस्य व समाज के औचित्य का बोध होगा । चेतना जागृत हो सकेगी तथा सामाजिक बदलावको एक नई दिशा प्राप्त हो सकेगी । इस अवसर पर क्षेत्र के प्रतिभा सम्मान किया जाना है । परिवार सर्वेक्षण का कार्य प्रगति पर है, पूर्ण होने पर एक सामाजिक पत्रिका का प्रकाशन होगा । सरायपाली नगर में विप्र भवन निर्माण की रूपरेखा बन रही है, स्थल चयन उपरांत निर्माण शुरू किया जावेगा । सभ्रांत व सम्पन्न विप्र जन सहयोग में अग्रणी है ।

कूंभ प्रारंभ

माघ पूर्णिमा के अवसर पर राज्य शासन द्वारा राजिम कूंभ अपने पारंपरिक अंदाज में श्रध्दालुओं की श्रध्दा भक्ति से सराबोर संगम तट पर ब्रम्हमुहूर्त में स्नान एवंदीपदान से प्रारंभ हुई ।

रात भर अधिकारी एवं कर्मचारी राजिम के संगम तट तक पानी पहुंचा देने की मशक्कत मे ंलगे रहे, पानी पहुंचने की खबर श्रध्दुलाओं को हुई तब वे सरपट अपने पूरे पारिवारिक काफिलेके साथ निर्मित कूंड तक पहुंचने लगे । कुछ ही देर में कूंड के चारों तरफ स्त्री पुरूष वृध्द तथा बच्चों की अपार भीड़ स्नानादि के कार्यों में जूट चुके थे ।

पानी के आगमन से जहां श्रध्दालुओं में हर्ष देखा गया । कूंभ के नाम से आये श्रध्दालुओं के कारण अलसुबह ही भारी भीड़ विशेष तौर पर नदी तट, श्री राजीव लोचन मंदिर तथा कुलेश्वर नाथ मंदिर परिसर में रही ।

विवाह विशेष

विवाह में नाड़ी मिलान की उपयोगिता

विवाह में वर-वधू के गुण मिलान में नाड़ी का महत्व इसी से ज्ञात होता है कि36 ङ्गङ्ढ गुणांक में ख़ ्छङर्लेृढ नाड़ी के होते हैं । दो अपरिचितों की न: स्थिति और शारीरिक सामंजस्य की जानकारी नाड़ियों के मिलान से की जाती है । भावी संतान सुख की जानकारी भी नाड़ी से ही मिलती
है ।
वर- कन्या के जन्म नक्षत्र एक ही नाड़ी के नहीं होने चाहिए । दोनों की नाड़ियां भिन्न होना शुभ माना जाता है । वर- कन्या की यदि नाड़ियां आद्य आद्य या अन्त्य अन्त्य है तो अच्छा मिलना नहीं माना जाता है , परन्तु दोनों की यदि मध्य नाड़ियां है तो अति अशुभ माने जाने सेयदि नाड़ी दोष का परिहार न हुआ हो तो विवाह करना उचित नहीं होता है ।

नाड़ियां तीन -आद्य, मध्य और अन्त्य मानी गई है , जो नक्षत्रानुसार इस प्रकार होती है अश्वनी, आद्र्रा, पुनर्वसु, पू. फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पू.भ3द्र इङ्गग्न की आद्य नाड़ी, भरणी, मृगशिरा, पुष्य, उ. फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पू. षा. घनिष्ठा, उ. भाद्रकी मध्य नाड़ी और कृतिका, रोहिणी, श्लेषा, मधा, स्वाति, विशाखा, उ.षा, श्रवण,रेवती की अंत्य नाड़ी होती है ।

गण दोष योनि दोष, वर्ण दोष और षड़ाष्टक ये चारो दोष वर कन्या में गुण ग्रहमैत्री होने पर दोष नहीं रहते परन्तु नाड़ी दोष बना रहता है । नाड़ी दोष का विचार ब्राह्मणों में विशेष रूप से करने का उल्लेख है ।

नाड़ी दोष परिहार - निम्नांकित परिस्थितियों में नाड़ी दोष परिहार स्वत: ही हो जाता है । राश्यैक्ये चेभ्दिन्नमृक्षं द्वियो स्वांत्रक्ष त्रैम्ये राशि युग्मं तथैव । नाड़ी दोषो नो गणानां च दोषो नक्षत्रैक्ये पाद भेदे शुभं स्यात । अर्थात(1) (ङ्क) एक ही राशिहो, परन्तु नक्षत्र भिन्न हो(2) (ङ्ख) एक नक्षत्र हो परन्तु राशि भिन्न हो(3) (ङ्ग) एक नक्षत्र हो परन्तु चरण भिन्न हो(4) (ङ्घ) नक्षत्र एक चरण एक होने पर भी भरणी ,कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, आद्र्रा, पुष्य, विशाखा, श्रवण, घनिष्ठा, पू. भाद्र, उ. भाद्र एवं रेवती में जनाम होने पर नाड़ी दोष नहीं रहता है ।

(5) (ह्न) कन्याके नक्षत्र से मध्यनाड़ी नहीं है तो पार्श्व नाड़ी पर दोष नहीं रहता है । एक राशि नक्षत्र होने पर गुण मिलान में36 ङ्गङ्ढ में से28 ङ्खख़ गुणों का मिलान हो जाता है । और नाड़ी दोष का परिहार होने पर विवाह विचारणीय होता है । नाड़ी से भावी संतान सुख ज्ञात किया जाता है। इसलिए नाड़ी दोष होने पर भी यदि वर कन्या दोनों की जन्म कूंडलियों के पंचम भाव में शुभ ग्रह है शुभ ग्रहों से दृष्ट है तथा पंचमेश की शुभ स्थिति है तो विवाह विचारणीय हो सकता है ।  read more »

अभिमान

मानव में अभिमान भरा ।
मानवता में स्नेह भरा ।
जहाँ भरा है अभिमान ।
वहां पड़ा है अभिशाप ।
जीवन ही के ढाल है ।  read more »

भजन श्री राम महिमा

राम के गुण गा निरंतर, राम गुण चित लाइये ।
राम का महिमा से मंडित रूप नित मन ध्याइये ।
नित राम के गुण गाइये-नित राम के गुण गाइये ...
र् कत्तव्य पथ का यह रसायन, इक अनूपम नाम है।
सुख दुख में समता धर जिया, वह राम ही इक नाम है ।
राम ही इक नाम है...
र् कत्तव्य पथ अपनाइये,नित राम के गुण गाइये।
राम का महिमा सेमंडित रूप नित मन ध्याइये।
रामके गुण गाइये -नित राम के गुण गाइये...
माता- पिता के सुन वचन, हंस करके सारे सुख तजै ।
राज त्यागा, राग त्यागा, बन विरागी वन चले ।
पुलकित नयन, पुलकित वदन,र् कत्तव्य पथ पर बढ़ चले ।
रामके गुण गाइये, नित राम के गुण गाइये ...
सीता बनी अनुगामिनी, लक्ष्मण ने आगे पग धरा ।
इक सत्य, दूजा शक्ति, तीजा चरण वन आगे बढ़ा ।
चरण वन आगे बढ़ा ।
सत्य पथ अपनाइये, दृढ़ शक्ति चारित ध्याइये ।
राम का महिमा से मंडित रूप नित मन ध्याइये ।
राम के गुण गाइये नित राम के गुण गाइये ...
मन मे ंसदा हो सत्य और दृढ़ शळक्ति का नित वास है ।
चरित्र जिसका हो विमल वह रा मगुण गण वास है ।
रकाम गुण गण वास है ।  read more »

नर्मदा जंयती पर विष्णु ब्रह्मनाम पाठ

रायपुर । नार्मदीय ब्राह्मण समाज द्वारा नर्मदा जयंती समारोह का आयोजन किया गया । वहीं सामाजिक लोगों ने मां नर्मदा की पूजा अर्चना कर श्री विष्णु ब्रह्मनाम का पाठ किया ।

अध्यक्ष सुभाष चंद्र नेगी ने बताया कि इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया जिसमें गायन, वादन, फैंसी ड्रेस, खेलकूद आदि शामिल है। कार्यक्रम में मेधावी छात्र सिध्दार्थ डोंगरे वछात्रा गौरी को छात्रवृत्ति प्रदान की गई । इस मौके पर श्रीधर पारे, डॉ. भालचन्द्र शुक्ला, आरएन जोशी, विनोद काशिव, सुधीर उपरीत, संजीवगुहे, ओमप्रकाश पराशर, प्रकाश राजवैद्य आदि मौजूद थे ।

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