विप्र वार्ता के प्रकाशन के एक दशक पूर्ण

ब्राह्मण समाज की संवाद पत्रिका विप्र वार्ता के प्रकाशन के एक दशक पूर्ण होने पर आशीर्वाद भवन रायपुर में सम्मान समारोह तथा विचार गोष्ठी गत दिवस शनिवार को संपन्न हुई। मुख्य अतिथि क्रेडा अध्यक्ष श्री पुरंदर मिश्रा ने विप्रवार्ता के पचास साल पूरे केर और प्रसार संख्या एक लाख तक पहुंचाने का आह्वान उपस्थित लोगों से किया। इस मौके पर आधार वक्तव्य में पूर्व विधायक श्री वीरेंद्र पांडेय ने दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर प्रमोद दुबे ने की तथा विशेष अतिथि के रूप में भंडार निगम के श्री नीलू शर्मा शामिल हुए। गोष्ठी के अतिथि वक्ता थे में श्री धर्मसिंह कौशिक (दिल्ली), श्री एनपी शर्मा उपाध्यक्ष वल्र्ड ब्राह्मण फेडरेशन, पत्रकार शंकर पांडेय, विश्व संवाद केंद्र के अनिल द्विवेदी तथा श्री सरोज कुमार षडंगी (ओडि़शा)। विप्रवार्ता ने विज्ञापनदाताओं, संवाददाताओं तथा सहयोगियों को सम्मानित किया। सम्मानित किए गए प्रमुख लोगों में श्री धर्म सिंह कौशिक, श्री पी भानुराव, अजय मिश्रा, श्रीमती डॉ स्नेहलता पाठक, श्रीमती करुणा तिवारी,श्री प्रभात मिश्र, श्री संजय बिल्थरे चार्टेड अकाउंटेंट ,श्री रमेश पटाक राजनादगाव,श्री राजेश सिंह , प्रमुख है। इस अवसर पर देश व प्रदेश से बड़ी संख्या में विप्रजन उपस्थित हुए।
संकल्पित मन, समर्पित जन और धन के बिना किसी पत्रिका का प्रकाशन संभव नहीं है। पिछले दस सालों से ब्राह्मण समाज की संवाद पत्रिका के रूप में स्थान बनाने मासिक पत्रिका विप्रवार्ता का निरंतर प्रकाशन कर गोवर्धन पर्वत उठाने जैसा काम किया है। यह बात गोष्ठी में मुख्य वक्ता तथा पूर्व विधायक श्री वीरेंद्र पांडेय ने कही। उन्होंने परिवर्तन का उल्लेख करते हुए इंगित किया कि समय के साथ शब्दों के अर्थ भी बदल जाते हैं। विप्रवार्ता में समय के साथ बदलाव हुए हैं लेकिन संसाधन की कमी के बाद भी पत्रिका की निरंतरता बनी हुई है। इसका श्रेय अध्यक्ष अजय त्रिपाठी को जाता है। समय के साथ शब्दों के अर्थ में हुए बदलाव के बारे में बोलते हुए गोष्ठी शब्द की व्याख्या की। श्री पांडेय ने कहा कि पहले राजा-महाराजाओं के समय में संपत्ति पशुधन की संख्या से आंकी जाती थी। पहले गोठ का अर्थ गायों को रखने के स्थान से लिया जाता था। इन पशुओं की देखभाल करने वाले काम करते हुए वहां बैठ कर आपस में चर्चा किया करते थे। इन चर्चाओं को गोष्ठी का नाम दिया गया। गोष्ठी याने गाय के गोठ में हुई चर्चा। आज यही गोष्ठी शब्द किसी विषय पर विचार-विमर्श का पर्याय बन गया। इस प्रकार गोष्ठी का अर्थ तब आपसी बातचीत था और आज किसी विषय पर विचार विमर्श हो गया। उन्होंने यह रेखांकित भी किया कि विप्रवार्ता विप्रजनों को एक सूत्र में पिरोने का काम शिद्दत के साथ कर रहा है। इस अवसर पर उन्होंने संपूर्ण ब्राह्मणों के लिए साल में एक बार बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की।
विप्रवार्ता की इस विचार गोष्ठी में क्रेडा के अध्यक्ष अतिथि श्री पुरन्दर मिश्रा रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर के प्रथम नागरिक श्री प्रमोद दुबे ने की और विशिष्ट अतिथि भंडार निगम के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा उपस्थित थे। गोष्ठी में अतिथि वक्ता वल्र्ड ब्राह्मण फेडरेशन के एनपी शर्मा, वल्र्ड ब्राह्मण फेडरेशन के उपाध्यक्ष श्री धर्म सिंह कौशिक (दिल्ली) राष्ट्रीय हिंदी मेल के संपादक श्री शंकर पांडेय, श्री पीपी शर्मा (सागर), श्री सरोज कुमार षडंगी (बरगढ़, ओडि़शा) तथा अनिल द्विवेदी (विश्व संवाद केंद्र) थे।
महापौर श्री प्रमोद दुबे ने कहा कि ब्राह्मण समाज में आपसी संवाद के लिए विप्रवार्ता कंक्रीट के ब्रिज की तरह काम कर रहा है। विप्रवार्ता परिवार को तन-मन और धन से सहयोग करने की हम सबकी जिम्मेदारी इसलिए आवश्यक है कि यह संवाद का ब्रिज मजबूती से खड़ा रहे और हमारे बीच संवाद का क्रम निरंतर चलता रहे। श्री दुबे ने आह्वान किया किया कि इसकी निरंतरता के लिए हमें गुप्तदान के माध्यम से विप्रवार्ता का साथ देना चाहिए।
प्रखर राजनीतिज्ञ तथा ओजस्वी वक्ता श्री पुरंदर मिश्रा ने विप्रवार्ता को दस साल पूरा करने की बधाई देते हुए कामना की कि विप्रवार्ता पचास साल पूरा करे और इसकी प्रसार संख्या एक लाख तक पहुंचे। उन्होंने आमंत्रित अतिथियों नीलू शर्मा तथा श्री प्रमोद दुबे को प्रस्ताव दिया कि हम तीनों मिल कर विप्रवार्ता परिवार में 500 नए सदस्यों को संकल्प लें। उन्होंने यह भी कहा कि आप दोनों मिल कर एक सौ सत्तर सदस्य बनाएं। उन्होंने स्वयं एक सौ इकहत्तर सदस्य विप्रवार्ता परिवार से जोडऩे का संकल्प लिया।
भंडार निगम अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने विप्रवार्ता के निरंतर प्रकाशन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी और आश्वस्त किया कि विप्रवार्ता परिवार को सहयोग के लिए मैं हर समय, हर जगह उपस्थित रहूंगा।
विश्व संवाद केंद्र के अनिल द्विवेदी ने पत्रिका के प्रकाशन में होने वाली कठिनाइयों के साथ इस बात को भी रेखांकित किया कि पत्रिका को पाठकों तक निरंतर पहुंचाना भी एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि आज पाठकों की कमी नहीं है लेकिन पाठक खरीद कर पढऩे में रुचि नहीं रखते इसलिए पत्रिका का निरंतर आज प्रकाशन आसान नहीं है। इस अर्थ में विप्रवार्ता का लगातार दस प्रकाशन किया जाना उल्लेखनीय है।
राष्ट्रीय हिंदी मेल के संपादक श्री शंकर पांडेय ने कहा कि पत्रकारिता के अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि सामाजिक पत्रिका का प्रकाशन बहुत साहस का काम है। विप्रवार्ता की यात्रा को याद करते हुए श्री पांडेय ने कहा कि आरंभिक दौर में विप्रवार्ता के जरिए वैवाहिक सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता था। बाद में इसमें सामाजिक गतिविधियों को स्थान दिया जाने लगा और आज यह समाज में संवाद की एकमात्र पत्रिका बन गई है।
बरगढ़ के वक्ता श्री सरोज कुमार षडंगी ने गोष्ठी में जानकारी दी कि ब्राह्मण समाज की पूरे देश में तीन पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि तमिलनाडू तथा आंध्र प्रदेश से अंग्रेजी तथा स्थानीय भाषा में समाज की पत्रिका प्रकाशित होती हैं। विप्रवार्ता हिंदी में प्रकाशित होने वाली एकमात्र राष्ट्रीय पत्रिका है। विप्रवार्ता ने प्रकाशन के एक दशक पूरे कर लिए हैं और अब इसे आगे बढ़ाने का काम हम समस्त विप्रजनों का है।
इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया गया। विप्रवार्ता परिवार के श्री अजय त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया और विप्रवार्ता के संघर्षमय इतिहास की जानकारी दी और विप्रवार्ता की भावी योजनाओं को उपस्थित समूह के साथ साझा किया। कार्यक्रम में मंच संचालन करअरविन्द ओझा सुनीता शर्मा ने किया।

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