संगठनात्मक कार्यों में लगन और निष्ठा

विप्रकुल गौरव पं अजय त्रिपाठी जी, मैं आप द्वारा प्रेषित राष्ट्रीय युवा संदेश मासिक पत्रिका का लगातार अवलोकन कर रहा हूँ। मुझे यह जानकर अत्यधिक हर्ष है कि आपकी टीम में मेधावान युवा लेखक अपनी लेखनी के माध्यम से विप्र समाज में प्रेरणादायी लेखों द्वारा संगठन के प्रति प्रोत्साहित कर रहे है। मैंने मई2012 के विप्रवार्ता में विनायक शर्मा, राष्ट्रीय सम्पादक हिमाचल प्रदेश का एक लेख पढ़ा। मैं उनके विचारों से बहुत आप्लावित हुआ हूँ। मैं आपकी सेवा में मेरे दो-तीन लेख जो मैंने सम्पादक के रूप में ‘हरि आवाज’ में लिखे थे प्रेषित कर रहा हूँ - पहला 21 अगस्त 1999, दूसरा 5 फरवरी 2002, तीसरा 22 मई 2001 तथा चौथा 5 मई 2000 है। मैं 1992 से निरन्तर अपने लेखों से, अपनी वाणी से यह अपील करता रहा हूँ कि विप्र समाज को भ्रमित करने वाले नये-2 संगठन बनाकर अपनी तुच्छ स्वार्थ वृत्तिपूर्ति हेतु भ्रमजाल न फैलायें। बीस लाख लोगों को रामलीला मैदान में ढिंढोरा पिटने वालों ने क्या समाज को भ्रमित नहीं किया? भ्रमित ही नही किया बल्कि हमारे मान-मर्यादा को गत 25 वर्षों से एकता का जयघोष समस्त भारतवर्ष में हुआ और राजनीतिक आकाओं को सोचने पर बाध्य कर दिया था। उससे इस तथाकथित महाकुंभ ने जो पीड़ा और मानहानि का काम किया है वह वास्तव में निन्दनीय है। विनायक शर्मा की सम्पादकीय को बहुत ही गहनता से और ईमानदारी से ग्रहण करने की आवश्यकता है।
मैं आगामी लेख में इसका विवरण भी दूंगा। कृपया मेरे पूर्व उल्लेखित लेखों का अध्ययन कर लीजिए और आज के परिप्रेक्ष्य में उसे मूर्त रूप देने का प्रयास कीजिए। आप सोचिए विचारिए मैंने मौखिक भी सभी बन्धुओं को प्रार्थना की और बताया कि वर्ष 2004 में मुझे बाईपास सर्जरी करानी थी। मैं ज्यादा ब्राह्मण सम्मेलनों में जाकर समय नहीं दे पा रहा था। अतः मैंने अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष पर का कार्यभार तुरन्त सौंपकर और नये चुनाव कराकर पं॰ महेशदत्त शर्मा को सौंपा। मेरे ठीक होने पर अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा की कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास करके मुझे वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन के अध्यक्ष के रूप में विश्व के विभिन्न देशों में ब्राह्मण संगठन को शक्ति प्रदान करने का दुरूत्तर कार्य दिया। मैं आप बन्धुओं के सहयोग से इसमें सफल हुआ। वर्ष 2003 की अशोका होटल, नई दिल्ली का विश्व ब्राह्मण सम्मेलन, वर्ष 2005 का लन्दन सम्मेलन, और पुनः वर्ष 2007 का न्यू जर्सी, न्यूयार्क, अमरीका का सम्मेलन ब्राह्मण एकता और सुदृढ़ संगठन का परिचायक है। लेकिन दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है कि मुझे विश्व ब्राह्मण संगठन के संगठनात्मक कार्यों में लगन और निष्ठा से कार्य करने का सुअवसर मिला लेकिन अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा में न तो विधिवत् राष्ट्रीय स्तर के चुनाव हुए और अपने-2 स्तर पर दस-बारह राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गये। सभी ने अपने-2 नामपट के विजीटिंग कार्ड छपवा लिये। यह भी एक कटु सच्चाई है कि यह दस-बारह अध्यक्ष ब्राह्मण समाज को भ्रमित करने लगे। इतने लम्बे समय तक ब्राह्मणों की संगठन की एकता का राग अलापते हुए मैंने अपने स्वास्थ्य की भी परवाह नहीं की।
आपके विप्र वार्ता के सम्पादकीय जो विनायक शर्मा द्वारा लिखा गया ब्राह्मण संगठनों के विषय में इतिहास के झरोखों में झांकने का सुअवसर प्रदान किया। भ्रमजाल फैलाने वाले स्वयंभू अध्यक्षों का अब समय लदने वाला है। उनमें से एक का हश्र मैंने देखा की वह ठगी के आरोपों से ग्रस्त भौंडसी जेल में रात काट रहा है। इससे पूर्व भी एक तथाकथित अध्यक्ष तिहाड़ जेल में बंद रहे लेकिन उनका स्वर्गवास हो चुका है। अतः इस विषय में ज्यादा टीका-टिप्पणी करना शोभनीय नहीं है। शोभनीय है तो केवल एक बात कि सेमीनार करके, संगोष्ठियां करके स्थान-2 पर ब्राह्मणों को जागृत किया जाये व उनमें भम्रजाल से दूर रहने की प्रार्थना की जावे। हमारा समाज आतुर और निरीह होकर आप जैसे कर्मठ कार्यकर्त्ताओं की ओर निहार रहा है। उनको भ्रमजाल के अंधकार से निकालकर अपनी लेखनी के माध्यम से प्रकाशमय मार्ग की ओर प्रशस्त करें। भविष्य की मंगलमय शुभकामनाओं सहित।
पं. मांगेराम शर्मा, गुडग़ांव

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