

प्राचीन संस्कृति का हिमायती समाज यह जान ले कि देववाणी और दिव्य भाषा जैसे विशेषणों से सुसज्जित संस्कृत भाषा लगभग निष्क्रिय पड़ी है । वैज्ञानिक भले ही इसे कं म्प्यूटर के लिए विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा स्वीकारते हों लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार भी इसे दो कौड़ी की भाषा समझती है । संस्कृत भाषा आज अपने अस्तित्व के लिए छटपटा रही है ।
राज्य सरकारों ने जहां इस भाषा के विकास के कार्यक्रम को क्रियाकर्म में तब्दील कर दिया है, वहीं केन्द्र सरकार का नजरिया भी कमोबेश ऐसा ही है । मानव संसाधन मंत्रालय का संस्कृत विभाग मृतप्राय सा पड़ा है ।
उत्तर प्रदेश में पहले इंटरमीडिएट स्तर तक संस्कृत की शिक्षा दी जाती थी जिससे आयुर्वेद पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सहूलियत हो । यही हाल दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी पाठयक्रमके साथ संस्कृत शिक्षा अनिवार्य थी लेकिन अब यह अनिवार्यता खत्म हो चुकी है । राज्य स्तर पर जो संस्कृत स्कूल हैं उनके भवनों की दशा खराब है और शिक्षकों को वेतन भी समय पर नहीं मिल रहा है । विभिन्न राज्यों के संस्कृत विद्यालयों से छात्र नदारद हैं । read more »

समता सोसायटी प्रांगण में छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज केन्द्रीय समिति द्वारा आज सामूहिक व्रतबंध समारोह का आयोजन किया गया । यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ25 ङ्खह्न बटुकों का व्रतबंध संपन्न हुआ । पूर्ण ब्र्राह्मणत्व प्राप्ति के लिए जनेउ धारण समारोह मे बच्चों के साथ ही परिजन उत्साह के साथ पहुंचे । शुभारंभ भगवान परशुराम तथा माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुआ । वैदिक धार्मिक परम्परानुसार मंडपाच्छादन, हरिद्रालेपन, बटुकों का पूजन, मुंडन, जनेउ धारण कराया गया । यहां माहौल शादी जैसा रहा ।
बच्चों को ठीक उसी तरह हल्दी लगाई जिस तरह शादी के मौके पर लगाई जाती है । बटुकों की माताएं इस कार्य में जुटी हुई दिखाई पड़ी । यहां मुख्य जजमान बिहारीलाल शर्मा व धर्मपत्नी सुनीता शर्मा थी ।
कार्यक्रम के मुख्य पंडित ओमप्रकाश शर्मा थे । संचालर्नकत्ता प्रांताध्यक्ष डॉ. प्रकाशनारायण शुक्ला, ललित मिश्रा, बोधन पांडे, राजेश शर्मा, सतीश शर्मा, अशोक शर्मा, सुरेन्द्र शुक्ला, मंजू शर्मा, धनंज य त्रिपाठी, प्रमोद तिवारी, रमादेवी शर्मा, नीरजा शर्मा, भारती शर्मा, डॉ. संध्या तिवारी, सतानंद शर्मा, रामविशाल शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे । read more »

Om Baba Speech in Sanskrit Weekend in Ashirwad Bhawan Raipur, Chhattisgarh.
डॉ. श्यामनारायण शुक्ला (मेरे भइया) एवं उनकी पत्नी श्रीमती निर्मला शुक्ला दोनों मिलकर एक साथ रविवारको मंदिर में संस्कृत की कक्षा चलाते हैं । वर्तमान में वे फ्रीमांट नामक शहर में निवासरत है । फ्रीमांट नामक शहर सेनफ्रांससिको से 30 मील की दूरी पर स्थित है ।
यह बे एरिया क्षेत्र कहलाता है। डाँ. शुक्ला 1960 में एस.डी.ओ. की पी.डब्ल्यू. डी. की नौकरी छोड़कर आगे की पढ़ाई के लिए केनेडा चले गये । वहां उन्होंने एम.ई. एवं पी-एच.डी. की पढ़ाई पूर्ण किया एवं हमेशा के लिए यू.एस.ए. में फ्रीमांट में बस गये । अब वहां तीन छोटे भाइयों के साथ 32 सदस्यीय परिवार निवासरत है । फ्रीमांट में बहुत से प्रवासी भारतीय निवास करते हैं । डॉ. शुक्ला वहां के इंडियन एसोसियेशन के अध्यक्ष हैं । read more »
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