संबंध अनुबंध हिंदी कविता

हमारे तुम्हारे प्यार के सेतु को जोड़ता हुआ ये संबंध
समन्वय पर आधारित है ये अनुबंध
पवन में ज्यों मन्द घुली रहती है ये गन्ध
गीतों में ज्यों कसा रहता है छन्द
स्वर लहरियों मे ंवंशी की आत्मा है ज्यो रंन्ध्र
प्रेम और विश्वास को समर्पित है ये निबंध
ऐसे संबंधों की कभी टूटती नहीं कबन्ध
पूजा घर में ज्यों अगरू क उठती सुगन्ध
विश्वासों के कमल में ज्यों बन्द मकरन्द
ऐसी सुगन्ध जो कभी पड़ती नहीं मन्द।
हमारा तुम्हारा जीवन तो मात्र आपसी समन्वय है,
संगीत में ज्यों सुर ताल और लय है,
जीवन के समर्पण की इसी में जय है
संगीत की सुर ताल, लय बेताल हुई तो प्रलय है
नहीं तो ये जीवन, आजीवन संगीतमय है
संबंधों को जिसने जिया प्रेम से उसकी विजय है
प्यार के मंदिर में उसी साधक की जय है
परमसत्ता की ओर से मिला जिसको अभय है।
हमारे तुम्हारे प्यार के सेतु को जोड़ता हुए ये संबंध
समन्वय पर आधारित है ये अनुबंध।
श्याम मोहन दुबे, जबलपुर

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