विप्र वार्ता

अजय त्रिपाठी ने की सहयोग की अपील

हमें इस बात की भली प्रकार से ज्ञान है

पत्रिका परिवार के अध्यक्ष श्री अजय त्रिपाठी ने सभी के सहयोग की अपील करते हुए कहा कि दिन प्रतिदिन हमारी गतिविधियां बढ़ी हैं प्रतिनिधि उसे संकलित कर विप्र वार्ता तक भेजें ताकि अन्य लोग प्रेरणा ले सकें । सर्व युवा ब्राह्मण परिषदके अध्यक्ष एवं विप्र वार्ता परिवार के प्रमुख अजय त्रिपाठी ने कहा कि छ.ग. राज्य में हम सभी निवास करते हैं हमें इस बात की भली प्रकार से ज्ञान है कि इस प्रदेश में हमारी राजनैतिक स्थिति क्या है? आज प्रत्येक वस्तु राजनीति से प्रभावित है । लोकतंत्र में राजनैतिक शक्ति का होना आवश्यक है इसलिए हमें एक राजनैतिक शक्ति बनना होगा, हम इस बात को अवश्य याद रखे कि कौन हमारे हितैशी है और कौन 2 सामाजिक जरूरतों एवं लड़ाई के लिए आपकी आवाज बनने आगे आते हैं समाज में नाम पर स्वार्थी तत्वों की भी पहचान हमें करनी होगी

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संपादक के नाम पत्र एवं शुभकामनाएं....

pt. Ravishankar Vyas ji

विप्र वार्ता के अंक नियमित प्राप्त हो रहे हैं आभार आप समाज विप्र समाज को एक जुट करने का प्रयास कर रहे हैं बधाई हो । अगर विप्र समाज में आपसी भाई चारे की भावना पैदा हो जायेगी तो विप्र समुदाय पीछे नहीं रहेगा । एक विप्र अगर अपने विप्र बंधु को चाहने लगेगा तो फिर भारत में विप्र का ही राज्य होगा । तथा कोई भी विप्र बंधु बेरोजगार नहीं फिरेगा । 100 वें अंक में प्रवेश पर पुन: बधाई स्वीकार करें ।

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हार्दिक श्रद्धांजलि विप्र वार्ता परिवार

Let. Vhuramani Mishra,चूड़ामणि मिश्रा

चूड़ामणि मिश्रा
मिलनसार एवं साथियों के लिए सदैव समर्पित रहने वाले चूड़ामणी मिश्रा का दुखद निधन गत दिनों एक ट्रेन दुर्घटना में हो गया । वे अपने परिवार एवं मित्र मंडली को छोड़ चले गये । चूड़ामणि मिश्रा अब हमारे बीच नहीं रहे । हम सभी मित्र अपने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं विप्र वार्ता एवं हम सभी मित्रों की ओर से हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित है। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में अजय त्रिपाठी, संपादक अरविन्द ओझा, वैभव तिवारी, रमेश तिवारी, सीटू महराज, पिंकु सोनी, सुनील जैन, योगेश केसरी सहित पेण्ड्रा के युवा साथी शामिल हैं ।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय
सुन्दरनगर निवासी, रिटायर्ड सिविल सर्जन डा. राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय का निधन हो गया । वे छ.ग. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव अमित पाण्डेय और आशीष पांडेय के पिता और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सुभाष शर्मा के बहनोई थे
। विप्र वार्ता परिवार की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित है ।

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विप्र वार्ता के 75 वीं हीरक जयंती

विप्र वार्ता के 75 वीं हीरक जयंती प्रकाशन पर
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कुनकुरी
अध्यक्ष-श्री सुखदेव साय, उपाध्यक्ष श्री विष्णु गुप्ता
श्रीमती सौभाग्यवती, संचालक-श्री गजेन्द्र जैन, श्री उमेश सिंह बड़ाईक (बैंक प्रतिनिधि)

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विप्र वार्ता हेतु सुझाव पत्र

14 जुलाई 2012 के कार्यक्रम के लिये आप बधाई के पात्र हैं । लगभग 40 लोग एकत्र हुए थे सभी क्षेत्रों से और लंबी चर्चाएं हुई । भोजन के बाद मैं सामने के भवन में चला गया जहां कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित थी । अत: कुछ सुझाव जो मैं देना चाहता था (यदि मौका मिलता) वह नहीं दे सका । श्री पी भानू राव से मालूम

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विप्र वार्ता का हीरक जयंती 75 वां अंक विमोचित

ब्राह्णों ने देश की स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अछूतो उद्धार तक के सभी आंदोलनों में अपनी महती भूमिका का निर्वाह किया है । देश की राजनीति में आये वर्तमान परिवर्तन के चलते सामाजिक विकृतियां आ रही है जिससे देश पीछे जा रहा है । सद्भावना व भाईचारे में कमी आई है । ये विचार पंडित मांगेराम शर्मा ने विप्र व

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प्रदीप कुमार मिश्रा को पुलिस पदक

स्व. डॉ. बल्देव प्रसाद मिश्र के पौत्र स्व. कांशी प्रसाद मिश्रा के पुत्र प्रदीप कुमार मिश्रा , उप पुलिस अधीक्षक को राष्ट्रपति महामहिम प्रतिभा देवी पाटिल ने राष्ट्रपति द्वारा पुलिस पदक से सम्मानित किया है । वे 1982 से उप निरीक्षक के पद पर पुलिस विभाग में कार्यरत है । एन.सी.सी.

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परिवार के जुड़ाव में रामायण की प्रासंगिकता

भारतीय संस्कृति कृषि प्रधान संस्कृति है । इस संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है परिवार प्रेम । विश्व कवि श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर के शब्दों में रामायण घरेलू जीवन का महाकाव्य है । विश्व की किसी भी संस्कृति में परिवारिक आदर्शों पर आधारित रामायण जैसा महाकाव्य नहीं है ।

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हनुमान जी के 12 नाम

हनुमान जी के बारह नाम का स्मरण करने से समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति भी होती है, बारह नामों का निरंतर जप करने वाले व्यक्ति की श्री हनुमान जी महाराज दसों दिशाओं एवं आकाश पाताल में रक्षा करते हैं, प्रस्तुत है केसरीनंदन बजरंग बली के 12 चमत्कारी और असरकारी नाम- 1. ओम हनुमान 2. ओम अंजनी सुत 3.

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दहेज

आज दहेज प्राय: हर समाज में दानवीय रूप ले चुका है । जो समुचित अथवा कहें वट पक्ष के मनोनुकूल दहेज नहीं दे पाते उनसे तो वर पक्ष रूष्ट होता ही है उनकी बेटी जो विवाहोपरांत उनके घर की बहू बन जाती है और जिसे लक्ष्मी कहा जाता है उसे तरह तरह से प्रताडि़त किया जाता है । दहेज की बढ़ी मांग के चलते ही अनेक सु

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