विप्र वार्ता जून 2015 का अंक महामना और अटल जी को समर्पित

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विप्रवार्ता अजय त्रिपाठी,रायपुर,द्वारा अपना जून का अंक श्री अटल बिहारी बाजपेयी,महामना मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न प्रदान करने पर समर्पित कर रहे है यह भारत रत्न श्री प्रणव मुखर्जी,राष्ट्रपति,भारत ,और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परम्परयो से हट कर अटल जी के निवास पर जा कर प्रदान किया गया ,बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और स्वतंत्रता सेनानी महामना मदन मोहन मालवीय के निधन के 68 साल बाद उन्हें देश के शीर्ष नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महामना के परिजनों को भारत रत्न सौंपा। महामना की 2 पौत्रियों हेम शर्मा, सरस्वती शर्मा और 2 पौत्रोें प्रेमधर मालवीय और गिरधर मालवीय सहित उनके परिजनों ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।

महामना की उपाधि से सम्मानित पहले व्यक्ति
शिक्षा के प्रसार को लेकर दूरदृष्टि रखने वाले मालवीय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। वह देश के पहले व्यक्ति थे जिन्हें समाज सुधार और देश सेवा के लिए महामना की उपाधि से विभूषित किया गया था। 25 दिसंबर, 1861 को जन्मे मालवीय 1886 में कोलकाता के कांग्रेस अधिवेशन में दिए गये अपने पहले ही प्रभावशाली भाषण से देश के राजनीतिक क्षितिज में कद्दावर नेता के रूप में उभरे। वह 1909 और 1918 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने। मालवीय को स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी उत्कृष्ट भूमिका और हिंदू राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाने के लिए जाना जाता है। वह दक्षिणपंथी हिंदू महासभा के प्रारंभिक नेताओं में थे। मालवीय 12 नवंबर 1946 को वाराणसी में 85 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह गये, लेकिन अपने काम की वजह से वह भारतवासियों के जहन में हमेशा जिंदा रहेंगे

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