संयम

एंकरिंग के लिए वाणी में मधुरता जरूरी - उमा अय्यर रावला

जन्म स्थली बंगलुरु से निकलकर भोपाल में शिक्षा-दीक्षा हासिल करने के बाद देश-विदेश में अपनी माटी की महक फैलाने वाली उमा किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। वे अपनी प्रतिभा का लोहा देश-विदेश के तमाम मंचों पर मनवा चुकी हैं। सुरीली आवाज और सारगर्भित शदों में संबोधन का उनका अंदाज निराला है। बौद्धिक परिपक्वत

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युवाओं के लिए संस्कारवान होना आवश्यक

आज की पीढ़ी में संयम तथा संवेदना का अभाव है। जिसका मुख्य कारण तामसी खानपान, आचार तथा व्यवहार है। चैनलों पर दिखाये जाने वाले अश्लील और उत्तेजनात्मक सीरियल भी इन बातों को बढ़ावा देते हैं। इसका इलाज यही है कि बचपन में ही बच्चों को आत्मसंयम का पाठ पढ़ाया जाये। उनको अच्छे संस्कारों की शिक्षा दी जाये।

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