संतान कामना उपाय

1. शिव भक्ति के किसी भी दिन । हिन्दू पंचांग की प्रदोष तिथि ;हिन्दू माह की द्वादशी.त्रयोदशी योग या त्रयोदशी तिथिद्धए चतुर्दशी व सोमवार यथासंभव व्रत रखें। शाम के वक्त एक समय भोजन करें या उपवास रखें।
2. सुबह और शाम दोनों वक्त पति.पत्नी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहन शिवालय या घर पर ही शिवलिंग को पहले जलधारा अर्पित करें। जल धारा सुख और संतान देने वाली मानी गई है।
3. जलधारा के बाद गंधए अक्षतए सफेद चंदनए सफेद वस्त्रए पूरा नारियलए बिल्वपत्र चढाएं। साथ ही पुत्र व सौभाग्य की कामना के लिए विशेष रूप से धतूरे के फूल यथासंभव लाल डंठलवाला धतूरा चढ़ावें।
4.शास्त्रों के मुताबिक धतूरे के एक लाख फूल चढ़ाने का विधान है। किंतु यह संभव न हो तो भाव से प्रसन्न होने वाले महादेव को यथाशक्ति धतूरे के फूल इस मंत्र के साथ अर्पित करें .
भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमहि।
उग्राय उग्रनाशाय शर्वाय शशिमौलिने।
5. पूजा के बाद पति.पत्नी दोनों शिव स्तुतिए शिव मंत्र या रुद्राष्टक का पाठ करें।
6. शिव को मौसमी फलोंए सूखे मेवों या दूध से बनी मिठायों का भोग लगाकर पुत्र कामना पूरी होने की प्रार्थना करें।

हर दिन की इस शिव मंत्र से करें शुरुआतए
यहां बताया जा रहा शिव स्मरण का उपाय शिवमानसपूजा का अंग है। इसे सुबह शिव को बगैर पूजा सामग्रियों के अर्पण के भी ध्यान करें तो पूरी शिव उपासना का फल और मनोरथ सिद्धि देने वाला बताया गया है। फिर भी शिव को कम से कम जलए सफेद आंकड़े के फूल और बिल्वपत्र चढ़ाकर इस श्लोक का ध्यान श्रेष्ठ तरीका होगा।

आत्मा त्वं गिरिजा मतिरू सहचरारू प्राणारू शरीरं गृहं
पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिरू।
सञ्चाररू पदयोरू प्रदक्षिणविधिरू स्त्रोत्राणि सर्वा गिरो
यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम्।।

सरल शब्दों में सार समझें तो इस मंत्र में शिव के प्रति अगाध भक्ति और सर्मपण भाव है। जिसमें इंसान के शरीरए विचारए व्यवहारए बुद्धि और जीवन की सारी क्रियाओं को शिवए पार्वती से लेकर शिवालय का स्वरूप बताकर सभी कर्मों को भी शिव आराधना ही बताया गया है।
शिव के प्रति इस भाव से दिन और कार्य की शुरुआत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास को मजबूत बनाकर पूरा दिन और हर कार्य को सुनिश्चित रूप से सफल और मंगलकारी बना देती है।

प0 अमरेष मिश्र ज्योतिषाचार्य

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