शुभ

देवकर्म के समान ही शुभ है श्राद्धकर्म

मृत्यु पश्चात दाहकर्म के बाद मृतात्मा को सबसे पहले दशगात्र पिंड दिए जाते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि यह शरीर का सूक्ष्म रूप (परिमाण अंगुष्ठ मात्र) होता है। और मृतात्मा लोकांतर जाती है। जिसका श्राद्ध नहीं होता, वे वायुमंडल में भूत पिशाच बनकर भटकते रहते हैं। अत: दशगात्र श्राद्ध द्वारा चावल आदि के

Tags: 

विप्रवार्ता के सम्बन्ध में विचार और शुभ मंगलकामना

आपका पत्र प्राप्त हुआ आपके विप्रवार्ता के सम्बन्ध में विचार और शुभ मंगलकामनाये प्रेरणा दाई है ,
भविष्य में भी आपका आशीर्वाद बनाये रखे ,आपका संस्कृत आयोजनों की रिपोर्ट एवं जानकारी से अवगत कराये ताकि
पत्रिका में पुरवत प्रकाशन संभव हो सके

Tags: 

Subscribe to RSS - शुभ