शाकद्विपीय ब्राह्मण समाज रायपुर 100 साल

ऐतिहासिक शाकद्विपीय ब्राह्मण समाज रायपुर का ऐतिहासिक परिसर कई मामलों में चिरस्थाई यादगार के रूप में रायपुर नगर में स्थापित है। यहां इस ट्रस्ट की स्थापना 1920 में हुई । लेकिन माता जी की बगेची के नाम पर राय बहादुर सेठ बंशीलाल , अबीरचंद डागा रायपुर दुकान से श्री जगन्नाथ जी सेवग वल्द घमण्डी राम जी सेवग श्री लाभू जी सेवग वल्द रामजी सेवग श्री देवीदान जी सेवग वल्द सदासुख जी सेवग तिवरीं वाले ने तीन एकड़ 88 डिसमिल भूमि खरीदी इसके सर्वाराकार श्री लाभू जी वल्द रामजी सेवग फलोदी वाले एवं श्री देवीदान जी वल्द सदासुख जी सेवग तिवरी वाले हुए ।

माता जी के मंदिर के लिए कुल 678 रुपये से निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और राजस्थान व छत्तीसगढ़ नागपुर सहित स्थानों से सहयोग प्राप्त कर जून 1921 में इसका निर्माण कार्य संपन्न हुआ । जिसकी लागत 2861 रुपये आई । यहां माता अंबा जी की मूर्ति जयपुर से लाकर विराजमान हुई । सिंह वाहिनी हंसमुख तेजस्वी, चार भुजा वाली माता आज रायपुर नगर की जनता के लिए एक सिध्द स्थान है । 1982 में सभा मंडप के छत आदि में क्रेक आने के कारण इसका विस्तार कार्य किया गया । इसके पश्चात 1990 में समाज के उत्साहित नवयुवकों द्वारा जनसहयोग से कार्य कराये गये । इस स्थान पर बाबा रामदेव जी का मंदिर 1934 में स्थापित किया गया । घोड़े पर सवार बाबा रामदेव के सामने डाली बाई सगुना बाई और भाणजा है घोड़े के पीछे हरजी भाटी चंवर हुलाते हुए की प्रतिष्ठा हुई । 1947 में पूज्य गुरू बाबा की समाधि मंदिर का निर्माण किया गया । इस समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र में एक मात्र यह मंदिर था जहां दूर दूर से श्रध्दालुजन आते थे । 1926 में भास्कर भवन के नाम पर स्वाजातीय बंधुओं से 305 रुपये सहयोग एवं विशेष राशि 350 रुपये को हीरालाल जी सेवग रीगत मल की भैरू जी बीकानेर वालों ने कमरे हेतु एक जोड़ी कपाट जो अभी भी लगा हुआ है का निर्माण करवाया । 1931, सन् 1963, 1972, 1994, 1997 में इस धर्मशाला भवन में विभिन्न निर्माण कार्य संपन्न होते हुए समाज के लिए उपयोगी कार्य हुए ।

सूरज बिहारी भवन - 2001 में श्री बिहारी लाल जी बीरम जी मुधियाड़ा ओसियां निवासी ने अपने पिता की स्मृति में एक सर्वसुविधायुक्त बड़ा हाल 6 कमरे, विद्युत व्यवस्था से संपन्न धर्मशाला का निर्माण कर समाज को समर्पित किया । सूरज बिहारी भवन आज पूरे परिसर की शान है । मंदिर के मुख्य द्वार 1934 में निर्मित हुआ एवं 1969 में इसका जीणोध्दार कराया गया । विक्रम संवत 2023 में परम पूज्य श्री 108 शंकरनाथ जी महाराज नवलेश्वर मठ बीकानेर की प्रेरणा से सत्संग भवन का लोकापर्ण हुआ । 2002 में संत महात्माओं के निवास के लिए एक संत भवन का निर्माण कराया गया । विभिन्न अवसरों पर यहां बड़ी पूजाएं बड़े श्रध्दा पूर्वक बड़े उत्साह के साथ होती है जिसमें नवरात्र, गणगौरी, सूर्य सप्तमी, एवं बाबा रामदेव का मेला प्रमुख है । जब रायपुर के नागरिक इन पुजाओं में शाकद्विपीय ब्राह्मण समाज के साथ शामिल होकर भक्ति भाव से धार्मिक कार्य करते हैं ।

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