शिव का पूजन

राशि अनुसार शिव का पूजन-ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि व्यक्ति अपनी रााशि के अनुसार भगवान शिव की आराधना और पूजन करे तो विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं । जिसे अपनी जन्म राशि या नाम राशि पता हो वह व्यक्ति निम्न सामग्री से शिवलिंग पर अभिषेक करे ।
मेष - जल या दूध के साथ गुड़, शहद, लाल चंदन, लाल कनेरके फूल सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को जल या दूध के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है ।
वृषभ- जल या दही के साथ शक्कर, मिश्री, अक्षत, चावल, सफेद तिल, सफेद चंदन, श्वेत आक फूल सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को जल और दही के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है ।
कर्क- दूध या जल के साथ में शुद्ध घी, सफेद तिल, सफेद चंदन, सफेद आक फूल सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को जल या दूध के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है ।
सिंह- जल या दूध के साथ शुद्ध घी, गुड़, शहद, लाल चंदन सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को जल या दूद के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है ।
कन्या - गंगाजल या दूध के साथ दूब, जौ, बेलपत्र फूल सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को जल और दूध के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता
है ।
तुला- गंगाजल या दही के साथ में शक्कर, अक्षत, सफेद तिल, सफेद चंदन, श्वेत आक फूल, सुगंधित इत्र सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को जल या दही के सात मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है ।
वृश्चिक- जल या दूध के साथ घी, गुड़, शहद, लाल चंदन, लाल रंग के फूल सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को जल और दूध के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है ।
धनु- जल या दूध के साथ हल्दी, केसर, चावल घी, शहद, पीले फूल पीली सरसें, नागकेसर सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को जल और दूध के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है।
मकर- गंगाजल या दही के साथ में काले तिल, सफेद चंदन, शक्कर, अक्षत सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को गंगाजल या दही के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ होता है
कुंभ- गंजाजल या दही के साथ में काले तिल, सफेद चंदन, शक्कर, अक्षत सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को गंगाजल या दही के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है ।
मीन- जल या दूध के साथ हल्दी, केसर, चावल, घी, शहद, पीले फूल, पीली सरसों, नागकेसर सब मिलाकर या किसी भी एक वस्तु को जल और दूध के साथ मिलाकर अभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है ।
संकलन-रामकिशन शमा

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