संस्कृत

विप्रजनों ने संस्कृत भाषा और संस्कृति रक्षा की शपथ ली

चाणक्य स्मृति दिवस,
चाणक्य स्मृति दिवस,विप्र वार्ता,
चाणक्य स्मृति दिवस,
चाणक्य स्मृति दिवस
चाणक्य स्मृति दिवस,
चाणक्य स्मृति दिवस

त्यागी,निस्वार्थी सलाहकार से ही राज्य का श्रेष्ठ संचालन संभव, चाणक्य स्मृति दिवस पर शपथ समारोह आयोजित

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तुलसीदास का वाग्विनोद

संसार की किसी भी भाषा में शायद ही कोई ऐसा कवि उत्पन्न हुआ हो जिसकी समानता तुलसीदास से की जा सके। तुलसीदास की कृतियों में इतनी विविधता है कि किसी भी रूचि का पाठक उससे अपार तृष्ति पा सकता है । महात्माओं को रामचरित मानस के समान दूसरा कोई आध्यात्मिक ग्रन्थ नहीं मिलता। भक्तों को उसके समान कोई भक्ति ग

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संस्कृत महाविद्यालय को विश्वविद्यालय

संस्कृत महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्ज देने सुझाव, स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति में देववाणी के रूप में लोकप्रिय संस्कृत भाषा का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है । संस्कृत भाषा के वैभव को लौटाने के लिए इस भाषा का नई पीढ़ी के बीच अधिक से अधिक प्रचार

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संस्कृत भाषा को बढ़ावा

पेशे से शिक्षक रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.मांगेराम शर्मा ने देश की शिक्षा व्यवस्था में तीन बातों को प्रमुख रूप से शामिल करने पर जोर दिया । पहला तकनीकी आधारित शिक्षा, दूसरा अपनी भाषा और तीसरा आधारभूत संरचना ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में एक सैजी हो । हिन्दुओं और खासकर ब्राह्मणों की दयनीय हालत पर चिंत

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विप्रवार्ता के सम्बन्ध में विचार और शुभ मंगलकामना

आपका पत्र प्राप्त हुआ आपके विप्रवार्ता के सम्बन्ध में विचार और शुभ मंगलकामनाये प्रेरणा दाई है ,
भविष्य में भी आपका आशीर्वाद बनाये रखे ,आपका संस्कृत आयोजनों की रिपोर्ट एवं जानकारी से अवगत कराये ताकि
पत्रिका में पुरवत प्रकाशन संभव हो सके

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शिक्षा और संवाद की भाषा क्या हो?

कोई भी जागृत समाज अपने लिए श्रेष्ठ विकल्पों का ही चयन करता है। समाज के लिए जागृति में यह तय करना चाहिए कि उसकी शिक्षा और संवाद की भाषा क्या हो?

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शिक्षा और संवाद की भाषा क्या हो?

कोई भी जागृत समाज अपने लिए श्रेष्ठ विकल्पों का ही चयन करता है। समाज के लिए जागृति में यह तय करना चाहिए कि उसकी शिक्षा और संवाद की भाषा क्या हो?

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संस्कृत के विकास से प्राचीन गौरव

संस्कृत भाषा के विकास से ही भारत को विश्वगुरू का प्राचीन गौरव मिलेगा। भारत को अगर अपना प्राचीन गौरव हासिल करना है तो संस्कृत को प्रोत्साहन देना ही होगा। क्योंकि संस्कृत से ही संस्कृति का विकास हुआ है।यह विचार नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर ने एनआईटीटीटीआर में व्यक्त किए। वे यहाँ अखिल

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संस्कृत विद्यालय की पढ़ने- पढ़ाने की शैली अनूठी है-विनोद शास्त्री

बिलासपुर । श्री निवास संस्कृत महाविद्यालय में कांशी से पधारे हुए संस्कृत के आचार्य पं.

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