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शाकद्वीपीय ब्राह्मण

ऋक, वाक्य ब्रह्म जानाति इति ब्राह्मण: से स्पष्ट है कि ब्राह्मण जाति ही नहीं, बल्कि एक संस्कृति संस्कार है । सामाजिक व्यवस्था के अंतर्गत यह शब्द जाति सूचक हो गया जो तत्कालीन सामाजिक कारणों से विभिन्न वर्गों में विभक्त होता गया । यद्यपि पौराणिक ग्रंथों में ब्राह्मण ही उल्लिखित है परन्तु वेद पुरा

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शाकद्विपीय ब्राह्मण समाज रायपुर 100 साल

ऐतिहासिक शाकद्विपीय ब्राह्मण समाज रायपुर का ऐतिहासिक परिसर कई मामलों में चिरस्थाई यादगार के रूप में रायपुर नगर में स्थापित है। यहां इस ट्रस्ट की स्थापना 1920 में हुई । लेकिन माता जी की बगेची के नाम पर राय बहादुर सेठ बंशीलाल , अबीरचंद डागा रायपुर दुकान से श्री जगन्नाथ जी सेवग वल्द घमण्डी राम जी

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आओ इतिहास बनायें

विप्र वार्ता के कृपालु पाठकों से संपादक मंडल का निवेदन
श्रध्दालु विप्र बंधु, - आप सभी के सहयोग से मात्र एक वर्ष पूर्व प्रारंभ हुई आपकी प्यारी पत्रिका सफलता के नित नये सोपान छू रही है ।

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