नवागढ़ तहसील के छोटे से गांव बर्रा में प्रबोधिनी एकादशी (19 अक्टूबर 1919) को स्व. लक्ष्मी प्रसाद शर्मा जी के घर जन्मे बालक का नाम पिता ने शिव में अपनी अपार शर्धा के रूप में शिव प्रसाद रखा । इनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर इंटर मीडिएट अजमेर बोर्ड से उत्तीर्ण की जिसके बाद स्नातक की डिग्री मारिश कालेज नागपुर से प्राप्त की तथा इसी महाविद्यालय से 1944 में इतिहास विषय पर स्नातकोत्तर की उपाधि गोल्डमेडलके साथ अर्जित किये फिर विधि स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के उपरांत वे अधिवक्ता के रूप में अध्यवसाय के लिए जांजगीर को चुनते हुए जीवन पर्यन्त जांजगीर में रह सामाजिक व राजनीतिक तथा कृषि के कार्य में लगे रहे ।
पं. शिव प्रसाद शर्मा जी ने लोकतंत्र की प्रथम सीढ़ी पंचायत से प्रारंभ की तथा 1952 में जनपद सभा के प्रथम अध्यक्ष तथा 1967 तक लगातार इसी पद पर बने रहे तथा मित्रों के बीच चेयरमेन के नाम से विख्यात हुए ।
स्व. शर्मा जी वर्ष 1977 के आम चुनाव में पहली बार विधानसभा पामगढ़ से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे, विरोधी जनता की लहर के बावजूद श्री शर्मा ने रिकार्ड मतों से चुनाव जीतकर यह साबित किया कि समर्पण भाव से किया गया कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता और लोग इसकी कीमत लगाना भी खूब जानते हैं । वे लगातार तीन बार 77, 80 व 1985 में क्षेत्र से विधायक चुने गये । श्री शर्मा अपने इरादों के पक्के व सिध्दांतों से कभी भी समझोता न करने वाले शख्स थे , 25 मई 1998 में जबह जांजगीर चांपा नाम से जिला अस्तित्व में आया तब वे कांग्रेस कमेटी के प्रथम जिलाध्यक्ष बने तथा कांग्रेस को एक नई दशा व दिशा प्रदान की । इस दौरान जिले में एग्रीटेक कृषि मेला व जाजवल्य देव लोक महोत्सव जैसे गरिमापूर्ण आयोजन के जरिये क्षेत्र के कृषकों को आधुनिक जानकारियां उपलब्ध कराने का इनका प्रयास सदैव याद रखा जायेगा ।
श्री शर्मा जी को इनके समाज सेवा राजनीति और कृषि के क्षेत्र में किये गये सद्प्रयास के अलावा आदर्श जीवन व नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पित व्यकित्तव हेतु छ.ग. ब्राह्मण समाज केन्द्रीय समिति रायपुर की ओर से वर्ष 2006 में शिखर सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है यद्यपि आज पं. शिव प्रसाद शर्मा के रूप में हमारे पास केवल उनकी यादें ही शेष रह गयी है । विप्र वार्ता परिवार की ओर से उन्हें श्रध्दांजलि ।
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