विप्रवार्ता अंक 2010

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श्रीगणेशजी की आरती

श्रीगणेशजी की आरती

गणपति की सेवा मंगल मेवा सेवा से सब विघ्न टरै ।
तीन लोक तैतिस देवता द्वार खडे सब अरज कारै ॥

रिद्धी सिद्धी दक्षिण वाम विराजे, अरु आंनद से चवँर ढ़ुले ।
धूप दीप और लिये आरती भक्त खडे जयकार करे ॥
गणपति की…  read more »

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