संस्कार

गर्भाधान संस्कार पहला संस्कार

गर्भाधान संस्कार सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस

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समाज निर्माण में संस्कार की भूमिका

किसी भी समाज को चिरस्थायी प्रगत और उन्नत बनाने के लिए कोई न कोई व्यवस्था देनी ही पडती है और संसार के किसी भी मानवीय समाज में इस विषय पर भारत से ज्यादा चिंतन नहीं हुआ है। कोई भी समाज तभी महान बनता है जब उसके अवयव श्रेष्ठ हों। उन घटकों को श्रेष्ठ बनाने के लिए यह अत्यावश्यक है कि उनमें दया, करुणा, आ

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विवाह-संस्कार

अपनी भारतीय संस्कृति में विवाह दो आत्माओं का पवित्र बंधन है । दो प्राणी अपने अलग- अलग अस्तित्वों को समाप्त कर एक सम्मिलित इकाई का निर्माण करते हैं । स्त्री और पुरूष दोनों में ईश्वर ने कुछ विशेषताएं और कुछ अपूर्णताएं दे रखी है । विवाह सम्मिलन से एक दूसरे की अपूर्णताओं को अपनी विशेषताओं से पूर्ण कर

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7वें वर्ल्ड ब्राहम्ण ऑर्गेनाइजेषन अधिवेषन 2,3,4,5 मार्च 13

ब्राहम्ण संगठन के लिए 7वें वर्ल्ड ब्राहम्ण ऑर्गेनाइजेषन के 21 सूत्रीय उद्देष्य:-1. ब्राहम्णों में राम राज्य वाले संस्कार और आचरण जरुरी:

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महासंगठन क्यों नहीं ?

सभी संगठनों को मिला महासंगठन क्यों नहीं ? मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और मनुष्य का चहुंमुखी विकास समाज के अन्दर ही संभव है. समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सुसंकृत होना अति आवश्यक है और इसके लिए हमे सब मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है.

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रूढि़वादिता से दूर रहें

अच्छे संस्कारों एवं उच्च आदर्शों का पालन करना अच्छी बात है, परन्तु जिन मान्यताओं के पीछे कोई वैज्ञनिकता न हो, जिनके पीछे कोई ठोस प्रमाण न हो ऐसी मान्यताओं को नहीं मानना चाहिये।

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ब्राह्मणों में रामराज्य वाला संस्कार और आचरण जरूरी

आज इस विषय में हमें विचार करना है कि हम ब्राह्मण क्या थे और आज क्या हो

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12 फरवरी सामूहिक उपनयन संस्कार

छत्तीसगढ़ द्विज परिषद 12 फरवरी को आयोजित करेगा सामूहिक उपनयन संस्कार बालकोनगर, छत्तीसगढ़ द्विज परिषद 12 फरवरी, 2012 को बालकोनगर के श्रीराम मंदिर परिसर में सामूहिक ‘उपनयन संस्कार’ आयोजित करेगा। कार्यक्रम में भागीदारी के इच्छुक परिवारजन पंजीयन के लिए 6 फरवरी, 2012 तक द्विज परिषद के पदाधिकारियों से

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माघ मास में नहीं होंगे मांगलिक संस्कार

इलाहाबाद ।इस इसवर्ष बार माघ मास में मांगलिक संस्कार नहीं होंगे । पौष पूर्णिमा सेएकजुटरहने ष्लप्र पूर्णिमा मास पर्यत विवाह, यज्ञोपवित , मुण्डन , छेदन व प्राणप्रतिष्ठाजैसे प्रतिष्ठा ्रुख्रसेबने मांगलिक, धार्मिक, सामाजिक, संस्कारों का निषेध रहेगा । हालांकि कल्पवासी नियमसंयमपूर्वक र्झेप्रष्ँ्रूवअमिता

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शाकद्वीपीय ब्राह्मण

ऋक, वाक्य ब्रह्म जानाति इति ब्राह्मण: से स्पष्ट है कि ब्राह्मण जाति ही नहीं, बल्कि एक संस्कृति संस्कार है । सामाजिक व्यवस्था के अंतर्गत यह शब्द जाति सूचक हो गया जो तत्कालीन सामाजिक कारणों से विभिन्न वर्गों में विभक्त होता गया । यद्यपि पौराणिक ग्रंथों में ब्राह्मण ही उल्लिखित है परन्तु वेद पुरा

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